शिवालयों में हर-हर महादेव की गूंज

भक्तों ने शिव को प्रसन्न करने के लिए रखा व्रत

सावन के पहले सोमवार पर मंदिरों में जुटी भीड़

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सावन के पहले सोमवार पर सभी शिवालयों में भोलेनाथ के भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर-हर महादेव की जयकारों और मंदिर के घंटों की आवाजों से सारा वातावरण भक्तिमय हो गया। लंबी कतार में खड़े होकर भक्तों ने शिव के दर्शन करने के साथ ही भांग, धतुरा, बेल पत्र और दूध चढ़ाकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम किये गये हैं।
भोलेनाथ के दर्शन और उनकी पूजा अर्चना करने के लिए बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर और चन्द्रिकेश्वर महादेव मंदिर में सुबह 5 बजे से भक्तों की लंबी लाइन लग गई। हर-हर महादेव के जयकारों के बीच एक-एक कर दर्शन करने वालों का सिलसिला चलता रहा। मंदिरों के बाहर पुष्प, धतुरा, बेल पत्र, अगरबत्ती, नारियल और चुनरी समेत कई प्रकार की पूजन सामग्री से सजी दुकानें सजी थी।

चाक-चौबंद रही सुरक्षा
प्रशासन की तरफ से मनकामेश्वर मंदिर, बुद्घेश्वर मंदिर और चन्द्रिका देवी मंदिर समेत अन्य सभी मंदिरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यहां पुरुष और महिला पुलिस बल की तैनाती के साथ ही सीसीटीवी कैमरे और मेटल डिटेक्टर लगाये गये हैं। सावन के पहले सोमवार पर जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिरों में बैरीकेडिंग भी लगाई गई थी। इसमें सेक्टर मैजिस्ट्रेट और क्षेत्राधिकारी पुलिस के साथ ही पीएसी के जवानों की भी तैनाती की गई है।
सडक़ों पर कांवरियों की भीड़
केसरियां रंग के कपड़े पहने और कांधे पर कांवर लिए सै$कड़ों कांवरियों की भीड़ सडक़ों पर दिखी। कांवरिये अपनी धुन में मस्त होकर भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगा रहे थे। पूरे सावन माह मनकामेश्वर, चंद्रिकादेवी, बुद्घेश्वर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों के बाहर महीने भर तक मेला भी लगेगा।

व्रत का महत्व
वेदों में मान्यता है कि सावन में शिवालयों में दर्शन करने, शिवलिंग पर दूध, बेल पत्र, भांग और धतुरा चढ़ाने पर भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं। इसीलिए भक्तगण 16 सोमवार का व्रत रखते हैं। जो लोग ऐसा नहीं कर पाते वह सावन के महीने में पडऩे वाले हर सोमवार को व्रत रहते हैं। सावन में युवतियां अपने लिए सुंदर वर और परिवार में सुख सम्पन्नता के लिए सोमवार का व्रत करती हैं।

60 रुपये किग्रा तक बिका दूध
मंदिरों में भोलेनाथ को अधिकांश भक्तों ने दूध से नहलाया। मंदिर के बाहर दूध बेचने वाले दुकानदारों ने मनमुताबिक दूध के दाम लगाकर बेचना शुरू कर दिया। इसमें सामान्य दिनों में 40 रुपये प्रति किग्रा की कीमत में बिकने वाला दूध 60 रुपये प्रति किग्रा तक बिका। इस दूध में पानी मिलाकर दुधियों में खूब कमाई की। इसके साथ ही मंदिरों के बाहर सांपों को दूध पिलाने और उनको पैसा चढ़ाने वालों की भीड़ जुटी रही।

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