शहर को स्मार्ट बनाने की राह में मेट्रो बन रही रोड़ा

  • स्मार्ट सिटी से जुड़े कार्य सिर्फ कागजों में ही पकड़ रहे रफ्तार
  • इस साल के अंत तक स्मार्ट सिटी का कार्य नहीं चढ़ सकेगा परवान

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
6लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने की राह में मेट्रो का निर्माण कार्य बाधक बन रहा है। मेट्रो का रूट बनाने और रूट डायवर्जन की वजह से स्मार्ट सिटी का काम प्रभावित हो रहा है। जिले में संबंधित विभागों के अधिकारी बैठकें कर जल्द से जल्द इसे अमली जामा पहनाने की कोशिश में जुटे हैं लेकिन इधर कुछ महीनों से मेट्रो का दूसरे और तीसरे फेज का कार्य शुरू होने की वजह से स्मार्ट सिटी का कार्य बाधित हो रहा है। चूंकि मेट्रो मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है, इसलिए अधिकारी भी चाहकर कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में लखनऊ को स्मार्ट सिटी में तब्दील करने की कवायद और काम सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गया है। जबकि इस साल के अंत तक स्मार्ट सिटी का कार्य जनता के लिए देख पाना संभव नहीं लग रहा है।
स्मार्ट सिटी के अंतर्गत कैसरबाग को एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के रूप में चुना गया है। इसी क्षेत्र से मेट्रो भी गुजरेगी, जिसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। मेट्रो निर्माण के चलते कुछ दिन पहले ही रूट डायवर्जन किया गया। इसलिए कैसरबाग क्षेत्र में स्मार्ट सिटी का काम जमीनी स्तर पर शुरू करने में तमाम दिक्कतें आ रही हैं। वहीं इस बात की चर्चा भी होने लगी है कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के सामने प्रधानमंत्री के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को तरजीह नहीं दी जा रही है।

टोपोग्राफिकल सर्वे में भी आ रही समस्या

टोपोग्राफिकल सर्वे का काम लगभग एक महीने से कैसरबाग क्षेत्र में चल रहा है लेकिन मेट्रो डाइवर्जन के चलते यह काम भी प्रभावित हो रहा है। रूट डाइवर्जन की वजह से इस क्षेत्र में भारी ट्रैफिक रहता है, जिसके चलते यह सर्वे सुबह पांच बजे किया जा रहा है। सर्वे टीम को कैसरबाग में अतिक्रमण, फुटपाथों, पार्कों और सडक़ों की स्थिति तथा जन सुविधाओं का हाल आदि अनेकों चीजों का जायजा लेना था, लेकिन भारी ट्रैफिक सर्वे में जाम रुकावट डाल रहा है।
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कन्सल्टेंट तैयार करेगा डीपीआर
डिटेल प्रोजेक्ट्स रिपोर्ट तैयार करने और स्मार्ट सिटी के कार्यों में मदद करने के लिए प्रोफेशनल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कन्सल्टेंट की नियुक्ति की जाएगी। स्मार्ट सिटी प्रभारी और नगर निगम के अपर नगर आयुक्त पीके श्रीवास्तव ने बताया कि निदेशक मण्डल की बैठक के बाद अब प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कन्सल्टेंट की खोज और उसकी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कन्सल्टेंट ही डीपीआर को तैयार करेगा।

स्मार्ट सिटी के काम में रुचि नहीं ले रहे अधिकारी

स्मार्ट सिटी के सामने सबसे बड़ी समस्या अधिकारियों का काम में रुचि न लेना है। स्मार्ट सिटी से जुड़े एक-दो विभागों को छोडक़र कोई भी विभाग दिलचस्पी नहीं ले रहा है, जिसकी वजह से स्मार्ट सिटी के कार्यों को गति नहीं मिल पा रही है। कैसरबाग क्षेत्र में भयंकर जाम और पार्किंग की समस्या सबसे विकट है। इससे निपटने के लिए ग्लोब पार्क में मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण कराया जाना है। इसके लिये भी काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। नगर निगम अधिकारियों की मानें तो ग्लोब पार्क को हैण्डओवर करने में एलडीए की तरफ से जितना सहयोग मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है। इसी के चलते अन्य कार्यों को पूरा करने में भी समय लग रहा है।

“शहर में मेट्रो रूट बनाने का कार्य गति पकड़ेगा। इसके लिए लगातार बैठकें की जा रही है। इसी तरह स्मार्ट सिटी को लेकर भी आवश्यक कार्यवाही शुरू कर दी गई है। चूंकि यह बड़ा प्रोजेक्ट है और बड़े प्रोजेक्ट को गति पकडऩे में थोड़ा समय तो लगता ही है। इसलिए लोगों के मन में तमाम तरह की आशंकाएं उत्पन्न हो रही हैं। हालांकि सब कुछ सुचारू रूप से हो रहा है।” 
-उदयराज सिंह
नगर आयुक्त, नगर निगम

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