वरिष्ठ साहित्यकार मुद्राराक्षस हुए पंचतत्व में विलीन

  • अंतिम संस्कार में जुटीं नामचीन हस्तियां

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। नाट्य लेखक, रंगकर्मी और साहित्यकार मुद्राराक्षस (83) का सोमवार को निधन हो गया। वह काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। परिजनों के मुताबिक कल दोपहर दो बजे के करीब उनकी तबीयत अचानक से बिगड़ गई। तब आनन-फानन में परिवार के लोग उन्हें लेकर केजीएमयू के लिए रवाना हुए लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया। आज उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें साहित्यकारों और रंगकर्मियों के अलावा राजनीतिक जगत से जुड़ी हस्तियां भी मौजूद रहीं।
मुद्रा राक्षस ने कहानी समेत अन्य विधाओं में पुस्तकों का लेखन किया था। उनकी कई रचनाओं का अनुवाद विदेशी भाषाओं में भी हुआ है। मुद्राराक्षस आकाशवाणी में एडिटर (स्क्रिप्ट्स) और ड्रामा प्रोडक्शन ट्रेनिंग का काम भी कर चुके थे। साहित्य के अलावा सियासत से भी उनका गहरा संबंध रहा है। उनका असली नाम सुभाष चंद्र आर्य था लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम मुद्राराक्षस रख लिया।
मुद्राराक्षस का साहित्यकर्म बड़ी पेचीदगियों से गुजरा। गढऩा और फिर उसे तर्कों से खारिज करना आम बात रही। उन्होंने लोहियावाद से माक्र्सवाद और फिर अम्बेडकरवाद तक की साहित्यिक यात्रा की। वह शुरुआती दिनों में लोहियावादी थे। जब लोहिया से उनका मोहभंग हुआ तो मुद्रा वामपंथी हो गए और लोहिया को फासिस्ट बताने लगे। जल्द ही वामपंथी भी कठघरे में थे और सीपीआईएम को भाजपा-माक्र्सवादी तक बता दिया। विपरीत धारा में तैरना उनका शौक था। वरना वह रेडियो की नौकरी करते हुए डीजी पद से रिटायर होते। उनके साहित्य के सिद्धांत हौसले की तरह अडिग थे। हर तरह का दौर उन्होंने देखा और साहित्य की मशाल थामे लगातार बढ़ते रहे। उन्होंने अपनी रौ में चलकर अपनी जीवन यात्रा पूरी की और दुनिया को अलविदा कह गये।

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