वसूली का अड्डा बन गया झलकारी बाई अस्पताल

  • राज्यमंत्री रविदास मेहरोत्रा के निरीक्षण में खुली पोल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । हजरतगंज स्थित झलकारी बाई अस्पताल वसूली का अड्डा बनता जा रहा है। यहां मरीजों से इलाज के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। इसके साथ ही अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार है। इसका खुलासा प्रदेश के परिवार कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रविदास मेहरोत्रा के औचक निरीक्षण में हुआ। इस दौरान मरीजों और तीमारदारों ने अस्पताल में हो रही अवैध वसूली, मरीजों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार, चिकित्सकों से अनुपस्थित रहने तथा पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें की गईं।
राजयमंत्री द्वारा समस्त सरकारी अस्पतालों में पार्किंग शुल्क माफ करने के निर्देशों को अवैध वसूली करने वालों ने ठेंगे पर तो रख ही लिया है। लेकिन एक महिला से प्रसव के बाद 800 रूपये वसूलने की शिकायत आई है। जो अस्पतालों की हकीकत को बयां करता है कि, यहां के डॉ. कितनी जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। राजयमंत्री को अस्पताल में नर्सों की लापरवाही की अनेक शिकायतें मिलीं। नर्सें सीधे मरीजों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध न कराकर उनसे वसूली में लिप्त पाई गईं। मरीज प्रीती वर्मा के पति जगदीप ने बताया कि, प्रसव के उपरान्त एक कर्मचारी ने उनसे 800 रूपये की धनराशि ली है, जिसकी उन्होंने लिखित शिकायत की है।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में अंदर व बाहर अव्यवस्था और गंदगी मिली। वाटर कूलर कई महीनों से खराब था। भर्ती महिलाओं के बेडों पर बिछाने और ओढऩे के चादर तक नहीं थी। राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पाॄकग सुविधा बिल्कुल नि:शुल्क कर दी गई है लेकिन इस अस्पताल के बाहर पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली बराबर जारी है। उन्होंने महानिदेशक को तत्काल इस पर रोक लगाने के साथ दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए।
औचक निरीक्षण के निर्देश
राज्यमंत्री ने अस्पताल में पीलिया रोग से ग्रसित बच्चों का उचित उपचार न किए जाने और उन्हें समुचित औषधियां उपलब्ध न कराने को गम्भीरता से लिया। उन्होंने कहा कि सरकार बेहतर चिकित्सा सुविधा सुलभ कराने के लिए प्रयत्नशील है। लेकिन चिकित्सा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकार की छवि धूमिल करने पर आमादा हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को स्पष्ट तौर से निर्देशित किया कि, वे अस्पताल में बरती जा रही लापरवाही आदि की विस्तृत जांच करके उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। इसमें जो लोग दोषी पाए जाएंगे। उनके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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