लचर कानून व्यवस्था

राजधानी में आपराधिक घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। अपराधियों में पुलिस-प्रशासन का कोई डर नहीं बचा है। पहले बदमाश रात के अंधेरे में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते थे लेकिन आज हौसला इतना बढ़ गया है कि दिन-दहाड़े sanjay sharma editor5घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जब सुरक्षित नहीं है तो अन्य शहरों की बात करना बेमानी है। राजधानी में आपराधिक घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। अपराधियों में पुलिस-प्रशासन का कोई डर नहीं बचा है। पहले बदमाश रात के अंधेरे में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते थे लेकिन आज हौसला इतना बढ़ गया है कि दिन-दहाड़े घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। किसी का अपहरण हो या लूट-पाट, अपराधी खुलेआम अपने कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। इस सबमें सबसे ज्यादा खराब हालत आधी आबादी की है। महिलाओं की अस्मिता खतरे में है। दिनदहाड़े युवतियों का अपहरण करने का प्रयास किया जा रहा है। छेडख़ानी, बलात्कार की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। यह सब पुलिस के ढुलमुल रवैये की वजह है। समाज अगर भयरहित बनता है तो वह सिर्फ पुलिस की वजह से। कोई भी अपराध करने से डरता है तो वह सिर्फ पुलिस के डर की वजह से, लेकिन आज ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है। पुलिस का डर अपराधियों में नहीं बल्कि जनता में दिख रहा है। लोग पुलिस से दूरी बनाने में ही अपनी भलाई समझते हैं। सूबे में महिला अपराध पर अंकुश लगने के बजाए बढ़ता जा रहा है।
अब तो शायद ही कोई दिन हो जिस दिन राजधानी में कोई गंभीर वारदात न हो। हत्या, फिरौती, लूटपाट, बलात्कार जैसी घटनाओं से लोग कराह रहे हैं। लोगों में दहशत व्याप्त है। जब लोग दिन में सुरक्षित नहीं हैं तो रात में सुरक्षा की कल्पना करना बेमानी है। देर शाम ही लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। लोगों का पुलिस से भरोसा उठ गया है। राजधानी में पुलिस का रवैया अपराधियों के लिए सकारात्मक हो गया है और जनता के लिए नकारात्मक। पुलिस जनता की समस्याओं को सुन नहीं रही है। भ्रष्टïाचार इस कदर व्याप्त है कि बिना पैसे के पुलिस कोई सुनवाई नहीं करती। लोगों को एक एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने का कई बार चक्कर लगाना पड़ रहा है। महिलाएं अपनी समस्याओं को लेकर पुलिस थाने जा रही हैं तो उन्हें वहां से बैरंग लौटा दिया जा रहा है। उनकी समस्या की सुनवाई तो नहीं हो रही बल्कि उनके साथ वहां बदसलूकी जरूर हो जाती है। जनता के साथ पुलिस का यह रवैया ठीक नहीं है। पुलिस जनता की रक्षा के लिए है न कि उनका शोषण करने के लिए। यह कहीं से ठीक नहीं है। सरकार को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। जनता ने प्रदेश की सत्ता सौंपी है तो सिर्फ इसी उम्मीद में कि उन्हें भय मुक्त वातावरण मिलेगा। अपराधियों से निजात मिलेगी।

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