शहीदों के परिजनों का सम्मान

सेना की नौकरी इतनी आसान नहीं होती। जवानों को बहुत सारी कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। वह लोग भी इंसान हैं। उन्हें भी अपने परिवार की याद आती है। वह भी जरूरत के समय अपने परिवार के बीच पहुंचना चाहते हैं। वह भी परिवार के सुख-दुख में शामिल होना चाहते हैं।

sanjay sharma editor5पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया और उनके सुख-दुख में मदद करने का आश्वासन भी दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार शहीदों के परिजनों के साथ है। निश्चित ही शहीदों के परिजनों को अच्छा लगा होगा। जाहिर सी बात है कि जवानों की वहज से ही हम सब सुरक्षित महसूस करते हैं। सीमा पर जवान रात-रात भर जग कर पहरा देते हैं तभी देश की जनता रात को सुकून की नींद सोती है। जब भी देश पर कोई आफत आती है तो सेना के जवान ही सबसे पहले पहुंचते हैं। अपनी जान की परवाह न कर लोगों की जान बचाते हैं। ऐसा काम सिर्फ सेना के जवान ही कर सकते हैं। आपदा से लेकर आतंकवादी घटनाओं तक में सेना के साथ पुलिस के लोग सबसे पहले मोर्चा लेते हैं। उनकी बहादुरी और हिम्मत को जितना सराहा जाए कम है। इसलिए सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि इनके परिजनों की जरूरतों को पूरा करे। यदि शहीद के परिजन उपेक्षित होंगे तो निश्चित ही युवाओं का सेना की नौकरी में रुझान कम होगा। वैसे भी आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।
पहले की अपेक्षा अब युवा सेना की नौकरी में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इधर कुछ सालों में सेना के जवानों के आत्महत्या करने के आंकड़ों में भी वृद्धि हुई है। कई रिसर्च रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ था कि सेना के जवानों में लगातार कुंठा बढ़ती जा रही है और अधिकांश जवान वीआरएस ले रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सामने आया था कि उनको छुट्ïिटयां नहीं मिलतीं। परिवार से लगातार दूर रहने की वजह से जवानों में कुंठा बढ़ रही है इसीलिए वो घातक कदम उठा रहे हैं। यह भी कम चौंकाने वाली घटना नहीं है कि सबसे ज्यादा आत्महत्या सेना के जवान ही कर रहे हैं। यह सच्चाई है कि परिवार सबकी कमजोरी होती है। परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए ही आदमी कठिन से कठिन काम करता है। आदमी अपने परिवार के बीच अपने सारे दुखों को भूल जाता है। जब आदमी किसी परेशानी से जूझता है तो उसे अपने परिवार के साथ ही सुकून मिलता है।
सेना की नौकरी इतनी आसान नहीं होती। जवानों को बहुत सारी कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। वह लोग भी इंसान हैं। उन्हें भी अपने परिवार की याद आती है। वह भी जरूरत के समय अपने परिवार के बीच पहुंचना चाहते हैं। वह भी परिवार के सुख-दुख में शामिल होना चाहते हैं। इसलिए उनकी समस्याओं की तरफ भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। हमारे देश के जवान अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन बहुत ही ईमानदारी से करते हैं। देश सेवा का जज्बा उनमें कूट-कूटकर भरा है। वह अपनी प्राथमिकता जानते हैं। इसलिए सेना के जवानों और उनके परिजनों के हित में सरकार को बेहतर से बेहतर काम करना चाहिए। वो हमारे देश की शान हैं।

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