शिकायत निस्तारण की गुणवत्ता जाचेंगे नामित नोडल अधिकारी

शिकायत सही मिलने पर होगी कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिलाधिकारी राजशेखर ने राजस्व अभिलेखों में कूट रचना, फर्जी प्रविष्टि, जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर भूमि हड़पने से संबंधित मामलों की पारदर्शी जांच कराने का निर्णय लिया है। इसमें तहसील और जनपद स्तर पर स्थापित हेल्प डेस्क सेंटर में आने वाली शिकायतों की गुणवत्तापरक जांच करने के लिए नोडल अधिकारी नामित किये गये हैं।
जिलाधिकारी के मुताबिक बीकेटी तहसील में 10 हेल्प डेस्क सेंटर में आने वाली शिकायतों की जांच अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व धनजंय शुक्ला और नौ हेल्प डेस्क सेंटर में आने वाले शिकायतों से संबंधित जांच अपर जिलाधिकारी भू. अ. प्रथम आरपी सिंह को दी गई है। मोहनलालगंज तहसील में प्राप्त सात सन्दर्भो की गुणवत्ता पर जांच का जिम्मा अपर जिलाधिकारी आपूर्ति ओम प्रकाश राय को दिया गया है। सदर तहसील में प्राप्त आठ सन्दर्भो की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी प्रशासन राजेश कुमार पाण्डेय और तहसील मलिहाबाद में प्राप्त चार संदभों की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी भू .अ. द्वितीय शिव प्रसाद आनन्द को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। नामित नोडल अधिकारी का दायित्व होगा कि जनपद व तहसील स्तर पर हेल्प डेस्क सेंटर में आने वाली शिकायतों के बारे में संबंधित उपजिलाधिकारी व तहसीलदार स्तर से की गयी कार्यवाही और जांच की गुणवत्ता जांच कर समीक्षा करेंगे। उन्होने बताया कि शिकायत की तह तक जाने के लिए नामित नोडल अधिकारी स्वयं स्थलीय एवं अभिलेखों का संग्रहण भी करेंगे। जिला स्तर पर नामित नोडल अधिकारी को कथित शिकायत की पुष्टि होने पर संबंधित का उत्तरदायित्व निर्धारित करने और उनके विरूद्ध सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत कार्यवाही की रिपोर्ट 15 अगस्त तक जिलाधिकारी को सौंपना अनिवार्य है।

आज भी प्रेमचंद की कथाएं उन्हें जीवित रखती हैं

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में गुरुवार को हिन्दी विभाग में कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठïी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि प्र्रोफेसर रमेशचंद दीक्षित प्रख्यात राजनीति एंव साहित्य वेत्ता ने अपने अपने वक्तव्य में उनकी कथा के विषय में प्रकाश डाला।
प्रो. रमेशचंद त्रिपाठी ने प्रेमचंद की पत्रकारिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उस दौर में पत्रकारिता व्यवसाय नहीं बल्कि जनता की समस्याओं, समाज में व्याप्त कुरीतियों और व्यवस्था को आइना दिखाने का काम करती थी। आज के दौर में पत्रकारिता का रूप बदलता जा रहा है। हमें प्रेमचंद के काल की पत्रकारिता से सीख लेने की जरूरत है। आधुनिकता के साथ पत्रकारिता के मूल्यों को ध्यान में रखकर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को मजबूती देने का काम करना चाहिये। कार्यक्रम में मुंशी प्रेमचंद की कथाओं से लेकर उनकी उपलब्धियों के विषय में कई प्रोफेसरों ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का उद्ेश्य केवल यही था की आज की पीढ़ी भी कथाकार प्रेमचंद के जीवन के विषय में गहराई से जान सकें। इस अवसर पर उनकी कथाओं की चर्चा की। कार्यक्रम में खासकर ठाकुर का कुआं और ‘कफन’, ‘प्रभूति’ कहानी का विश्लेषण किया। साथ ही प्रो रीता चौधरी ने कहा वह प्रतिभाओं के धनी थे उन्हें किसी एक सीमा में निर्धारित करना बहुत ही मुश्किल काम है। इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों साहित काफी संख्या में शिक्षक भी शामिल हुए।

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