शहर से बाहर डेयरियां निकालने में नगर निगम फेल

  • पूर्व मुख्य सचिव के निर्देशों का भी नहीं हुआ पालन
  • रोडों पर हर वक्त काबिज रहती है आवारा पशुओं की फौज

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। माननीयों के आदेशों को नगर निगम दर किनार करते हुए अन्य कार्यों को ज्यादा वरीयता देता दिखार्ई दे रहा है। तभी तो डेयरियों को शहर से बाहर करने में अभी तक नगर निगम लगभग नाकाम रहा है। पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए तीन महीने का समय दिया था। इससे पहले हाईकोर्ट लगभग आधा दर्जन बार आदेश दे चुका है लेकिन नगर निगम के स्तर से सिर्फ कागजी कार्रवाई ही की गई है। आलम यह है कि शहर के सबसे पॉश इलाके और सीएम आवास से महज कुछ ही दूरी पर नगर निगम और पुलिस वालों की शह पर डेयरियां फल फूल रही हैं। इनकों रोकने वाला कोई नहीं है।
नगर निगम और पुलिस की शह पर चल रही डेयरियां
जियामऊ, हजरतगंज और नरही में बंद घरों में जानवर पाले जा रहे हैं। नगर निगम और पुलिस की मिलीभगत से शहर के भीतर अवैध रूप से डेयरी चल रही हैं। महानगर, अलीगंज तथा सीतापुर रोड पर इंजीनियरिंग कालेज चौराहे से लेकर पॉलीटेक्निक चौराहे तक भैंस बीच सडक़ पर सुबह-शाम परेड करती नजर आती हैं।
गायों को दुहने के बाद छोड़ दिया जाता है खुला
गायों को दुहने के बाद दूधिए खुला छोड़ देते हैं। इस दौरान आने जाने वाले वाहनों के लिए यह जानवर दुर्घटना का सबब भी बन जाते हैं। एनएचआई रोड पर वाहनों के साथ ही आवारा पशुओं का जमघट रोज देखा जा सकता है। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस बूथ हो, सडक़ अथवा सर्विस रोड या फिर डिवाइडर हर जगह बस यही नजर आते हैं।
जानवरों की उग्रता से लोगों में दहशत
कुर्सी रोड पर बटहा सुबौली सब्जी मंडी में आने वाले लोग किसी और को भी साथ में लेकर आते जाते हैं कारण हैं कि यहां घूम रहे आवारा जानवर कब उग्र हो जाए किसी को नहीं पता। डंडइया बाजार में गाय, सांड और बछड़े हर किसी के झोले में मुंह मार देते हैं। हजरतगंज की मुख्य सडक़ों पर यह पशु आए दिन डिवाइडर का काम करते हैं। महानगर, इंदिरा नगर, कल्याणपुर आदि क्षेत्रों में पशुपालक गाय व बछड़ों को दूध लेने के बाद छोड़ देते हैं।
केवल फाइलों में ही पकड़े जा रहे छुट्टा पशु
नगर निगम का कैटिल कैचिंग विभाग हर महीने पशुओं को पकडने के लिए अभियान चलाने की बात कहता है। वहीं लाखों रुपए डीजल फूंकने के बाद भी सडक़ों से आवारा पशुओं की संख्या कम नहीं हो रही है। आवारा जानवरों को कैटिल कैचिंग विभाग फाइलों में पकड़ रहा है। हाल यह है कि बाजारों, सडक़ों और गली-मुहल्लों में इनकी संख्या में कहीं से भी कमी नहीं आई है। विभाग के मुताबिक अभियान चलाकर जानवरों को पकडक़र गौशाला और कान्हा उपवन में छोड़ दिया जाता है। ऐसे में सवाल फिर वही है कि शहर में यह पशु कहां से आ रहे हैं। आवारा पशुओं में गाय, सांड, बछिया, भैस, बछड़े, पडऩी, पड़वा, खच्चर, घोड़ा आदि शामिल हैं। पशु चिकित्साधिकारी डा. एके राव के मुताबिक हर महीने अभियान चलाकर चालान की कार्रवाई की जाती है किन्तु हां संसाधनों की कमी के चलते पूर्ण रूप से कार्रवाई नहीं हो पाती है।

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