विकास भवन के ही विकास में रोड़ा अधूरा पड़ा लिफ्ट निर्माण का कार्य

शासन को 25 पत्र लिखने के बाद भी नहीं जारी हुआ लिफ्ट के लिये पैसा

तीन साल से मंत्रियों की तरफ से भी मिल रहा कोरा आश्वासन
पेंशन के लिये समाज कल्याण विभाग आने वाली बुजुर्ग महिलाओं को चतुर्थ तल तक जाने को मजबूरन चढऩी पड़ती हैं सीढिय़ां

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिले में विकास का आईना कहे जाने वाले विकास भवन में निर्माणाधीन लिफ्ट के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है। जिला विकास अधिकारी ने तीन साल में करीब 25 बार शासन को पत्र लिखकर सात लाख रुपये अपेक्षित बजट उपलब्ध करवाने की मांग की लेकिन शासन से स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इस कारण समाज कल्याण विभाग में अपनी समस्याएं लेकर आने वाली बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन की चाहत में मजबूरन सीढिय़ां चढऩी पड़ती हैं।
विकास भवन में कुल 28 कमरे हैं। इसमें मुख्य विकास अधिकारी, मनरेगा उपायुक्त, समाज कल्याण अधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, कौशल विकास मिशन और हाइड्रोलिक विभाग समेत कई कार्यालय हैं। इसमें समाज कल्याण विभाग और कृषि विभाग में सबसे अधिक शिकायतकर्ता और आवेदक पहुंचते हैं। विकास भवन में समाज कल्याण विभाग का कार्यालय चतुर्थ तल पर है। यहां तक पहुंचने के लिए हर व्यक्ति को कम से कम 54 सीढिय़ां चढऩी पड़ती हैं। एक बुजुर्ग इतनी अधिक सीढिय़ां चढऩे में हांफने लगता है, कई-कई बार तो आधे रास्ते में बैठकर आराम करता है। इसके बाद दोबारा सीढिय़ों की गिनती करते हुए ऊपर चढ़ता चला जाता है। इसलिए चतुर्थ तल पर पहुंचने और सुरक्षित वापस आने वाले को एवरेस्ट फतह करने का एहसास कराता है। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों से कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट और खाद-बीज से संबंधित योजनाओं की जानकारी लेने वाले किसानों को भी विकास भवन की सीढिय़ां चढऩी पड़ती हैं। आलम ये है कि लोग विकास भवन स्थित समाज कल्याण और कृषि विभाग के कार्यालय आने से बचने लगे हैं। ऐसे में आम जनता की शिकायतों को सर्वसुलभ और गुणवत्तापरक समाधान मुश्किल लग रहा है।

लिफ्ट का मानक
किसी भी इमारत में लिफ्ट की सुविधा देने से पूर्व मानकों का पालन होना अनिवार्य है। इसमें इमारत कम से कम चार मंजिला होनी चाहिए। इसके साथ ही वहां आने वाले लोगों और काम करने वाले लोगों की संख्या सैकड़ों में हो, तब लिफ्ट लगाने की अनुमति मिलती है। गौरतलब हो कि विकास भवन की इमारत चार मंजिला है। इसमें कम से कम 500 कर्मचारी काम करते हैं। इसके साथ ही रोजाना दो से ढाई हजार फरियादी पहुंचते हैं। इसी वजह से विकास भवन में लिफ्ट बनाने के लिए 14 लाख रुपये का बजट पास हुआ था। जिसमें प्रथम किश्त के अंतर्गत सात लाख रुपये मिले, इसमें भूमिगत तल से लेकर चौथी मंजिल तक लिफ्ट की दीवार और हर मंजिल पर लिफ्ट खुलने का गेट बना दिया गया। निर्माणाधीन लिफ्ट में दरवाजा लगाने और इलेक्ट्रिक संयंत्र लगाने का प्रमुख काम अभी तक नहीं हुआ है। इसी के लिए सरकार से बजट मांगा जा रहा है लेकिन लिफ्ट के नाम से पारित बजट की दूसरी किश्त नहीं मिल पा रही है। इसमें शासन की तरफ से तमाम तरह के पेंच बताये जा रहे हैं लेकिन बजट कब तक मिलेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।

2010 में शुरू हुआ था लिफ्ट का निर्माण
विकास भवन में लिफ्ट का निर्माण कार्य वर्ष 2010 में शुरू किया गया था। इस इमारत में काम करने वाले लोगों और काम के सिलसिले में विकास भवन आने वाले लोगों को उम्मीद थी कि साल डेढ़ साल में लिफ्ट बनकर तैयार हो जायेगी लेकिन पांच साल बाद भी लिफ्ट बनाने का काम पूरा नहीं हो पाया। विकास भवन के अधिकारी लिफ्ट के लिए बजट मिलने की आस लगाये बैठे हैं।

विकास भवन की निर्माणाधीन लिफ्ट का काम बजट के अभाव में अटका हुआ है। इस संबंध में शासन को 25 से अधिक पत्र लिखे जा चुके हैं। इसके बावजूद लिफ्ट निर्माण का काम पूरा करने के लिए अपेक्षित सात लाख का बजट नहीं मिल पाया। इस संबंध में शासन से स्पष्ट जवाब भी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण जल्द ही एक और पत्र लिखकर मामले का संज्ञान दिलाने का प्रयास किया जायेगा।
-प्रदीप कुमार सिंह
जिला विकास अधिकारी

Pin It