विधानसभा अध्यक्ष के आदेश के बाद भी कृषि विभाग में नहीं हटाया गया बाबू

  • विभागीय बाबू मनोज कुमार शर्मा अवैध वसूली कर ऊपर तक पहुंचाता है हिस्सा
  • शासन-प्रशासन के आदेशों को दिखा रहा ठेंगा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। कृषि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें इस कदर समाहित हो गई हैं कि पूरा अमला इसकी चपेट में नजर आ रहा है। फिर चाहे वह कोई बाबू हो या फिर कोई अधिकारी। भ्रष्टाचार ने पूरी तरह से इस विभाग की जड़ों को खोखला कर दिया है। इसका जीता जागता उदाहरण विभागीय बाबू मनोज कुमार शर्मा है, जिसको किसी भी अधिकारी का खौफ नहीं है। वह बेखौफ अवैध वसूली करता है। उसके बाद उच्च अधिकारियों को भी उनका हिस्सा पहुंंचाता है। ये काली कमाई उच्चाधिकारियों की छत्रछाया में की जा रही है। आलम ये है कि उस बाबू ने शासन-प्रशासन के आदेशों को भी ठेंगा दिखा दिया है। विभाग में आने वाले लोगों से अवैध वसूली करने के बाद भी अपने पद पर बना हुआ है। इतना ही नहीं एक मामूली बाबू की पहुंच के आगे विधानसभा अध्यक्ष, विधायक, सरकार और कृषि निदेशक बौने साबित हो रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि बाबू के ऊपर लगे भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के कारण हुए ट्रांसफर आदेश पर आज तक अमल नहीं हो पाया है, जिसकी कृषि विभाग में जोरदार चर्चा होती रहती है।
रसूख के चलते नहीं हो पा रही कार्रवाई
कृषि विभाग के सूत्रों का कहना है कि संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ मण्डल आनंद त्रिपाठी पर अनियमितताओं के काफी आरोप लग चुके हैं लेकिन सत्ता में पहुंच होने की वजह से उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। आनंद त्रिपाठी आला अफसरों के निर्देश को अनुपालन करना अपनी शान के खिलाफ मानते हैं। यही वजह है कि एक बाबू को कार्यमुक्त न करने को अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है।
लोगों को धौंस दिखाकर करता है अवैध वसूली
कृषि विभाग में तैनात यह बाबू फील्ड में लोगों से अवैध वसूली करता है। उसका एक निर्धारित हिस्सा अपने आला अफसरों को पहुंचाता है। इसी वजह से आला अफसर बाबू पर मेहरबान रहते हैं। इसी वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई करने से कतराते हैं। वहीं अधिकारियों का संरक्षण मिलने की वजह से यह बाबू भी बेखौफ होकर अवैध वसूली करता है, उसे किसी भी कार्रवाई का डर नहीं है। संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ मण्डल आनंद त्रिपाठी ने कहा कि अभी तक वरिष्ठ सहायक मनोज कुमार शर्मा को कार्यमुक्त नहीं किया गया है। वे इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाए कि आखिर विधानसभा अध्यक्ष, विधायक, प्रमुख सचिव कृषि और कृषि निदेशक के आदेशों का अनुपालन क्यों नहीं किया गया।

क्या कहते हैं अधिकारी

यह मामला मेरे संज्ञान में है। अगर निर्देशों का अनुपालन नहीं होता है, तो संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ मण्डल आनंद त्रिपाठी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञान सिंह, कृषि निदेशक, कृषि विभाग

क्या है मामला

बताते चलें कृषि निदेशक ज्ञान सिंह ने 21 सितम्बर 2016 को संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ मण्डल आनंद त्रिपाठी को पत्र लिखकर निर्देश दिए कि वरिष्ठ सहायक मनोज कुमार शर्मा को तत्काल कार्य मुक्त करें। उसके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के आधार पर 17 जुलाई 2016 को लखीमपुर खीरी में ट्रांसफर कर दिया गया था। यह प्रकरण विधायक राधेश्याम जायसवाल ने विधान सभा में नियम 51 के तहत भी उठाया था, जिसमें कहा गया था कि संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ मण्डल आनंद त्रिपाठी द्वारा वरिष्ठ सहायक मनोज कुमार शर्मा को जानबूझ कर कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है। आनंद त्रिपाठी द्वारा की जा रही अनुशासनहीनता पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रमुख सचिव कृषि रजनीश गुप्ता ने भी 24 जुलाई 2016 को कृषि निदेशक को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। उस दौरान पूर्व कृषि निदेशक मुकेश श्रीवास्तव अमेरिका की यात्रा पर थे, जिस पर अपर कृषि निदेशक प्रशासन रघुवीर ने भी संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ मण्डल आनंद त्रिपाठी को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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