शहर के खिलौने वालों से सीखें रोते बच्चों को हंसाकर खुश रहने का हुनर

  • जीवन की तमाम परेशानियों को झेलने के बाद भी पेशे से करते हैं बेपनाह मोहब्बत

कोमल निगम
Captureलखनऊ। शहर के नामचीन चौराहों, मोहल्लों के गली-नुक्कड़ पर इकट्ठा होने वाले बच्चों को खुशियां बांटना आसान नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग बच्चों के चेहरे पर खुशी देखने और उनका शौक पूरा करने को बेताब रहते हैं, जबकि बच्चों को खुशियां देने की आदत के चलते उनका और उनके बच्चों का भविष्य दांव पर लगा होता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं, शहर में घूम-घूम कर बच्चों को खिलौने, गुब्बारे और टेड्डी वियर बेचने वाले ट्वाय मैन की। जो खुद सिस्टम की बेरुखी का शिकार है लेकिन हजारों बच्चों के चेहरे पर उसको देखकर ही मुस्कान आ जाती है।
गुब्बारे वाला बुलाना अधिक पसंद करते हैं
हरदोई निवासी गुड्डू का कहना है कि वो दो साल से गुब्बारे बेचने का काम कर रहे हैं। वह बिल्कुल भी पढ़े-लिखे नहीं हैं। इसके बावजूद अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए गुब्बारे बेचते हैं। इस पेशे में उनको कमाई भी अधिक नहीं होती है लेकिन गुब्बारे लेकर जब बच्चे खुश होते हैं, तो अपनी सारी समस्याएं भूल जाते हैं। जबकि गुब्बारे बेचकर अपने परिवार का खर्च चलाना और दो बेटियों की पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल है। इसके बावजूद उनकी पूरी कोशिश होती है, अपनी बेटियों को अच्छी सुख सुविधाएं दिला सकें। इसी वजह से दिन में मजदूरी और रात में गुब्बारे बेचने का काम करते हैं। जबकि घर में उनकी बीवी की तबीयत भी सही नहीं रहती है। इन सबके बावजूद जब बच्चे उन्हें गुड्डू की बजाय गुब्बारे वाला कहकर बुलाते हैं, तो आंखों में चमक सी आ जाती है। जब छोटे-छोटे बच्चे उनके पास आकर रंग-बिरंगे गुब्बारों की मांग करते हैं, तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है। उनके चेहरे की खुशी देखकर वो अपनी सारी परेशानियों को भूल जाते हैं। जबकि रोजाना फुटपाथ पर दुकान लगाने के बदले उनके वसूली की जाती है। ऐसा करने वालों को इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं रहती कि उन्होंने दिन भर में कोई कमाई की या नहीं।

बच्चों की खुशी में ढंूढ लेती हैं अपनी खुशी

अलीगंज निवासी नीतू डालीगंज पुल के किनारे फुटपाथ पर प्लास्टिक के खिलौनों की दुकान लगाती हैं। वह चार साल से रोड के किनारे खिलौने बेचने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वैसे तो वो कोई और भी काम कर सकती थी लेकिन इसी काम को चुना। क्योंकि छोटे बच्चों को खिलौने बहुत पसंद होते हैं और जब छोटे-छोटे बच्चे उनसे तरह तरह के खिलौनों की मांग करते हैं, तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है। इसके साथ ही वह अपने स्तर से दुनिया भर के बच्चों को अधिक से अधिक खुशी देने की चाहत रखती हैं। नीतू ने बताया कि घर में पैसों की परेशानी होने के कारण वो बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं कर पाई और साथ ही किसी ने उन्हेें पढ़ाना भी जरुरी नहीं समझा। परिवार में उनके तीन बच्चे हैं शनि, सानिया और कपिल। ये तीनों बच्चे पहले पढ़ते थे लेकिन रहने का कोई स्थायी ठिकाना न होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई छूट गई। वह बच्चों को बहुत जल्द स्कूल भेजने की कोशिश में जुटी हैं।

बच्चों की मुस्कान दे जाती है खुशी

फ न मॉल के पास टेड्डी बियर की दुकान लगाने वाले विशाल ने बताया कि वह पांच साल से खिलौने बेचने का काम करते हैं। यही उनकी रोजी-रोटी का साधन है। यह पेशा भले ही बहुत किफायती न हो लेकिन खिलौने खरीदने वाले बच्चों के चेहरे पर खुशी देखकर अपनी सारी समस्याएं भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि वैसे तो हम कोई भी काम पैसे कमाने के लिए कर सकते हैं पर कुछ काम ऐसे होते हैं जिन्हें करके हमे दिल से खुशी मिलती है। बच्चों की मुस्कान उन्हें जो खुशी देती है, वो उन्हें कहीं और नहीं मिलती है।

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