वाह रे पुलिस विभाग, करे कोर्ई, भरे कोई

गलती दारोगा की, सजा मिली सिपाही को, किया गया निलम्बित
चौक के मेडिकल कॉलेज चौकी का मामला

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। खुद की गलतियों को अपने मातहतों पर थोपना और उस पर कार्रवाई भी करा देना, कुछ ऐसा ही है पुलिस विभाग। चौक कोतवाली के मेडिकल कॉलेज चौकी पर तैनात एक सिपाही एक ऐसे ही मामले का शिकार हुआ है, जिसमें गलती चौकी इंचार्ज की थी पर सजा मिली सिपाही को। आलाधिकारियों ने उस सिपाही को निलम्बित कर दिया।
यह है पूरा मामला
15 अक्टूबर, 2015 वैशाली ट्रेन से गिरकर बिहार निवासी प्रकाश कुमार (18) गिरकर गम्भीर रूप से घायल हो गए थे। बाराबंकी पुलिस उन्हें घायल हालत में लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंची, जहां डॉॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने उसकी शिनाख्त करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने परिजनों से सम्पर्क करते हुये प्रकाश की मौत की खबर सुनाई। इस पर प्रकाश के परिजनों ने जल्द ही राजधानी आने की बात कही थी।
16 अक्टूबर, 2015 की शाम को प्रकाश के पिता नवल किशोर और उनके साथ दो लोग चौकी पर पहुंचे। लेकिन पांच लोग न होने की वजह से प्रकाश का पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
यह है नियम
शव के पोस्टमार्टम के लिए पंचनामा पुलिस द्वारा तैयार किया जाता है, जिसके लिए पांच लोगों का होना जरूरी होता है। प्रकाश के पिता नवल किशोर के पहुंचने पर मेडिकल कॉलेज चौकी इंचार्ज राजेश राय ने चौकी पर तैनात निजामुद्दीन को म्युर्चरी भेजा। जहां उसकी शिनाख्त करवाई। नवल किशोर समेत तीन लोग होने की वजह से उस दिन उनके बेटे प्रकाश का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। पुलिस ने पंचनामा होने का नियम बताते हुये पांच लोगों का होना अनिवार्य बताया और इस कारण पोस्टमार्टम नहीं हो सका।

पंचनामा भरवाने के जिम्मेदार सब-इंस्पेक्टर

जानकारों की मानें तो शव के पंचनामा की प्रक्रिया सब-इंस्पेक्टर करता है। सब-इंस्पेक्टर पंचायतनामा भरके सिपाही के हवाले करता है और उसके बाद पोस्टमार्टम का काम शुरू होता है। एक यह भी नियम है कि अगर पांच लोग नहीं मिलते है तो सब-इंस्पेक्टर की इसकी जिम्मेदारी होती है कि वह आस-पास के सम्मानित लोगों से मिलकर शव का पंचनामा भरवाये और फिर पोस्टमार्टम करवाएं। लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। उल्टा चौकी इंचार्ज राजेश राय ने अपनी गलती को छिपाते हुए सिपाही निजामुद्दीन की खामियां निकालते हुए उस पर थोप दिया। शिकायत के बाद जांच रिपोर्ट तैयार करके आलाधिकारियों को सौंप दी। उसके बाद आलाधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर सिपाही निजामुद्दीन को निलम्बन का फरमान जारी कर दिया।

क्यों बचाया जा रहा है चौकी इंचार्ज को

आखिर मेडिकल कॉलेज चौकी इंचार्ज को अधिकारी क्यों बचाने पर अमादा है। उनकी गलती को किसी और पर मढक़र सजा दी जा रही है। बताया जा रहा है कि जब नवल सुबह मेडिकल कॉलेज चौकी पहुंचे तो चौकी इंचार्ज और सिपाही भी मौजूद थे। चौकी इंचार्ज ने भी पांच लोगों को लाने की बात कहकर उसे चलता कर दिया था।

पंचनामा की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर की होती है। इससे सिपाही का कोई लेना-देना नहीं होता है, लेकिन सिपाही ने प्रकाश के पिता नवल से बदसलूकी करते हुए पांच लोगों को लाने की बात कहते हुए भगा दिया। इस मामले की चौकी इंचार्ज को भनक तक नहीं लगी। इस वजह से सिपाही के निलम्बन की कार्रवाई की गई है।
राजेश पाण्डेयएसएसपी लखनऊ

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