लखनऊ में रातों रात करोड़पति हो गये थानेदार से लेकर आईपीएस अफसर तक

राजधानी में दारोगा से लेकर एसएसपी तक ने खड़ी कर ली करोड़ों की बेनामी संपत्ति, चार्ज संभालते हो गए कुबेर, बनाए कई आलीशान आशियाने, कानून के शिकंजे से बचने के लिए दूसरे के नाम खरीदी संपत्ति

आमिर अब्बास
captureलखनऊ। राजधानी में थानेदार से लेकर आईपीएस अफसर तक रातों रात करोड़पति हो गए हैं। कई थानेदार कुबेर बन गए हैं। ये आलीशान कोठियों के मालिक हैं। महंगी कारें और ब्रांडेड वस्तुएं इनकी कोठियों की शोभा बढ़ा रही हैं। कई आला अधिकारी भी पीछे नहीं हैं। इन अधिकारियों ने भी नजाकत के इस शहर में आलीशान कोठियां खड़ी कर रखी हैं, जहां तमाम सुख-सुविधाएं हैं। कानून व्यवस्था के इन रखवालों ने खुद को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए ये संपत्तियां दूसरों के नाम कर रखी हैं।
सूत्रों के मुताबिक लखनऊ पश्चिम क्षेत्र में तैनात कई ऐसे थानेदार हैं, जिन्होंने चार्ज मिलने के कुछ समय बाद ही लखनऊ जैसे महंगे शहर में आलीशान कोठियां खड़ी कर ली हैं। सूत्रों के अनुसार पश्चिम क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण थाने की कमान संभाल रहे सरल स्वभाव और अधिकारियों से अच्छे तालमेल के लिए पहचाने जाने वाले थानेदार का राजाजीपुरम क्षेत्र में आलीशान मकान बन कर तैयार हो चुका है। मकराना के महंगे पत्थरों पर उकेरी गई नक्काशी इस मकान की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हंै। इस थानेदार का ये पहला मकान नहीं है। वह पारा इलाके में एक दूसरे आलीशान मकान के पहले से ही अघोषित मालिक हैं। इसके अलावा पश्चिम क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण कोतवाली में दूसरी बार अपनी पहुंच के बलबूते लंबे समय से तैनात एक थानाध्यक्ष ने इंदिरा नगर इलाके में एक बेहद खूबसूरत और आलीशान मकान बनवाया है। उस मकान की खूबसूरती ऐसी है कि राह चलते लोग भी उसे देखने के लिए रूक जाते हैं। जाहिर है इसको सजाने और संवारने में करोड़ों खर्च किए गए होंगे। शिया-सुन्नी विवाद के लिए संवेदनशील मानी जाने वाली इस कोतवाली में दूसरी बार थानाध्यक्ष बनने के लिए इन्होंने एड़ी चोटी का जोर लगाया था, क्योंकि जब इन्हें इस कोतवाली से हटाया गया था, तब इनका मकान अर्ध निर्मित था। दूसरी बार अपने ही एक रिश्तेदार को कुर्सी से हटा कर कोतवाली की कमान संभालने के बाद इस थानाध्यक्ष ने इंदिरा नगर में अपने मकान का निर्माण कार्य पूरा कराया। सूत्रों के अनुसार लखनऊ पश्चिम क्षेत्र में तैनात पुलिस के एक आला अफसर की आशियाना थाना क्षेत्र की वृन्दावन कालोनी में आलीशान कोठी बन कर तैयार हो चुकी है। लम्बे समय से पुराने लखनऊ में तैनात रह चुके इन अधिकारी महोदय ने क्षेत्र के तमाम बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों से वेशकीमती तोहफे लेकर अपनी इस कोठी की शोभा बढ़ाई है। वहीं, पुराने लखनऊ में लंबे समय तक क्षेत्राधिकारी के पद पर तैनात रह चुके पुलिस के एक अधिकारी ने महानगर क्षेत्र में अपना आलीशान मकान तैयार कर लिया है। इस मकान की खूबसूरती बढ़ाने के लिए पश्चिम क्षेत्र के ही एक थानेदार ने इन्हें बतौर तोहफा मकराना के एक ट्रक महंगे पत्थर दिए थे। ये चन्द थानेदारों की अकूत बेनामी सम्पत्ति बानगी भर है। लखनऊ में तैनात रह चुके कई आईपीएस अधिकारियों ने भी गोमती नगर विभूति खण्ड