लोगों को है एपीएल कोटे के तहत मिलने वाले राशन का इंतजार

  • अधिकारी खाद्य सुरक्षा कानून के फरमान का पालन कराने में जुटे

  • जिला प्रशासन ने अब तक जारी नहीं की फरवरी महीने का राशन बांटने की तिथि

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। राजधानी में खाद्य सुरक्षा लागू करने में सारा प्रशासनिक अमला व्यस्त है। आवश्यक वस्तु निगम के गोदामों से सस्ता गल्ला की दुकानों पर राशन पहुंचाने और उसका समय से वितरण करवाने की हर संभव कोशिश की जा रही है, लेकिन तमाम तकनीकी खामियों की वजह से प्रशासन के हाथ नाकामयाबी लग रही है। इन सबके बीच फरवरी महीने में एपीएल कार्डधारकों को आवंटित राशन बांटने की तिथि अब तक तय नहीं हो सकी है। इससे कोटेदारों और कार्डधारकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामले को लेकर विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
जिले में कुल आठ लाख 63 हजार 597 एपीएल कार्ड धारक है। इसमें हर कार्डधारक को 8 किग्रा गेहूं और 10 किग्रा चावल दिया जाता है। इसकी कीमत 6.60 रुपये प्रति किग्रा गेहूं और 8.45 रुपये प्रति किग्रा चावल तय है। प्रशासन ने इसमें पहले आओ और पहले पाओ का नियम लागू किया गया है। इस तरह एपीएल कोटे में दुकानों को आवंटित राशन सबसे पहले पहुंचने वाले कार्डधारकों को ही मिल पाता है। राशन खत्म होने के बाद इसमें दुकानदार की कोई जवाबदेही नहीं रहती। इसलिए हर महीने एपीएल कोटे के तहत कार्डधारकों को मिलने वाले राशन वितरण की तिथि घोषित की जाती है। आलम ये है कि राजधानी में आपूर्ति विभाग के सारे अधिकारी खाद्य सुरक्षा कानून लागू करवाने और लोगों को सस्ता खाद्यान्न वितरित करवाने में व्यस्त हैं, लेकिन जिन लोगों के पास एपीएल का कार्ड हैं, वे राशन वितरण की तिथि घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं।
त्यौहार ने बढ़ाई चिन्ता
दरअसल प्रशासन की तरफ से एपीएल कार्डधारकों को फरवरी महीने के राशन के साथ मार्च में अतिरिक्त चीनी बंटवाने का आदेश दिया गया था। यह आदेश होली के त्यौहार को ध्यान में रखकर दिया गया, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने फरवरी महीने का राशन मार्च में वितरित करवाने की कोई तिथि ही घोषित नहीं की है। जबकि एपीएल कार्ड धारकों को गेहूं और चावल के अलावा हर महीने मिट्टी का तेल भी मिलता है। जिसकी कीमत 9.85 रुपये से 10.25 रुपये तक है। इसमें मिट्टी के तेल की कीमत दूरी के हिसाब से निर्धारित की जाती है। इसलिए कोटेदार और कार्डधारक दोनों ही परेशान हैं।
इस संबंध में चौक इलाके के राजाबाजार के सस्ता गल्ला वाली दुकान के कोटेदार ने कहा कि क्षेत्र की कई दुकानों में फरवरी महीने का एपीएल कोटे का राशन भरा पड़ा है। इसमें गेहूं और चावल सहित त्यौहारों के मद्देनजर भेजी गई अतिरिक्त चीनी की बोरियां भी हैं, जिनको चूहे खा रहे हैं। इनको सुरक्षित रखने और समय से बांटने की चिन्ता दुकानदारों को सता रही है लेकिन प्रशासन की तरफ से एपीएल कोटे के तहत आवंटित राशन बांटने की तिथि अब तक नहीं घोषित हुई है। इस कारण लोग राशन की आस में रोजाना दुकान के चक्कर लगा रहे हैं। इतना ही नहीं कोटेदारों को कार्डधारकों की गालियां भी सुननी पड़ रही हैं। इस संबंध में आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

Pin It