विकास खण्ड की ईकाई के टुकड़े नहीं होने देंगे: प्रतिभा सिंह

  • पंचायतीराज विभाग की अलगाववादी मांग के खिलाफ ग्राम विकास महापरिषद एकजुट

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। ग्राम्य विकास विभाग से पंचायती राज को अलग करने की मांग के खिलाफ उत्तर प्रदेश ग्राम विकास महापरिषद एकजुट हो गया है। इस संगठन की नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने समस्त पदाधिकारियों और सदस्यों की सर्वसम्मति से अलगाववाद की मांग करने वाले पंचायती राज कर्मियों के प्रस्तावित धरने के जवाब में दो घंटे अतिरिक्त काम करने का निर्णय लिया है। इसका मकसद धरने की वजह से विकास संबंधी कार्यों को प्रभावित न होने देना है। इसके साथ ही उन्होंने किसी भी हाल में विकास खण्ड की ईकाई के टुकड़े नहीं होने देने का विश्वास दिलाया है।
पंचायतीराज विभाग कर्मियों द्वारा सभी जिला मुख्यालयों पर 10 जून को धरना दिया जाना है। इसके विरोध में ग्राम्य विकास विभाग में दो घंटे अतिरिक्त कार्य किया जाएगा। इसका निर्णय ग्राम्य विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों के संयुक्त संगठन ग्राम्य विकास महापरिषद की होटल कंफर्ट इन में आयोजित बैठक में लिया गया, जिसमें पंचायतीराज विभाग कर्मियों की तरफ से विरोध जताने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए महापरिषद की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि विभाग के अलगाववाद की मांग से मुख्यमत्री के विकास संबंधी एजेंडे को अवरूद्ध करने की साजिश की जा रही है। पंचायतीराज संस्थाओं को मजबूत करने के बजाय संवैधानिक भावनाओं को विफल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकासखंडों के माध्यम से कृषि व ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की योजनाएं संचालित होती है। योजनाओं का सुचारू रूप से संचालन करने के लिए सरकार के निर्णयों का विरोध तर्कसंगत नहीं है। प्रादेशिक विकास सेवा संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उमेशमणि त्रिपाठी ने कहा कि ग्राम्य विकास एक विभाग न होकर गांवों के संपूर्ण विकास की इकाई है। विकास की गति बाधित करने वाले प्रयास सफल नहीं हो सकेंगे। प्रादेशिक विकास सेवा संगठन के प्रदेश महामंत्री राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पंचायतीराज महासंघ 10 जून को जिला मुख्यालयों और 17 जून को लखनऊ में प्रदर्शन करेगा। इस अवसर पर महामंत्री राजेश कुमार त्रिपाठी, ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के महामंत्री प्रताप सिंह यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशिकांत श्रीवास्तव समेत कई अन्य पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।

नया शासनादेश अलगाव की प्रमुख वजह

प्रतिभा सिंह ने बताया कि केन्द्र सरकार ने हाल ही में एक शासनादेश जारी किया है, जिसमें सरकार की तरफ से जारी होने वाले सभी बजटों के खर्च से संबंधित एक-एक रुपये का हिसाब आनलाइन करना अनिवार्य कर दिया है। इसी आदेश के बाद पंचायतीराज विभाग के लोगों ने अलगाव की मांग शुरू कर दी। ऐसा लग रहा है कि पंचायतीराज विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बजटों की पारदर्शिता को लेकर असहज हैं। इसी वजह से अलग विभाग की मांग कर रहे हैं। जबकि वर्ष 1952 से लगातार विकासखण्डों के अंतर्गत आम जनता की सुविधा के लिए सभी ईकाईयों का कार्यालय एक जगह स्थापित किया गया था। इन पर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में खण्ड विकास अधिकारी नियंत्रण रखता है। उसके पास विकास खण्ड के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों का सीआर लिखने की शक्ति थी लेकिन पंचायती राज के कर्मचारी खुद को खण्ड विकास अधिकारी के नियंत्रण से मुक्त कराना चाहते हैं। वह अलग विभाग की मांग कर रहे हैं, जो जनता के लिए नुकसानदायक होने के साथ ही विभाग की एकता के लिए भी खतरनाक है। इसलिए पंचायती राज के लोगों को प्रोन्नति देकर बीडीओ मनाने समेत कई प्रस्ताव शासन को भेजे गये हैं, उम्मीद है कि उनके पास होने के बाद अलगाववाद की मांग करने वाले लोग संतुष्ट हो जाएंगे। हम पंचायतीराज महासंघ के लोगों को ग्राम विकास विभाग के साथ पूर्ववत मिलकर काम करने की अपील करते हैं।

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