शिक्षा के साथ खिलवाड़

फिलहाल बिहार बोर्ड के टॉपर्स मामले में रूबी राय, सौरव श्रेष्ठ और राहुल कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में कॉलेज के डायरेक्टर बिशुन राय का भी नाम है। यहां एक बात सही रही कि नीतीश सरकार ने बिना देरी के इस मामले में यह स्वीकार कर लिया कि बिहार इंटर मेरिट घोटाला आपराधिक मामला है और इसकी जांच पुलिस को सौंप दी।

sanjay sharma editor5अभी तक बिहार में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में नकल होना चर्चा का विषय होता था, लेकिन अबकी चर्चा दूसरी वजह से है। इस बार तो शिक्षा की शुचिता के साथ ऐसा खिलवाड़ किया गया है कि वह न तो समाज के लिए ठीक है और न ही उन छात्रों के लिए जिन्हें परीक्षा में उच्च स्थान दिया गया। हाल ही में इंटरमीडिएट के नतीजों में कला संकाय की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान पाने वाली रूबी कुमारी से जब कुछ पत्रकारों ने परीक्षा से संबंधित साधारण सवाल किए तो वह नहीं बता पाई। इसी तरह, विज्ञान संकाय में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले सौरव श्रेष्ठ को भी अपने विषय से संबंधित बहुत मामूली जानकारी तक नहीं थी। खबरें आने के बाद जब मामले ने तूल पकड़ा, तब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने कला और विज्ञान परीक्षा के नतीजों पर रोक लगाते हुए इन संकायों में पहले सात स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दोबारा जांच के लिए बुलाया।
फिलहाल बिहार बोर्ड के टॉपर्स मामले में रूबी राय, सौरव श्रेष्ठ और राहुल कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में कॉलेज के डायरेक्टर बिशुन राय का भी नाम है। यहां एक बात सही रही कि नीतीश सरकार ने बिना देरी के इस मामले में यह स्वीकार कर लिया कि बिहार इंटर मेरिट घोटाला आपराधिक मामला है और इसकी जांच पुलिस को सौंप दी। जबकि अफसरशाही इस मामले में लीपापोती करने में जुटी थी। किसी भी प्रदेश में कहीं कोई घोटाला होता है तो उसके दोषी कहीं न कहीं अफसर होते हैं। यदि अफसरशाही अपना काम ईमानदारी से करे तो शायद इतने बड़े घोटाले न हो। बिहार में नकल माफियाओं का वर्चस्व चरम पर है यह बात तो जगजाहिर थी, लेकिन इस कारनामें से बिहार की परीक्षा प्रणाली पर इस बार कहीं ज्यादा ही सवाल उठ रहे हैं।
जिस तरह से शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है वह कतई ठीक नहीं है। स्कूल प्रशासन अपने लाभ के लिए छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अपने स्कूल की प्रसिद्धि के लिए स्कूल प्रशासन नकल को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि उनके स्कूल के ज्यादा से ज्यादा छात्र अच्छे अंक से उत्तीर्ण हो। ऐसा करने से स्कूलों को तो फायदा मिल रहा है लेकिन इससे छात्रों का सिर्फ नुकसान हो रहा है। नकल से वह अच्छे अंकों से पास हो जा रहे हैं। उन्हें डिग्री मिल जा रही है, पर वह प्रतियोगी परीक्षा में अपने बलबूते सफलता अर्जित करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। शिक्षा तभी सार्थक होती है जब उसमें कठिन परिश्रम किया गया हो। कठिन परिश्रम से हासिल की गई शिक्षा पूरे जीवन काम आती है। नकल से डिग्री मिल जाती है लेकिन ज्ञान नहीं हासिल हो पाता।

Pin It