लोहिया इमरजेन्सी गम्भीर मरीजों के लिये नहीं

गम्भीर मरीजों को देखने की भी जहमत नहीं उठाना चाहते चिकित्सक
मरीज के इलाज के लिए परिजन करते रहे चिकित्सक की मानमनौव्वल

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल की इमरजेन्सी में इलाज के लिए पहुंचे गम्भीर मरीजों को भर्ती करना तो दूर की बात प्राथमिक इलाज मिल पाना भी टेढ़ी खीर साबित हो रही है। इमरजेन्सी में मरीज को लेकर पहुंचे परिजन मरीज के भर्ती के लिए चिकित्सकों की मानमनौव्वल में ही लगे रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ इमरजेन्सी में तैनात चिकित्सक मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करने में देर नहीं लगाते। सूत्रों की मानें तो कोई दिन ऐसा नहीं बीतता है जिस दिन 6 से 8 मरीज यहां से लौटाये न जाते हों।
लोहिया अस्पताल के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इमरजेन्सी में चिकित्सकों की तैनाती का समय अलग-अलग है। केवल एक चिकित्सक ऐसे हैं जो मरीजों को यहां से दूसरी जगह रेफर कर देते हैं, जबकि बाकी चिकित्सक या तो भर्ती करते हैं या फिर लोहिया संस्थान में मरीज को इलाज के लिए भेजते हैं। वहीं उस चिकित्सक की शिकायत जब पीडि़त अस्पताल प्रशासन से करते हंै तो अस्पताल प्रशासन लिखित शिकायत करने को कहता है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठना लाजिमी है कि मरीज अपना इलाज कराये या फिर चिकित्सक पर कार्रवाई के लिए पत्र लेखन का कार्य करे।

इमरजेंसी में चिकित्सक ने मरीज को देखना भी नहीं समझा जरूरी

बाराबंकी के गुजरन पुरवा निवासी राफिया बानों (24) को 2 जनवरी को सुबह अचानक से नाक से खून निकलने लगा, जिसके बाद घबराये परिजन मरीज को लेकर हिन्द अस्पताल पहुंचे। वहां पर मौजूद चिकित्सकों ने मरीज को देखने के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। उसके बाद मरीज को लेकर उसके परिजन लगभग 4 बजे लोहिया अस्पताल पहुंचे। अस्पताल की इमरजेन्सी में मौजूद चिकित्सक ने मरीज को देखते ही ट्रामा सेन्टर जाने के लिए कह दिया। मरीज के पति ने बताया कि लाख कोशिशों के बावजूद चिकित्सक ने मरीज को प्राथमिक उपचार तक नहीं किया। थक हार कर तीमारदारों ने लोहिया अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओंकार यादव को फोन किया। फोन पर मुख्य चिक्त्सिा अधीक्षक ने दोबारा से इमरजेन्सी में तैनात चिकित्सक के पास भेज दिया। परिजनों का कहना है कि उसके बाद भी चिकित्सक ने मरीज का इलाज नहीं किया, केवल इमरजेन्सी में तैनात अन्य कर्मचारियों ने नाक में रूई लगा कर भेज दिया।

मरीज को नहीं मिली एम्बुलेन्स
मरीज को उसके परिजन प्राइवेट एम्बुलेन्स में लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे थे। इमरजेन्सी में मरीज को छोडऩे के बाद एम्बुलेन्स वापस चली गयी। जब इमरजेन्सी में तैनात चिकित्सक ने मरीज को भर्ती नहीं किया तो परिजनों ने मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेन्स की मांग की, लेकिन उन्हें एम्बुलेन्स भी नहीं मिल पायी। उसके बाद परिजनों को लोहिया अस्पताल के बाहर खड़ी एक दूसरी निजी एम्बुलेन्स से मरीज को ले जाना पड़ा।

न्यूरो चिकित्सक न होने का हवाला देकर भेजा ट्रामा
लोहिया अस्पताल के इमरजेन्सी में दो जनवरी के ही दिन लगभग 4 बजे इमरजेन्सी में तैनात चिकित्सक ने दुर्घटना में घायल व्यक्ति को यह कहकर वापस लौटा दिया कि यहां पर न्यूरो के चिकित्सक नहीं हैं। जबकि बगल में ही लोहिया संस्थान स्थित है और वहां पर न्यूरो का एक अलग विभाग बना हुआ है। घायल व्यक्ति के रिश्तेदार रमेश ने बताया कि हम लोग चिनहट के पास रहते हैं और वहीं पर सडक़ दुर्घटना में घायल होने के बाद मरीज समाजवादी एम्बुलेंस सेवा से लेकर लोहिया अस्पताल आये थे, लेकिन यहां न्यूरो के चिकित्सक न होने के कारण निजी अस्पताल लेकर जा रहे हैं।

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