वर्दी है तो प्यार को करो बदनाम, नहीं होगी कोई कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। ढाई अक्षर के पवित्र शब्द को खाकी ने बदनाम करके रख दिया है। हालात यह हो गए हैं कि कुर्सी और खाकी की मर्यादाओं को धूमिल करने में पुलिसकर्मी पीछे नहीं हट रहे हैं। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि ऐसे कार्य करने वाले दारोगाओं के ऊपर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। जबकि आम आदमी के साथ यही खाकी ऐसा सुलूक करती है कि जैसे उसने बहुत ही गम्भीर कोई अपराध कर दिया हो। मात्र लाइन हाजिर कर अधिकारी मामले को सुलझा देते हैं। लाइन हाजिर से दारोगा को सिर्फ 90 रुपए प्रतिमाह का नुकसान होता है। जबकि वेतन सहित कई सुविधायें पूर्व की तरह ही मिलती रहती हैं।
चंूकि मामला पुलिस विभाग से जुड़ा होता है इसलिए आम आदमी भी खाकी के ऊपर सवाल उठाने से डरता है। पूर्व में कई ऐसे दारोगाओं की करतूत से खाकी जहां शर्मशार हुई वहीं अधिकारी भी मीडिया के सवालों से भागते-फिरते हुए नजर आए। दरअसल प्यार के नाम पर खाकीधारियों में सिर्फ वासना की धारणा रही है जिसके चलते प्यार परवान नहीं चढ़ा लेकिन बदनामी बेशुमार मिली। जिसकी कीमत खाकी वालों की पूरी जमात ने चुकायी। समय-समय पर महिलाओं के प्रति उदार और सम्मान दिखाने के सैकड़ों आदेश पुलिस विभाग में आते रहे हैं। लेकिन इनका असर किसी पर नहीं दिखता। महिलाओं की सुरक्षा के लिये हरदम तत्पर रहने का दावा करने वाली लखनऊ पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ी है। एक दारोगा जी तो अपनी महबूबा को घर में बंद करके शादी रचाने चले गये थे। जबकि शादीशुदा क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर तो शेक्सपियर के जूलियस सीजर बन गये और प्रेमिका के लिऐ उसके भतीजे की हत्या करा दी थी।
थानाध्यक्ष राजेश यादव
मानकनगर थानाध्यक्ष राजेश कुमार यादव ने लिव इन रिलेशन में रहने वाले एक प्रेमी जोड़े को न सिर्फ तीन दिन तक हवालात में रखा। बल्कि थाने के अंदर अपनी वर्दी को दागदार करते हुये प्रेमिका पर प्रेमी को छोडऩे का दबाव बनाया। प्रेमी को गंभीर धाराओं में फंसाने की धमकी देकर पचास हजार रुपये वसूल लिये। और वाट्स ऐप पर प्रेमिका को अश्लील एसएमएस भी भेजे। युवती ने अपने मोबाइल से जब उसकी रिकार्डिंग कर ली तो माफ करने का ड्रामा करने लगा। जिसको एसएसपी ने सजा के तौर पर सिर्फ लाइन हाजिर करके मामले को संभालने का प्रयास किया।
थानाध्यक्ष अलीगंज, तौफीक अहमद
अलीगंज थानाध्यक्ष रहते हुए तौफीक अहमद ने रात के करीब नौ बजे महिला कांस्टेबल को बुलाकर पहले अपने प्यार का इजहार किया। फिर उसके हाथ पर पेन से आईलवयू लिख दिया था। इस घटना से आहत कांस्टेबल ने सीओ और वीमेन पॉवर लाइन में इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद उसने अपना हाथ जला दिया था। कार्रवाई के नाम पर कुछ दिनों के लिए निलम्बित कर दिया गया था। हालांकि तौफीक को बचाने में कई अधिकारियों ने भी सहयोग किया। लेकिन मीडिया की खबरों के कारण अधिकारियों को कार्रवाई करनी पड़ी।
आरआई, कुलभूषण ओझा
रिजर्व पुलिस लाइन के पद पर तैनाती के दौरान कुलभूषण ओझा ने महिला सिपाही को अपने केबिन में बुलाकर हाथ पकडक़र अकेले में आकर साइन कराने का आदेश दिया। पीडि़ता ने मामले की शिकायत आलाधिकारियों से की तो उसका तबादला सीतापुर कर दिया गया। ओझा लम्बे समय तक अपने पद पर बने रहे और अपनी पहुच का लाभ लेते हुए दूसरे जिले में अच्छी तैनाती करा ली।
विभूतिखंड थानाध्यक्ष, पंकज सिंह
विभूतिखंड थाना में तैनात रहे पंकज सिंह पर महिला कांस्टेबल ने गंभीर आरोप लगाये थे। पंकज सिंह ने थाने में बैठकर अश्लील फिल्म दिखायी और अपनी गोद में बैठाने का प्रयास किया। हद तो तब हो गयी जब अधिकारियों ने महिला कांस्टेबल का ही तबादला कर दिया और दूसरे थाने में तैनात कर दिया। पीडि़ता कार्रवाई के लिये अधिकारियों के चक्कर लगाती रही। पीडि़ता ने जहां जान देने की कोशिश की थी वहीं उसने नौकरी करने से मना भी कर दिया था।
साइबर सेल के दारोगा परमहंस गुप्ता
हजरतगंज थाना में साइबर सेल में तैनात दारोगा ने अपनी प्रेमिका को सरकारी आवास में न सिर्फ दो साल तक पत्नी की तरह रखा बल्कि यौन शोषण किया। प्रेमिका को धोखा देकर शादी रचाने चला गया। तीन दिन तक गायब परमहंस गुप्ता जब नहीं आया तो प्रेमिका थाने में पहुंचकर पता किया तो मामले का खुलासा हुआ। जिसके बाद उसने शादी रुकवाने का प्रयास किया तो किसी अधिकारी ने उसका साथ नहीं दिया। मीडिया के दबाव में थाने में रेप का मुकदमा तक दर्ज कर लिया गया जिसके बाद परमहंस गुप्ता फरार हो गया। कुल मिलाकर मामले की लीपापोती कर दी गई।
इंस्पेक्टर, संजय राय
क्राइम ब्रांच समेत लखनऊ के कई थानों में तैनात रहे संजय राय की मोहब्बत की कहानी खून के रंग से रंगी हुई है। संजय राय ने एक ट्रेनी महिला दारोगा के साथ प्यार का इजहार किया। लेकिन महिला दारोगा की दोस्ती जब किसी गैर से हो गयी तो संजय ने ऐसी साजिश रची की पुलिस महकमा सर नहीं उठा सका। ट्रेनी दारोगा के दोस्त को हत्या के जुर्म में फंसाने के लिये मासूम का कत्ल करा दिया। पुलिस ने जब केस खोला तो होश उड़ गये। संजय ने जेल में बंद पूर्वांचल के शार्प शूटर को सुपारी दे रखी थी। जिसको पकडऩे में पुलिस को दिन रात एक करने पड़े थे। इतना ही नहीं संजय राय तत्कालीन एसएसपी जे. रविन्द्र गौड़ को मारने की नियत से उनके आवास पर भी पहुंचा था।

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