ललित मोदी का तिलिस्म…

यह ललित मोदी का ही तिलिस्म है कि उसकी गिरफ्तारी के बारे में बात न कर नेता एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। जैसे यह मामला चल रहा है और दिन पर दिन नये-नये नाम सामने आते जा रहे हैं उससे तो यही लगता है कि अभी न जाने कितने और नाम सामने आयेंगे।

sanjay sharma editor5ललित मोदी से जुड़ा मामला गंभीर होता जा रहा है। अभी सुषमा स्वराज का मामला चल ही रहा था कि वंसुधरा राजे सिंधिया का नाम आया। कांग्रेस जहां ललित मोदी के मुद्ïदे पर केंद्र सरकार को घेर रही थी, वहीं मददगारों की सूची में अब उनके नेता का भी नाम जुड़ गया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ललित मोदी के चक्कर में एक बार अपना पद तक गवां चुके थे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का नाम इस विवाद में इसलिए आया, क्योंकि ब्रिटेन के एक अखबार ने यह खबर छापी थी कि उन्होंने ललित मोदी की पुर्तगाल यात्रा के लिए अंग्रेज सरकार से पैरवी की थी।
अब राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ-साथ कई नेताओं का नाम इसलिए इस विवाद के घेरे में आ गया, क्योंकि ललित मोदी ने खुद एक इंटरव्यू में बताया कि कब-कब किसने मदद की। धीरे-धीरे गड़े मुर्दे उखड़ रहे हैं। ललित मोदी के सनसनीखेज खुलासे ने नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। मोदी ने भाजपा खेमे की बेचैनी तो बढ़ाई ही साथ ही कुछ नाम उजागर कर कांग्रेस पार्टी और राकांपा की भी बेचैनी बढ़ा दी है।
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ट्वीट कर सफाई दे रहे हैं कि वो तीन साल से मिले ही नहीं है तो पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को तो सफाई देने के लिए प्रेस कांफ्रेस तक करनी पड़ी। शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल भी सफाई पेश कर चुके हैं। वंसुधरा राजे सिंधिया को तो पारिवारिक मित्र भी बताया और मददगार भी। जबकि वसुंधरा ने ललित मोदी के परिवार से पहचान की बात को स्वीकार करते हुए दस्तावेज संबंधी किसी भी बात से इन्कार किया है। अब इसे क्या कहेंगे? शिवसेना के उद्धव ठाकरे ने तो यहां तक कहा कि ललित मोदी वहां मजे कर रहा है और हम यहां लड़ाई कर रहे हैं।
यह ललित मोदी का ही तिलिस्म है कि उसकी गिरफ्तारी के बारे में बात न कर नेता एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। जैसे यह मामला चल रहा है और दिन पर दिन नये-नये नाम सामने आते जा रहे हैं उससे तो यही लगता है कि अभी न जाने कितने और नाम सामने आयेंगे। अभी आगे देखना होगा कि इस तिलिस्म से और कितने लोगों के नाम उजागर होते हैं। जो भी हो लेकिन यह मामला इतना सीधा नहीं लगता जितना अभी दिख रहा है।
भाजपा नेता कीर्ति आजाद ने सही ही लिखा है- जहां शहद वहां मक्खी छोड़ो, खेल को नेताओं…। मक्खी बैठी दूध पर, पंख गए लिपटाए, सिर धुने हाथ मले लालच बुरी बलाय।

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