लडक़ी को राहत देने के बजाय राघवेन्द्र को बचाने में जुटे आईजी नवनीत सिकेरा

सीएम का आदेश ताक पर

H11090 पर बुलाकर वहां तैनात प्रभारी राघवेन्द्र ने किशोरी के साथ किया था दुव्र्यवहार

और कहीं बाहर मिलने को बुलाया थासीएम ने मामला संज्ञान में आने के बाद तत्काल
कार्रवाई के दिए थे निर्देशसिर्फ राघवेन्द्र को हटाकर निभाई गई औपचारिकता
1090 की सीओ को ही दे दी गई जांच, जबकि सब जानते हैं राघवेन्द्र आईजी सिकेरा का था सबसे खास19 दिन बीतने के
बाद भी अभी तक नहीं हो सकी पूरी जांच, क्योंकि जांच कर रही सीओ भी जानती हैं सिकेरा और राघवेन्द्र के रिश्ते
दूसरी जांच कर रही महिला सम्मान प्रकोष्ठï की इंस्पेक्टर से पीडि़ता ने कहा कि राघवेन्द्र ने की थी उससे आपित्तजनक बातेंराघवेन्द्र अब प्रभावशाली लोगों के साथ मीडिया मैनेजमेंट में जुटा

 संजय शर्मा
लखनऊ। अगर कोई साधारण इंसान किसी लडक़ी को प्रलोभन या दबाव बनाकर उससे अकेले में मिलने को कहता, सबके सामने उसको धमकाता कि उसका उत्पीडऩ करने वाले के साथ वह समझौता कर ले, उससे कहता कि कहीं बाहर अकेले में मिलो तो 1090 पर तैनात पुलिसकर्मी उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते। ऐसा दावा 1090 के अफसर करते हैं, मगर जब 1090 के प्रभारी ने ही एक किशोरी को अपने प्रेमजाल में फंसाने के लिए यह ताना-बाना बुना तो यह सारे नियम बदल गए। सीएम के कड़े रुख के बाद वायरलेस विभाग में तैनात इस रेडियो मेन्टिनेंस अफसर को मात्र वहां से हटाया और उसके खिलाफ चल रही जांच 19 दिन बाद भी पूरी नहीं हो सकी क्योंकि जांच कर रही 1090 में तैनात सीओ बबिता सिंह अच्छी तरह जानती हैं कि राघवेन्द्र उनके बॉस नवनीत सिकेरा का सबसे मुंह लगा आदमी है। नतीजा जिस व्यक्ति को अब तक निलंबित करके उसके खिलाफ एफआईआर लिखी जानी चाहिए थी। वह खुलेआम आराम से घूम रहा है और कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर मीडिया मैनेजमेंट में जुटा है। जाहिर है कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट 1090 पर बदनामी के छींटें पड़ रहे हैं। लोग समझ नहीं पा रहे कि 19 दिन के बाद भी राघवेन्द्र की जगह किसी और की तैनाती क्यों नहीं हुई। मतलब साफ है कि राघवेन्द्र को क्लीन चिट देकर वहीं दुबारा तैनात करने की तैयारी चल रही है।
उल्लेखनीय है कि लॉ की एक स्टूडेंट ने अपने उत्पीडऩ की शिकायत 1090 पर की थी, जिसके बाद राघवेन्द्र ने उल्टा उसका उत्पीडऩ शुरू कर दिया था। जब यह बात सीएम के संज्ञान में आई तो खलबली मची। इसकी जांच महिला सम्मान प्रकोष्ठï ने शुरू की। 1090 के आईजी नवनीत सिकेरा अच्छी तरह जानते थे कि अब सच्चाई सामने आ जायेगी। लिहाजा उन्होंने एक दूसरी जांच अपने ही मातहत सीओ बबिता को भी दे दी, जो उन्नीस दिन के बाद भी जांच पूरी नहीं कर सकी हैं और कह रही हैं कि अभी पीडि़त पक्ष के पूरे बयान नहीं हो पाए हैं। वह जल्द ही जांच पूरी कर देंगी। दूसरी ओर महिला सम्मान प्रकोष्ठï की इंस्पेक्टर सत्या सिंह को पीडि़त लडक़ी ने बयान दिए हैं कि राघवेन्द्र लगातार उस पर अलग-अलग लोगों से दबाव बनवा रहा है। यही नहीं जब वह महानगर में दर्ज एफआईआर में अपने बयान देने गई तो वहां तैनात इंस्पेक्टर ने कहा कि वह राघवेन्द्र के खिलाफ उसके बयान में कुछ नहीं लिखेगी। जाहिर है नवनीत सिकेरा अपने सबसे दुलारे राघवेन्द्र को बचाने के लिए अपने प्रभाव का पूरा इस्तेमाल करने में जुटे हैं।

आखिर राघवेन्द्र पर इतने मेहरबान क्यों हैं सिकेरा
1090 को करीब से जानने वाले बताते हैं कि राघवेन्द्र 1090 में पैसा कमाने की मशीन था। नियमों को ताक पर रखकर उसने एक कंपनी को पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपए के 1090 के यूनीपोल लगाने का ठेका दिया था और बड़ी रकम वसूली थी। यहीं नहीं कई लोगों को महिलाओं की शिकायत पर पकड़ा गया और उनसे अच्छी रकम लेकर उन्हें छोड़ दिया गया। यहीं कारण है कि 1090 का प्रभारी कोई महिला नहीं बल्कि एक मामूली रेडियो मेन्टीनेंस अफसर राघवेन्द्र को बना दिया गया था।

Pin It