लविवि ने सम्बद्ध कॉलेजों को दिया तोहफा निजी महाविद्यालयों को किया निराश

  • सम्बद्ध कॉलेजों की बढ़ा दी गईं 33 फीसदी सीटें, अब तक पूरा नहीं कर पाए प्रवेश

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Capture 14लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने कुछ समय पहले ही सम्बद्घ कॉलेजों के लिए 33 फीसदी सीटें बढ़ा दिया था। उसके बाद भी कॉलेजों ने अब तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं की है। जो छात्रों के लिए मुसीबत का कारण बन गया है।
लविवि ने कुछ दिन पहले विवि से सम्बद्ध कॉलेजों के लिए 33 फीसदी सीटें बढ़ा दी थी लेकिन ये सम्बद्ध कॉलेजों ने अपने एडमिशन अभी तक पूरे नहीं कर पाये हैं। ऐसे में अगस्त का महीने खत्म होने को है और इन कॉलेजों ने एडमिशन अपने पूरे नहीं किया है। जोकि हुआ यूं कि लविवि ने जुलाई में अचानक इन कॉलेजों की सीटों में इजाफा कर दिया था,इसी वजह से इन कॉलेजों ने अभी तक अपने प्रवेश पूरे नहीं कर पाये है। वहीं प्राइवेट कॉलेजों में अभी तक एक्का-दुक्का ही एडमिशन हो पाये है। ऐसे में प्राइवेट कॉलेजों का कहना है कि लविवि ने सीट बढ़ा कर हम लोगों का दाना-पानी बन्द कर दिया है। हालात ये हैं कि अभी तक प्राइवेट कॉलेजों की 25 फीसदी सीटें भी फुल नहीं हो पायी है। वहीं कॉलेज का यह भी कहना है कि अगर छात्र-छात्राओं को सम्बद्ध कॉलेजों में आसानी से प्रवेश मिल रहा है तो छात्र प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन क्यों लेगा।

सम्बद्ध कॉलेजों की सीटों में इजाफा

लविवि से सम्बद्ध कॉलेजों को सीटों को इजाफा तो कर दिया गया लेकिन यही इजाफा विवि को जून में करना था, जिससे कॉलेजों के प्रवेश अगस्त तक पूरे हो जाते और इसके बाद प्राइवेट कॉलेजों को एक मौका मिल जाता प्रवेश करने का लेकिन विवि ने सम्बद्ध कॉलेजों में सीटों का तो इजाफा कर दिया लेकिन समय खत्म होने के बाद। ऐसे अब छात्र-छात्राएं प्राइवेट कॉलेज में प्रवेश ही नहीं लेना चाहते हैं।

प्राइवेट कॉलेजों की 25 फीसदी सीटें भी नहीं भरीं

जहां एक तरफ लविवि और उससे सम्बद्ध कॉलेजों में देर से प्रवेश प्रारम्भ हुआ। उसके कारण राजधानी के तमाम ऐसे कॉलेज हैं, जहां पर अभी तक 25 फीसदी तक सीट नहीं फुल हो पाई हैं। ऐसे सिटी अकादमी सीडी पब्लिक वासुदेव गल्र्स कॉलेज, रजत गल्र्स डिग्री कॉलेज, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद गल्र्स डिग्री कॉलेज कुंवर आसिफ ली डिग्री कॉलेज में अभी तक 25 फीसदी भी सीटें फुल नहीं हो पायी है। ऐसे में छात्र-छात्राओं की तो पहली पसन्द लविवि होता है और अगर छात्रों को विवि में प्रवेश नहीं मिलता तो वहा सम्बद्ध कॉलेजों की ओर बढ़ता है, ऐसे में अगर इन कॉलेजों में प्रवेश ही देर से होगा तो प्राइवेट कॉलेज में प्रवेश कब होगा।

लविवि ने प्रवेश तो समय पर करा ही दिया है लेकिन जो सीटें बढ़ाई गयी हैं, उसमें थोड़ा देरी हो गयी है। ऐसे में सीटों की संख्या पहले ही बढ़ा देनी चाहिए थी।”
प्रो. एसबी निमसे
कुलपति, लविवि

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