लोहिया में मरीज पसीने से तर-बतर लेकिन डॉक्टरों की गाडिय़ों को ठंडा रखने के लिए लगे हैं दर्जनों पंखे

 वीवीआईपी लोगों को भी नहीं मिलती होगी ऐसी पार्किंग व्यवस्था

 मुजाहिद जैदी
p1लखनऊ। राजधानी लखनऊ में आपको मल्टीलेवल से लेकर अन्डरग्राउंड पार्किंग व्यवस्था तो खूब मिल जाएगी, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शहर में एक ऐसी भी पार्किंग है जहां खड़ी होनी वाली गाडिय़ों के लिए एक-दो नहीं बल्कि पूरे तीन दर्जन पंखे लगे हुए हैं। और तो और रात का ध्यान रखते हुए इस पार्किंग में खूबसूरत लटकती हुई जर्मनी की लाइटें भी लगी हैं।
राजधानी के गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में डाक्टरों के लिए पार्किंग की जो वीवीआईपी व्यवस्था है ऐसी पार्किंग व्यवस्था तो शायद सूबे के मुख्यमंत्री की गाडिय़ों को भी नहीं मिलती होगी। संस्थान में आने वाले मरीजों को भले ही पंखे की हवा खाना न नसीब होता हो लेकिन संस्थान में कार्यरत चिकित्सकों की गाडिय़ां गर्म न हों इसके लिए तीन दर्जन पंखों की व्यवस्था की गई है। एक तरफ मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों के लिए संस्थान में कहीं भी सुविधाजनक रैन-बसेरे का इंतजाम नहीं है, उस पर डॉक्टरों की लग्जरी गाडिय़ों के लिए ऐसी वीवीआईपी व्यवस्था यहां आने वाले लोगों में चर्चा का विषय बनी रहती है। मरीजों के साथ आने वाले लोगों का कहना है कि हमें भले ही कड़ी धूप में बैठना पड़ता हो पर संस्थान के जिम्मेदारों को अपनी सुविधा की ज्यादा चिंता है, तभी तो जिस जगह सैकड़ों लोगों के बैठने का इंतजाम किया जा सकता हो वहां पर इस तरह से गाडिय़ां खड़ी करने का क्या औचित्य है। राजधानी में चिकित्सा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में एसजीपीजीआई के बाद लोहिया इंस्टीट्यूट का नाम लिया जाता है। मरीजों को मिलने वाले इलाज व सुविधाओं को लेकर लोहिया इंस्टीट्यूट पूरे उत्तर प्रदेश में जाना जाता है। यहां सिर्फ राजधानी से ही नहीं बल्कि प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों और पड़ोसी राज्यों के मरीज भी अच्छे इलाज की उम्मीद में आते हैं। संस्थान के बाहर बैठे हुए कई तीमारदारों से जब संस्थान की सुविधाओं के बारे में पूछा गया तो लगभग सभी का यही कहना था कि हमारे मरीजों को इलाज तो बहुत अच्छा मिल जाता है लेकिन दूर दराज से आए हुए लोगों को ठहरने और बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। पार्किंग की ओर ऊंगली दिखाते हुए तीमारदार कहते हैं कि कितनी बड़ी जगह संस्थान के पास है, जहां पर हम लोगों के बैठने का अच्छा इंतजाम किया जा सकता है। लेकिन कोई इस पर ध्यान नहीं देता।

ये जगह मल्टी परपज है। इसका इस्तेमाल विभागीय कार्यक्रम के दौरान ही किया जाता है। नहीं तो खाली जगह में डॉक्टरों की गाडिय़ां पार्क की जाती हैं
-प्रो. नुजहत हुसैन
(निदेशक- लोहिया इंस्टीट्यूट )

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