शहाबुद्दीन का महिमामंडन

“बिहार के सिवान जिले में तीन भाइयों की हत्या के मामले में नामजद और जेल में बंद शहाबुद्दीन को वर्षों बाद जमानत मिलना न्याय की आस मेें बैठे पजिनों के लिए बुरी खबर है। इस केस में शुरू से ही शहाबुद्दीन का पलड़ा भारी लग रहा है, जिस तरह केस से जुड़े लोगों ने अपने बयान बदले और पुलिस मामले की गंभीर जांच पड़ताल के बाद भी ठोस सबूत नहीं जुटा सकी, उससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में शहाबुद्दीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया जायेगा।”

sanjay sharma editor5बिहार में बाहुबली शहाबुद्दीन की जमानत पर रिहाई और उसका महिमामंडन न्यायप्रिय जनता के लिए खतरनाक है। प्रदेश में उसकी रिहाई के बाद मनाया जाने वाला जश्न, निश्चित तौर पर कानून व्यवस्था के लिए खुली चुनौती है। इससे प्रदेश में जंगलराज और आम जनता की मजबूरी की भयानक तस्वीर सामने आई है। जो आने वाले कल की भयावह तस्वीर पेश करती है।
बिहार के सिवान जिले में तीन भाइयों की हत्या के मामले में नामजद और जेल में बंद शहाबुद्दीन को वर्षों बाद जमानत मिलना न्याय की आस मेें बैठे पजिनों के लिए बुरी खबर है। इस केस में शुरू से ही शहाबुद्दीन का पलड़ा भारी लग रहा है, जिस तरह केस से जुड़े लोगों ने अपने बयान बदले और पुलिस मामले की गंभीर जांच पड़ताल के बाद भी ठोस सबूत नहीं जुटा सकी, उससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में शहाबुद्दीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया जायेगा। इतना ही नहीं शहाबुद्दीन के खिलाफ बेटों की हत्या का केस लडऩे वाले बुजुर्ग मां-बाप को मिल रही धमकियां भी भविष्य में केस को लेकर पुलिस की छानबीन और कोर्ट के फैसलों की तरफ इशारा करती हैं। हालांकि जवान बेटों की लाशें देखने वाले बुजुर्ग मां-बाप का कहना है कि मौत तो एक दिन आनी ही है, वह शहाबुद्दीन के हाथों आये या फिर भगवान की मर्जी से आये। लेकिन न्याय की लड़ाई लड़ते रहेंगे। वहीं सिवान में शहाबुद्दीन के समर्थकों की तरफ से ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि उसे झूठे मामलों में फंसाकर बदनाम करने की साजिश रची गई है, जिसको बहुत जल्द बेनकाब कर दिया जायेगा। यह शहाबुद्दीन के महिमामंडन की पराकाष्ठा ही कही जायेग। जबकि हकीकत क्या है, इसे बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है।
जिस तरह शहाबुद्दीन की कारों के लश्कर को जेल से घर तक जाने की आंखें मूंद कर छुट दी गई। उसके समर्थकों ने जगह-जगह रास्ते को रोककर नाच-गाना और जश्न मनाया। शहाबुद्दीन की रिहाई के खिलाफ टिप्पणी करने वालों को डराया-धमकाया जाने लगा। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुशासन की बात करने वाले नीतीश कुमार और बिहार की हालत क्या है। फिलहाल शहाबुद्दीन ने लालू प्रसाद का गुणगान करके अपनी आधी समस्याओं का हल निकाल लिया है। उसे पता है, जब तक लालू का हाथ उसके सिर पर रहेगा, उसका बुरा नहीं होगा। जबकि प्रशांत भूषण ने सिवान में तीन भाइयों की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन की जमानत पर रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा कर दी है। यदि गवाहों ने सच्चाई का साथ दिया होता, तो शहाबुद्दीन जेल के अंदर ही होता।

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