लखनऊ विश्वविद्यालय में दोषी छात्रों को नहीं मिलेगा छात्रावास में एडमिशन

  • विश्वविद्यालय प्रशासन ने 400 से अधिक दोषी छात्रों का नाम किया ऑनलाइन
  • इस बार दोषियों को नहीं मिलेगा छात्रावास में प्रवेश

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नए और पुराने कैंपस में आए दिन किसी न किसी बात को लेकर हंगामा व तोड़-फोड़ करते रहते हैं। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले अधिकतर छात्र विवि के छात्रावासों में रहने वाले होते हैं। विवि की ओर से मारपीट करते पकड़े जाने पर अक्सर छात्रों को नोटिस देकर मौका दिया जाता रहा है लेकिन उपद्रवी छात्र नहीं सुधर रहे हैं। इसलिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने नये सत्र में दोषी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का पूरा मन बना लिया है। इस बार दोषियों की पूरी लिस्ट ऑनलाइन भी जारी कर दी है। इन्हें छात्रावास में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय हर साल उपद्रवियों को एक मौका देकर छात्रावास में रहने की परमीशन दे देता है, जिसके बाद छात्र विवि की दरियादिली का मजाक बनाकर सबक लेने की बजाय किसी बड़ी घटना को अंजाम देते हैं। पिछले साल के हंगामों व घटनाओं से सबक लेते हुए विवि प्रशासन ने ऐसे सभी दोषियों की लिस्ट तैयार की है। लिस्ट में लगभग 400 से अधिक छात्र हैं,जिनके खिलाफ प्रॉक्टर ऑफिस में शिकायत दर्ज हैै। इन्हें किसी भी कीमत पर इस बार हॉस्टल नहीं दिया जाएगा।
विवि के पास दोषियों का डेटा न होने के कारण उन छात्रों को दोबारा हॉस्टल मिल जात था, जो नियमों को तोडऩे और किसी घटना को अंजाम देने में शामिल होते थे। इस बार विवि प्रशासन ने ऐसे सभी दोषियों का डेटा ऑनलाइन कर दिया है। भविष्य में जब कभी ऐसे छात्र विवि में किसी कोर्स में प्रवेश लेने के लिए अप्लाई करेंगे, तो उनका नाम वेबसाइट पर डालते ही ब्लैक लिस्ट में मौजूद नामों की डिटेल आ जाएगी। इससे दोषी छात्रों को हॉस्टल एलाट करने के झंझट से मुक्ति मिल जायेगी।

दोषियों ने दिया इन सभी घटनाओं को अंजाम

केस-1- कैलाश हॉस्टल में हंगामे के दौरान बहुत से ऐसे छात्र थे, जिन्होंने प्रोफेसर के घरों में तोडफ़ोड़ व आगजनी को अंजाम दिया था। वहीं इन छात्रों ने प्रॉक्टर ऑफिस में आग लगाने की कोशिश भी की थी। प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने विवि में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की मदद से इन दोषियों की पहचान की है।
केस-2- लगभग दो माह पहले न्यू कैंपस में छात्र व कैंटीन संचालक के बीच कोल्ड ड्रिंक की बोतल को लेकर जमकर हंगामा किया गया। यहां तक कि छात्रों ने कैंटीन में आग तक लगा दी। हंगामे के दौरान दर्जन भर छात्र और एडीशनल प्रॉक्टर घायल हुए थे।
केस-3- एक स्कॉर्पियो में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने कैंपस में एक बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और एक मोटरसाइकिल को टक्कर मारी थी। इस टक्कर से मोटर साइकिल को भारी क्षति पहुंची व कई अन्य वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। इस बात को लेकर दो छात्र गुटों के बीच में जमकर मारपीट हुई। इस दौरान एक छात्र के सिर पर बोतल से हमला किया गया, जिससे उसका सिर फूट गया।
केस-4- न्यू कैंपस में परीक्षा देने आयी छात्राओं ने अपनी पर्स व मोबाइल गाड़ी की डिग्गी में रखकर, स्कूटी पाॄकग में खड़ी कर दी। परीक्षा देकर वापस आने पर छात्रा ने पाया कि उसकी डिग्गी का ताला टूटा पड़ा है। स्कूटी में रखे मोबाइल फोन समेत अन्य सामान गायब थे। छात्राओं ने पार्किंग अटेंडेंट और कुछ छात्रों पर मोबाइल चोरी करने का आरोप लगाया था, जिसमें छात्रावास के ही छात्रों की पहचान हुई।

वर्ष 1996-2016 तक के दोषियों का डेटा हुआ ऑनलाइन
विश्वविद्यालय प्रशासन ने केवल पिछले वर्ष का ही नहीं बल्कि वर्ष 1996 से लेकर 2016 तक के सभी दोषियों का डेटा तैयार किया है। इनमें से लगभग 200 से अधिक छात्र निष्कासित हैं। उनकी वजह से अन्य छात्रों को छात्रावास नहीं मिल पाता है।

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