आशियाना आदि तमाम पाश इलाकों में अपने आलीशान मकान बनवाए हैं। सूत्र बताते हैं कि कागजों पर भले ही पुलिस के इन अधिकारियों और कर्मचारियों का होम डिस्टिक दूसरा जिला हो लेकिन लखनऊ में तैनाती पाने वाले तमाम अधिकारियों ने आलीशान मकान बनवा कर गैर कानूनी तरीके से होम डिस्टिक लखनऊ को ही बना लिया है। सूत्रों के अनुसार लखनऊ में 11 महीनों तक एसएसपी की कुर्सी पर विराजमान रहे एक आईपीएस अधिकारी का बाराबंकी में आलीशान होटल होने के अलावा लखनऊ के गोमती नगर में आलीशान मकान भी तैयार हो चुका है। नियम के अनुसार हर आईपीएस अधिकारी को हर वर्ष अपनी सम्पत्ति का विवरण सरकार को उपलब्ध कराना होता है। लेकिन अधिकारियों के विवरण मे ऐसी सम्पत्ति शामिल नही होती है। जिसे बेनामी तरीके से अर्जित किया गया हो। इसी तरह से ट्रान्स गोमती क्षेत्र मे तैनात रहे कुछ थानाध्यक्षों ने भी नवाबों के शहर लखनऊ में कदम रखने के बाद अपना आलीशान बंगला लखनऊ में ही तैयार कर लिया है । सूत्र बताते है कि ट्रान्स गोमती के महत्वपूर्ण थाने में तैनात रहे कुछ कद्दावर इंस्पेक्टरों ने करोड़ों की कमाई की और लखनऊ में ही बस गए हैं। सूत्रों के अनुसार पुलिस कर्मियों द्वारा निर्मित कराए गए सबसे ज्यादा मकान इंदिरा नगर के मानस विहार में है ं। लखनऊ में तय समय से ज्यादा समय तक तैनात रह चुके कई थानाध्यक्ष तो इतनी पहुंच वाले हैं जिन्होंने नियम और कानून को धता बताते हुए गैर जिले में हुए तबादले को कई बार निरस्त करा लिया और आज भी मनचाही जगह पर मलाईदार तैनाती की मलाई का आनन्द ले रहे है। इस तरह थानेदारों और अन्य अधिकारियों की करोड़ों की आलीशान कोठियों पर नजर डाली जाए या डीजीपी जावीद अहमद अगर सिर्फ लखनऊ शहर में पुलिस कर्मियों द्वारा बनाए गए मकानों की जांच करा ले तो स्थिति बिलकुल साफ हो जाएगी क्योंकि जितना वेतन इन पुलिस कर्मियों को सरकार से मिलता है उतने वेतन में घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरे खर्च तो आसानी से निकल सकते है, लेकिन करोड़ों की आलीशान कोठियां नहीं बन सकती हैं । वह भी राजधानी जैसे शहर में जहां एक ठीकठाक हैसियत रखने वाला इंसान भी मामूली सा प्लाट नहीं खरीद सकता है, तो इमानदारी की कमाई से इतने कीमती व आलीशान मकान कैसे तामीर हो गये।

जल्द होगी जांच- दलजीत सिंह चौधरी, एडीजी (एलओ)

इस मामले पर एडीजी (एलओ) दलजीत सिंह चौधरी ने जांच-पड़ताल कराने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि भ्रष्टïाचार की कमाई से आलीशान कोठियां तैयार कर रहे थानेदारों व अफसरों पर शिकंजा कसा जा सकता है। इस संबंध में जांच कर दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

एंटीकरप्शन ऑर्गनाइजेशन करता है जांच: पूर्व डीजीपी

राजधानी में थानेदारों व अन्य अधिकारियों द्वारा बनवाने गए वेशकीमती आशियानों के सम्बन्ध में पूर्व डीजीपी बृजलाल ने बताया कि यदि कोई विभागीय अधिकारी हैसियत से अधिक कीमत की कोठियां या मकान बनवाते हैं तो इसकी जांच एंटीकरप्शन ऑर्गनाइजेशन करता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर डायरेक्टर डीजी कार्रवाई करते हंै। उन्होंने कहा कि यदि थानेदारों व अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत की जाए तो इनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

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