शहर में धड़ल्ले से बिक रहा मिलावटी सामान, रोक लगाने में प्रशासन नाकाम

सरसों का तेल, पनीर और मिठाई तक में की जा रही मिलावटड्ढ

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिले में मिलावट खोरों के हौसले बुलंद हैं। खाद्य पदार्थों में मिलावट करके अपनी जेबें भरने वाले बेलगाम हो रहे हैं। जिले में नामचीन दुकानों और प्रतिष्ठानों में बिकने वाले खाने-पीने के सामान में भी धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है। इस पर रोक लगाने में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारी भी नाकाम साबित हो रहे हैं। इसकी वजह विभागीय अधिकारियों की त्यौहारों पर की जाने वाली छापेमारी और प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट बिलंब से आना बताया जा रहा है। ऐसे में आम जनता के सामने शुद्घ खाद्य पदार्थों की खरीद और मिलावटखोरों से बचने की चिन्ता गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। जिसका कोई ठोस हल निकलता नहीं दिख रहा है। जबकि आम जनता खाद्य पदार्थों में की जाने वाली मिलावट को जानने और समझने के बाद खाने पर मजबूर है।

पनीर में मिलावट का भंडाफोड़
राजधानी में सहालग के सीजन में पनीर की बिक्री बढ़ गई थी। इस कारण खुलेआम दुकानों और मंडियों में मिलावटी पनीर बेचा जा रहा था। दुकानदार अधिक से अधिक कमाई की लालच में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। एडीएम कोर्ट ने हाल ही में पनीर में मिलावट करने वाले एक दुकानदार के खिलाफ 35 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था, जिसको महीने भर के अंदर जमा करने का फरमान सुनाया गया था। दरअसल एफएसडीए की टीम ने 18 अक्टूबर 2014 को चौक स्थित नुक्कड़ बान वाली गली में मनोज पनीर वाले के यहां छापेमारी कर पनीर का नमूना भरा था, जिसे जांच के लिए वाराणसी की लैब में भेजा गया था। लैब से आई जांच रिपोर्ट के अनुसार पनीर में फैट की कमी पाई गई थी। इसके अलावा पनीर अधोमानक की श्रेणी का पाया गया था। जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि 50 फीसदी फैट वाले दूध की जगह उक्त पनीर में मात्र 30 फीसदी फैट व अन्य खाद्य सामग्री का प्रयोग किया गया था। इस मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद एडीएम कोर्ट ने धारा 27 के तहत मनोज गुप्ता को पनीर में मिलावट करने का दोषी पाया। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 की धारा 26 (2) के उल्लंघन व इसी अधिनियम की धारा 51 के तहत मनोज गुप्ता पर 35 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसी तरह शहर के अलग-अलग हिस्सों में रोजाना मिलावटी पनीर की बिक्री हो रही है लेकिन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने और मिलावट खोरों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले विभागों के अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। वह त्यौहार आने और छापेमारी करने का इंतजार करते रहते हैं। जबकि इस समय डेयरियों पर खुलेआम खट्टे पानी में दूध का पाउडर व रिफाइंड मिलाकर पनीर के नाम पर जहर बेचा जा रहा है। ऐसे पनीर व दूध को राजधानी की सैकड़ों दुकानों, रेस्टोरेंट और होटलों में धड़ल्ले से सप्लाई किया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के रसायनों से बनाए दूध को राजधानी की दुकानों पर भी बेचा जा रहा है। जो जनता की सेहत का दुश्मन साबित हो रहा है।

धड़ल्ले से बिक रहा मिलावटी सरसों का तेल
जिले में सरसो के तेल में मिलावट करके बेचने वालों का भी बड़ा रैकेट सक्रिय है। इस कारण रोजाना अपने घरों में सरसों का तेल इस्तेमाल करने वाले लोग तमाम तरह की बीमारियों को दावत दे रहे हैं। इसी वजह से सरसो के तेल में मिलावट करने वाले एक दुकानदार के खिलाफ 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। एडीएम कोर्ट में प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2013 में बंसल कंपाउंड सीतापुर रोड अलीगंज स्थित जगन्नाथ प्रसाद अग्रवाल के खाद्य तेल के कारखाने से खुला सरसों के तेल का नमूना भरा गया था। छापेमारी के दौरान एफएसडीए की टीम ने कारखाने में मानकों के खिलाफ खुले तेल की पैकिंग कर बेचने का मामला पकड़ा था। छह महीने पुराने सरसो के तेल के पैकेटों व कंटेनरों में भी दोबारा नई पैकिंग करने और उसे बाजार में बेचने की बात सामने आई थी। इसमें पैकेजिंग के मानकों का पालन नहीं करने के मामले में कारखाने के मालिक के खिलाफ पैकेजिंग एक्ट के तहत 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
दरअसल लखनऊ में चटनी, रिफाइंड, पनीर, मिठाई, पानी-बताशा, खुली हल्दी, खुला घी, चाऊमीन, दलिया, दूध, सरसो के तेल समेत अनेकों खाद्य पदार्थों में मिलावट की बात सामने आ चुकी है। रोहित चाट कार्नर से लेकर हजरतगंज स्थित सेफ किचन चाइनीज रेस्टोरेंट तक में मिलावटी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सामान बिकने की पुष्टि हो चुकी है। इन सबके बावजूद राजधानी में मिलावटखोरों पर रोक नहीं लग पा रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो पनीर और सरसो के तेल में मिलावट और ऐसे दुकानदारों के खिलाफ जुर्माना लगाये जाने के मामले नये नहीं है। जिले में 2013-14 में 100 से अधिक नमूनों में मिलावट होने और खाद्य पदार्थों के अधोमानकी होने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है। इन रिपोर्ट्स के आधार पर मिलावटखोरी और नियमानुसार पैकेजिंग नहीं करने वाले दुकानदारों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में मुकदमे भी चल रहे हैं लेकिन कोर्ट में लंबित मामलों और जुर्माने की रकम अदा करने के बाद दोबारा खाद्य पदार्थ बेचने की अनुमति के कारण मिलावटखोरों पर रोक नहीं लग पा रही है।

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