लोकतंत्र, आतंकवाद और ओबामा की चिंता

आतंकवाद को राष्टï्र के लिए नुकसानदेह मानने वाले ओबामा भी पाकिस्तान और आतंक को लेकर कभी स्पष्टï नीति पर चलते नहीं दिखे। अफगानिस्तान आज जिस स्थिति में है, इसके पीछे अमेरिकी नीतियां ही जिम्मेदार हैं। यहां अभी भी आतंकवाद और सरकार के बीच जंग जारी है। यही नहीं अमेरिका संयुक्त राष्टï्र में आतंकवाद से निपटने के लिए कोई ठोस नीति बनवाने की कोशिश करता भी नहीं दिखा।

sajnaysharmaअमेरिका के राष्टï्रपति बराक ओबामा जिस समय अपने फेयरवेल समारोह में नस्लवाद, आतंकवाद, असमानता और विकृत राजनीति पर भावुक भाषण दे रहे थे, उसी समय अफगानिस्तान में आतंकी मौत का खेल खेल रहे थे। यहां आतंकियों ने कई शहरों को निशाना बनाया। धमाकों में तीन दर्जन से अधिक लोग मारे गए और काफी संख्या में घायल हुए। ये दो दृश्य यह बताने के लिए काफी हैं कि विश्व महाशक्ति अमेरिका में भी आतंकवाद का खौफ है। यह वही अमेरिका है, जिसने अपने हितों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से एशिया में आतंकवाद को कभी प्रश्रय दिया था। वल्र्ड ट्रेड सेंटर में हुए हमले के बाद ही अमेरिका ने आतंकवाद को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थी। इसके पहले तक अमेरिका यह जानते हुए भी कि पाकिस्तान आतंकियों को पाल-पोस रहा है, उसकी जमकर आर्थिक मदद करता रहा। आतंकवाद को राष्टï्र के लिए नुकसानदेह मानने वाले ओबामा भी पाकिस्तान और आतंक को लेकर कभी स्पष्टï नीति पर चलते नहीं दिखे। अफगानिस्तान आज जिस स्थिति में है, इसके पीछे अमेरिकी नीतियां ही जिम्मेदार हैं। यहां अभी भी आतंकवाद और सरकार के बीच जंग जारी है। यही नहीं अमेरिका संयुक्त राष्टï्र में आतंकवाद से निपटने के लिए कोई ठोस नीति बनवाने की कोशिश करता भी नहीं दिखा। सवाल यह है कि फिर अमेरिकी राष्टï्रपति ओबामा के इस भावुक भाषण के मायने क्या हैं? क्या वे वाकई लोकतंत्र के भविष्य को लेकर चिंतित हैं या नए अमेरिकी राष्टï्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नसीहत देना चाहते हैं? क्या नस्लवाद और असमानता की बात करने वाले ओबामा ने अपने कार्यकाल के दौरान इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कोई ठोस पहल की? विकृत राजनीति पर उनकी चिंता भी सार्वभौमिक नहीं दिखती है। इसके पीछे ट्रंप के पूर्व में दिए गए भाषण ही निशाने पर रहे हैं। हां, ओबामा के ताजा वक्तव्य पर भारतीय राजनीतिज्ञों को सोचना चाहिए। ओबामा ने अपने भाषण में यह स्वीकार किया कि मुस्लिम अमेरिकी उतने ही राष्टï्रभक्त हैं, जितने मूल अमेरिकी। इस वक्तव्य से भारत में अलगाववादी राजनीति करने वाले राजनीतिज्ञों को सबक लेने की जरूरत है, जो अक्सर मुस्लिम भाइयों को लेकर ओछी और सांप्रदायिक राजनीति करते रहते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो ओबामा की भावुकता और चिंताओं को वैश्विक स्तर पर समझने की जरूरत है। लोकतंत्र के लिए असमानता, नस्लवाद और आतंकवाद घातक हैं। यदि विश्व में शांति बनाए रखनी है तो इन समस्याओं का जड़ से समाधान करना पड़ेगा।

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