वीडियो, सेना और सरकार

सवाल यह है कि यदि जवान के आरोप में सत्य का जरा भी अंश है तो यह बेहद गंभीर मामला है? क्या यह सेना में जड़ जमा रहे भ्रष्टïाचार के सबूत हैं? क्या सेना में सब कुछ ठीक नहीं है? सवाल यह भी कि क्या अधिकारियों से नाराज जवान ने ये आरोप सुर्खियां बटोरने के लिए तो नहीं लगाए हैं? फिलहाल जब तक जांच नहीं हो जाती इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

sajnaysharmaजम्मू-कश्मीर में तैनात बीएसएफ के एक जवान ने अपने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जवान ने अपने अधिकारियों पर न केवल गंभीर आरोप लगाए हैं बल्कि इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड भी कर दिया है। इस वीडियो को 65 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। अपने चार वीडियो में तेज बहादुर यादव ने शिकायत की है कि अधिकारी जवानों पर अत्याचार करते हैं और उन्हें भूखे पेट सोना पड़ता है। वीडियो में कहा गया है कि सरकार चाहे जो भी आए हमारी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। सरकार जो भी सामान जवानों के लिए भेजती है वह अधिकारी बेचकर खा जाते हैं। उसने जांच की मांग की है। सवाल यह है कि यदि जवान के आरोप में सत्य का जरा भी अंश है तो यह बेहद गंभीर मामला है? क्या यह सेना में जड़ जमा रहे भ्रष्टïाचार के सबूत हैं? क्या सेना में सब कुछ ठीक नहीं है? सवाल यह भी कि क्या अधिकारियों से नाराज जवान ने ये आरोप सुर्खियां बटोरने के लिए तो नहीं लगाए हैं? फिलहाल जब तक जांच नहीं हो जाती इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन सेना में जिस तरह भ्रष्टïाचार के कई मामले सामने आए हैं उससे जवान की शिकायत को सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता है। अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में एक सेना अधिकारी के लिप्त होने के आरोप संदेह उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा कई बार चंद रुपयों के लालच में सेना की गोपनीय जानकारी दुश्मन देशों को बेचने का मामला भी प्रकाश में आ चुका है। जाहिर है भ्रष्टïाचार की जड़ें सेना तक पहुंच चुकी हैं। हालांकि इस वीडियो पर सेना ने सफाई दी है। उसका कहना है कि इस जवान का अनुशासन तोडऩे के आरोप में 2010 में कोर्ट मार्शल किया गया था। हालांकि उसे बर्खास्त नहीं किया गया था। बीएसएफ आईजी डीके उपाध्याय कहना है कि यह हैरान करने वाला मामला है। डीआईजी जब मौके पर गए थे तो उन्होंने जवानों से बातचीत की थी, लेकिन तब किसी ने कोई शिकायत नहीं की थी। हो सकता है आरोप लगाने वाले जवान के इरादे कुछ और हों। फिलहाल गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जांच के निर्देश दे दिए हैं और जांच के दौरान जवान पर कोई दबाव न डाला जा सके उसे दूसरे हेडक्र्वाटर में शिफ्ट कर दिया गया है। फिलहाल, जांच के बाद ही पता चलेगा कि सही क्या है। लेकिन जवान की शिकायत से सरकार को सतर्क हो जाने की जरूरत है। उसे इस बात का ध्यान रखना होगा कि देश की सुरक्षा में लगे जवानों को ऐसी शिकायत का मौका न मिले। यदि जवानों को पौष्टिïक भोजन नहीं मिलेगा तो वे दुश्मनों से लोहा कैसे ले पाएंगे। इसका खामियाजा न केवल सरकार बल्कि देश को भी उठाना पड़ सकता है।

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