लखनऊ में है अगर घर तो नहीं मिलेगा सरकारी आवास

लखनऊ। यदि केजीएमयू के किसी भी डॉक्टर का राजधानी में घर है तो उसे केजीएमयू में सरकारी आवास मिलना आसान नहीं होगा। साथ ही यह भी शर्त है कि यदि फैकल्टी मेम्बर के घर के भी किसी सदस्य के नाम घर होता है तो भी सरकारी आवास मिलना मुश्किल होगा। इसके लिए केजीएमयू के वीसी की ओर से एक सर्कुलर जारी किया गया है।
फैकल्टी मेम्बरों को आवास के लिए आवेदन करते समय एक शपथपत्र (एफिडेविट) भरकर देना होगा। इसमें उन्हें इस बात का उल्लेख करना होगा कि उनके या फिर उनकी पत्नी और बच्चों के नाम से शहर में कोई मकान नहीं है। केजीएमयू प्रशासन आवेदन पत्रों की जांच करायेगा। जिनके भी आवेदन पत्र सही पाये जायेंगे। उन्हीं को केजीएमयू प्रशासन आवास देगा। इस सर्कुलर के जारी होने के बाद से केजीएमयू के फैकल्टी मेम्बरों के बीच हडक़ंप मच गया है। खासकर उनके बीच जो सरकारी आवास के लिए आवेदन करने की तैयारी में बैठे थे। कुछ फैकल्टी मेम्बरों ने सवाल उठाया है कि क्या जिन लोगों को पहले बिना शपथ पत्र प्रस्तुत किये सरकारी आवास आवंटित कर दिये गये थे। उन्हें भी शपथ पत्र देना होगा?

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