लखनऊ विकास प्राधिकरण के अभियंताओं की लापरवाही से बिल्डरों के हौसले बुलंद

  • आवासीय मकानों में बढ़ रहीं व्यावसायिक गतिविधियां
  • निरालानगर व अलीगंज के कर्ई इलाकों में जारी है अवैध निर्माण
  • एलडीए के अधिकारियों की खामोशी पर उठ रहे सवाल

अंकुश जायसवाल

captureलखनऊ। एलडीए अभियंताओं व बिल्डरों का गठजोड़ इतना मजबूत है कि शहर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहा है। अलीगंज हो या फिर निरालानगर ज्यादातर जगहों पर अवैध ढंग से बने कॉम्प्लेक्स या फिर निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स ही दिखाई देते हैं। इसकी जानकारी एलडीए के क्षेत्रीय अभियंताओं को भी है, लेकिन सब जानकर भी अंजान बने रहते हैं। क्षेत्रीय जनता अवैध निर्माण के संबंध में शिकायत करती है, तब भी कार्रवाई के नाम पर सब चुप्पी साधे रहते हैं। यदि उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही जाती है, तो सीधा सा जवाब देते हैं कि उच्चाधिकारियों की तरफ से लिखित आदेश आयेगा, तभी कार्रवाई की जायेगी। इसी वजह से तीन से पांच फिट चौड़ी गलियों में भी होटल, पैलेस, गेस्ट हाउस व शादी घर बनने का सिलसिला जारी है। इन इलाकों में आवासीय मकानों पर बिना किसी अप्रूवल एवं परमीशन के व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से जारी हैं। एलडीए के अधिकारी अवैध निर्माण कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते नजर आ रहे हैं।
पुराना लखनऊ हो या फिर ट्रांस गोमती क्षेत्र, सभी जगहों पर अवैध निर्माण कराने वालों की बाढ़ सी आ गई है। ट्रांसगोमती के अलीगंज, निरालानगर व कपूरथला के कई इलाकों में तेजी से अवैध निर्माण का कार्य फल फूल रहा है। एक ओर जहां मानकों की अनदेखी कर धड़ल्ले से निर्माण जारी है। वहीं इसमें एलडीए के अभियंताओं की भूमिका भी संदिग्ध बनी हुई है। सूत्रों की माने तो निरालानगर में श्री रामकृष्ण मठ के सामने बना कॉम्प्लेक्स पूरी तरह से अवैध निर्माण के घेरे में है। इस मामले में कई बार एलडीए के अभियंताओं और अफसरों को सूचित किया गया किन्तु अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं। वहीं इसी क्षेत्र की संकरी सडक़ों में बने चार से पांच मंजिला होटल, गेस्ट हाउस, पैलेस व शादी घर भी मानकों को पूरा करते नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि अवैध बिल्डिंगों के माध्यम से बेरोकटोक धन उगाही का खेल खेला जा रहा है। क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक अलीगंज सेक्टर ११ स्थित एक आवासीय मकान के मालिक ने अपने मकान के ग्राउण्ड फ्लोर पर बिना एलडीए से अप्रूवल व नगर निगम की परमीशन के ही रेस्टोरेंट व स्वीट शॉप्स खोल रखी है। उनके पास न तो कोई परमीशन है न ही कोई अथारिटी लेटर। साफ है कि इसमें कहीं न कहीं संबंधित विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत शामिल है।

शोरूम व बैंक भी नहीं देखते मानक

शहर में मानचित्र के विपरीत बनने वाले शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में नामी गिरामी कम्पनी के प्रतिनिधि अपने शोरूम खोल रहे हैं। लगभग यही हाल प्रतिष्ठिïत बैंकों का है। नियमों के विरुद्घ बैंक भी किराए पर दिए जा रहे हैं।
पड़ोसियों की चुप्पी दे
रही बढ़ावा
राजधानी में मानचित्रों के विपरीत जहां-जहां बिल्डिंग बन रही है, उनके पड़ोसी भी विरोध नहीं कर पा रहे हैं। अगर कोई विरोध करता भी है तो उसकी सुनवाई नहीं होती। ऐसे में अवैध निर्माण का जाल फैलता जा रहा है।

अफसरों का तर्क, ऊपर से पड़ता है दबाव

एलडीए अफसर हो या विधिक कार्रवाई करने वाले अधिकारी, सभी यही कहते हैं कि अवैध बिल्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई न होने की वजह राजनैतिक और उच्चाधिकारियों का दबाव है। अवैध बिल्डिंगों के मामले में कभी ऊपर से राजनैतिक दबाव पड़ता है, तो कभी एलडीए के वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव पड़ता है। ऐसे में कार्रवाई करने से पहले ही सिफारिश के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

हमारी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। कहीं से भी अवैध निर्माण की सूचना प्राप्त होती है तो प्लानिंग के तहत कार्रवाई की जाती है। किन्तु अवैध निर्माण को जड़ से रोकने के लिए लोगों को भी जागरुक होना पड़ेगा।
-धनंजय शुक्ला
संयुक्त सचिव एवं नोडल अधिकारी

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