लापरवाही से होने वाली मौतों की कौन करेगा जांच, कैसे होगी कार्रवाई

लखनऊ। राजधानी के अस्पतालों में मरीजों को समय से इलाज न मिल पाने और चिकित्सकों की लापरवाही के कारण मरीजों की मौत का सिलसिला जारी है। ऐसे पीडि़त परिवारों को न्याय दिलाने की बजाय चिकित्सकों को बचाने की प्रवृत्ति स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की पोल खोल रही है। इतना ही नहीं चिकित्सकीय पेशे के प्रति लोगों के दिल में मौजूद सम्मान और धरती के भगवान की छवि भी धुंधली हो रही है। जो चिकित्सकीय पेशे से जुड़े लोगों के लिए शुभ संकेत नहीं है।

Captureकेस-1  तेलीबाग खरिका की कुम्हार मंडी निवासी संतोष राय का बेटा वत्सल (11) वृंदावन कॉलोनी स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल में कक्षा पांच का छात्र था। परिजनों के मुताबिक कुछ दिन पहले उसके पैर में चोट लगी थी। इस वजह से पैर सूज गया था और उसमें दाने निकल आए थे। वत्सल का इलाज सिविल अस्पताल से चल रहा था। इसी बीच एक दिन बच्चे की हालत अधित बिगडऩे पर परिवार के लोग सिविल अस्पताल ले गए। वहां इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया और हालत गंभीर बताकर पेशेंट को इमरजेंसी वार्ड में ही भर्ती कर लिया। संतोष का आरोप है कि बच्चे की हालत बिगडऩे पर वार्ड में मौजूद नर्स से डॉक्टर को बुलाने का आग्रह किया गया था लेकिन उसने डॉक्टर को नहीं बुलाया। अपनी मर्जी से बच्चे को कोई इंजेक्शन लगा दिया। इसके चंद मिनटों बाद ही वत्सल की हालत और अधिक बिगडऩे लगी। तब डॉक्टर को बुलाने के लिए नर्स से दोबारा आग्रह किया गया लेकिन नर्स ने परिजनों को डांट-फटकार कर शांत करा दिया। आखिरकार एक घंटे बाद चिकित्सक मौके पर पहुंचे और उन्होंने पेशेंट की जांच करने के तत्काल बाद बच्चे को ड्रिप लगाने का निर्देश नर्स को दिया। इसके कुछ ही क्षणों बाद बच्चे की मौत हो गई।
बिना जांच हुए मौत का कारण बताने में जुटा अस्पताल प्रशासन
परिजनों का आरोप है कि सिविल अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी अपने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से बच्चे के मौत के कारणों की जांच करवाये बिना चिकित्सकों ने फैसला सुना दिया कि बच्चे की मौत खून का थक्का जमने वाली बीमारी के कारण हुई। जबकि अस्पताल की तरफ से अब तक बच्चे की कोई जांच ही नहीं कराई गई है।
पुलिस ने नहीं दर्ज किया मामला
बच्चे की मौत पर सिविल अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को घर भेज दिया । इसके बावजूद लापरवाह चिकित्सकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब परिजन इलाज में लापरवाही के मामले में चिकित्सक तथा नर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाने थाने पहुंचे। वहां पुलिस ने चिकित्सक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से साफ मना कर दिया। पुलिस का इस मामले में साफ कहना था कि डाक्टरों के खिलाफ कोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करने को मना किया है। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद चिकित्सक हड़ताल पर चले जाते हैं।
सीएमओ ने भी किया निराश
संतोष राय अपने बच्चे की मौत का गम सीने में दफन करके न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं। जिन लोगों की लापरवाही के कारण बच्चे की मौत
हुई है, उन्हें बचाने के लिए पूरा स्वास्थ्य महकमा जुट गया है।

केस-2  मरीज की मौत का मामला दबाए रहा अस्पताल प्रशासन

पुलिस लाइन निवासी उमा शंकर को पेट संबंधी परेशानी थी। 9 जुलाई को उमा शंकर को पेट में दर्द की शिकायत पर परिजनों ने फैजाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां डॉक्टरों ने जांच पड़ताल के बाद मरीज को हार्निया की समस्या बताया और उसका जल्द से जल्द आपरेशन करने की सलाह दी थी। सोमवार की रात उमा शंकर का आपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान ही उमाकांत की मौत हो गई। डॉक्टर मौत की खबर दबाए रहे। मरीज की मौत की खबर सोमवार की रात करीब दो बजे दी गयी। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने शव परिजनों के हवाले कर दिया। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने को कहा। इस पर अस्पताल के कर्मचारी भड़क उठे। उन्होंने फिर से शव को कब्जे में ले लिया। आखिरकार पुलिस के पहुंचने के बाद परिजनों को शव मिल सका।

केस-3 स्वास्थ्य विभाग को करनी थी मामले की जांच

गोमती नगर स्थित एक निजी अस्पताल में पिछले महीने मरीज की मौत के बाद चल रहे इलाज पर परिजनों ने जमकर हंगामा काटा था। परिजनों का आरोप था कि उनके आईसीयू में जाने पर भी रोक लगा दी गयी थी। शक होने पर परिजन जबरन आईसीयू में घुस गये थे। तब मरीज की मौत की बात पता चली थी। बताते चले कि गोंडा निवासी अनिरुद्ध प्रसाद शुक्ला (70) को खून की उल्टी हो रही थी। इसलिए मरीज को परिवार के लोगों ने अस्पताल में भर्ती कराया था। मरीज के पुत्र बृजेंद्र ने आरोप लगाया था कि उनके पिता की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। वहीं अस्पताल का स्टाफ मरीज के बारे में कुछ भी बताने से इंकार करता रहा। बाद में मरीज की मौत का खुलासा हुआ। इस मामले में पुलिस ने परिजनों की तरफ से दी गई तहरीर भी ली थी ेलेकिन अब तक कोई जांच नहीं हुई।

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