शहर की सफाई व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च फिर भी स्थिति जस की तस, नहीं हुआ सुधार

  • कमीशनखोरी लगा रही शहरवासियों को बट्टा 
  • अभी आसान नहीं होगी स्मार्ट सिटी की डगर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। एक तरफ शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए शासन और प्रशासन स्तर पर तेजी से कवायद चल रही है, तो वहीं दूसरी तरफ शहर आज भी सफाई-व्यवस्था से जूझ रहा है। नगर निगम हर महीने इसके लिए 450 करोड़ रुपये खर्च करता है फिर भी सफाई व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में स्मार्ट सिटी की राह में रोड़ा आना स्वाभाविक है। मगर नगर निगम अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं जा रहा है। इसके इतर शहर की सफाई व डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाली संस्था ज्योति इन्वायरोटेक को बार-बार चेतावनी के बाद भी वह सुधरने के नाम नहीं ले रही है। सूत्रों की माने तो निगम अधिकारियों की मिलीभगत से ज्योति को संरक्षण मिल रहा है और सारा खेल कमीशन खोरी का है।
450 करोड़ खर्च फिर भी नहीं दिख रहा सुधार
शहर की नीट और क्लीन व्यवस्था के लिए नगर निगम हर महीने लगभग 450 करोड़ रुपये खर्च करता है, किन्तु यहां की सडक़ें व मोहल्ले की गलियां कुछ और ही दास्तां बयां करती हैं। इतने रुपये खर्च करने के बाद भी सफाई व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं लेरही है।
स्मार्ट सिटी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा
शहर में तेजी से स्मार्ट सिटी के लिए हर विभाग प्लान तैयार कर रहा है। सभी अपने-अपने सुझाव दे रहे हैं और स्मार्ट सिटी को गति देने के लिए अगस्त से पहला कदम भी नगर निगम रखने जा रहा है। उधर शहर की सफाई व्यवस्था स्मार्ट सिटी के रास्ते में रोड़ा खड़े करने के लिए तैयार है। एक बार इसी सफाई व्यवस्था की वजह से शहर को स्मार्ट सिटी की रेस से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद भी सफाई-व्यवस्था बद्ïतर है।
अधिकारी ही शहर की तरक्की में लगा रहे बट्टा 
शहर भर से कूड़ा उठाने वाली कार्यदायी संस्था ज्योती इन्वायरोटेक हर गली मोहल्लों से कूड़ा उठाने का दम भरती है और चॉक चौबंद व्यवस्था की बात करती है लेकिन असली कहानी तो बिल्कुल इसके परे है। पुराने लखनऊ की गलियों का मुआइना करने पर सारी असलियत सामने आ जाएगी। वहीं सही ढंग से काम करने पर कई बार संस्था को चेतावनी दी जा चुकी है लेकिन संस्था पर इसका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है। संस्था को शहर में चार साल हो गया काम लिये हुए, फिर भी आज हर गली मोहल्ले में पहले जैसी गंदगी और कूड़ा पाया जा रहा है। सवाल उठना लाजमी हैै।
कहीं खर्च हो रहे हजारों तो कहीं लाखों
हर वार्ड में सीमित संख्या में सफाई कर्मी कार्य कर रहे हैं किन्तु डालीगंज स्थित मनकामेश्वर वार्ड में इस समय 75 सफाई कर्मी कार्यरत हैं। यहां के पार्षद रणजीत सिंह, रंजीत को वार्ड की सफाई के लिए इतने कर्मियों की आवश्यकता क्यों पड़ी है। यह किसी को नहीं पता, पर सवाल उठता है कि शहर में जितने भी वार्ड हैं उनमें सीमित संख्या में सफाई कर्मी तैनात हैं। तो फिर अकेले मनकामेश्वर वार्ड में इतनी मेहरबानी क्यों की गई। यहां 75 सफाई कर्मी 7500 की वेतन में कार्यरत है, जिन पर महीने में लगभग 5 लाख रुपये खर्च होता है। यानी सिर्फ अकेले मनकामेश्वर वार्ड के लिए ही 5 लाख रुपये खर्च किये जा रहे हैं। जबकि यहां कम कर्मियों से भी काम चलाया जा सकता है।
माननीयों की मेहरबानी पर चल रहा सारा खेल
सूत्रों की मानें तो महापौर डॉ. दिनेश शर्मा के आदेश के बाद ही डालीगंज स्थित मनकामेश्वर वार्ड में अधिक संख्या में सफार्ई कर्मचारी तैनात हैं जबकि इतनी अधिक संख्या में यहां सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं है। इससे साफ जाहिर होता है कि एक तरफ आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम को अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए इधर-उधर से जुगाड़ करनी पड़ रही है। वहीं एक ही वार्ड में अधिक संख्या में सफाई कर्मचारियों की संख्या जाहिर कर रही है कि किस तरह से यहां मनमानी चल रही है और बेतरतीब खर्च किया जा रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

मनकामेश्वर वार्ड में इतने सफाई कर्मी कार्यरत हैं इसकी जानकारी नहीं है। वैसे किस वार्ड में कितने सफाई कर्मी होने चाहिए यह पार्षद तय नहीं करेगा।
पीके सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

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