शुल्क वृद्घि को लेकर केजीएमयू का माहौल गरमाया, निशाने पर कुलपति

ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं होने से हैं नाराज, परीक्षा फीस में की गई ढाई गुना बढ़ोतरी, आर-पार की लड़ाई के मूड में छात्र व रेजीडेंट डॉक्टर

captureवीरेंद्र पाण्डेय
लखनऊ। केजीएमयू में सभी स्नातक व परास्नातक कोर्स की परीक्षा शुल्क में ढाई गुने की बढ़ोतरी किए जाने से संस्थान के मेडिकोज व रेजीडेंट डॉक्टरों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। हालात यह है कि नाराज मेडिकोज आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सूत्रों की माने तो उनके निशाने पर केजीएमयू के वीसी हैं। यदि मौजूदा परीक्षा शुल्क पहले जैसा नहीं किया जाता है तो मेडिकोज हर मोर्चे पर वीसी प्रो. रविकांत से दो-दो हाथ करने के मूड में है। शुल्क वृद्घि के मुद्दे पर रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इससे पहले कुलपति प्रो. रविकांत को परीक्षा शुल्क कम करने के आग्रह के साथ राज्यपाल व कुलाधिपति रामनाईक को भी ज्ञापन भेज कर हस्तक्षेप करने अनुरोध किया था। लेकिन अभी तक कोई नतीजा न निकलने पर मेडिकोज आक्रोशित हो रहे है। इससे पहले बीते मंगलवार को केजीएमयू के एमबीबीएस व बीडीएस के मेडिकोज ने परीक्षा शुल्क बढ़ाये जाने का विरोध करते हुए कुलपति कार्यालय पर प्रदर्शन किया था।
मेडिकोज व रेजीडेंट डॉक्टरों ने कुलपति को लिखे पत्र में इस बात की जिक्र किया था कि बीते तीन वर्षों में केजीएमयू प्रशासन ने लगभग पांच गुना तक फीस में बढ़ोतरी की है। ऐसे में गरीब छात्र जो सरकारी संस्थानों में कम फीस देकर डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं, वो अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है। छात्रों ने कहा कि यदि फीस वृद्घि वापस नहीं ली गई तो वह अब कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाएंगे। केजीएमयू प्रशासन ने छह से 15 हजार और एमडी-एमएस में 12 से 30 हजार रुपए प्रति परीक्षा कर दी गई है। यह फीस हर वर्ष परीक्षा के लिए देना होगा। केजीएमयू प्रशासन द्वारा निर्धारित की गई फीस में एमबीबीएस स्टूडेंट्स को अब 6,000 की बजाए 15,000 रुपए परीक्षा फीस देनी होगी।

कुलपति पर फिर उठी उंगली

केजीएमयू के शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री कार्यालय को चिठ्ठी लिखी है। पत्र में कुलपति रविकांत पर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं को लेकर आरोप लगाया गया है। संघ के महासचिव डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि जनवरी माह में प्रधानमंत्री का आगमन हो रहा है। उस समय कुलपति प्रधानमंत्री के साथ मंच साझा करेंगे। उन्होंने बताया कि इस पर शिक्षक संघ को आपत्ति है कि एक तरफ प्रधानमंत्री का बेदाग एवं चरित्रवान व्यक्तित्व है वहीं दूसरी तरफ कुलपति पर भ्रष्टïाचार के विभिन्न आरोप हैं, जिसकी जांच आज भी राजभवन में लंबित पड़ी है। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ कुलपति का मंच साझा करने से गलत संदेश जा सकता है। इसके अलावा शिक्षक संघ ने चिठ्ठïी में कुलपति के खिलाफ राजभवन में लंबित जांच में भी हस्ताक्षेप करने की मांग की गई है।

बैकफु ट पर आये कुलपति
केजीएमयू में शुल्क वृद्घि के बाद माहौल गर्म होता जा रहा है। मेडिकोज से लेकर रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के हर स्तर पर लड़ाई छेडऩे की खबर से कुलपति भी बैकफुट पर आते नजर आ रहे हैं। सूत्रों की माने तो कुलपति प्रो. रविकांत ने अपने मौखिक आदेश में एक चिकित्सक के ऊपर जिम्मेदारी छोड़ दी है कि वे जिस छात्र की फीस कम करना चाहे तो लिख कर दे दें। उस छात्र की फीस कम हो जायेगी। लेकिन छात्र इस पर भी तैयार नहीं हुए। छात्रों का कहना है कि यदि फीस कम हो तो सभी की कम हो। उन्होंने कुलपति पर छात्रों को बांट कर मुद्दे से भटकाने का आरोप लगाया है।

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