लखनऊवासियों को नहीं रास आ रहा फ्लैट कल्चर

  • करोड़ों रुपये फंसे होने से बिगड़ रही विभागों की आर्थिक स्थिति

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में फ्लैट कल्चर अभी भी पूरी तरह से अपने पैर नही पसार पा रहा है। इसकी बानगी एलडीए व आवास विकास के खाली पड़े सैकड़ों फ्लैट हैं। नतीजतन इनके विज्ञापन हर छह माह में निकाले जा रहे हैं लेकिन इसके बाद भी बुकिंग का ग्राफ बढ़ नहीं रहा है। आवास-विकास की आरावली प्रीमियम फ्लैट, कामदगिरी एन्क्लेव सहित तमाम योजनाओं के फ्लैट दस हजार में ऑनलाइन बुकिंग की योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई। इससे स्पष्टï है कि आज भी एक बड़ा तबका ऐसा है जो जमीन खरीदकर मकान बनवाना ज्यादा पसंद करता है।
आवास विकास के वृंदावन योजना स्थित अरावली में, एवरेस्ट एन्क्लेव, गाजियाबाद की मंडोला बिहार योजना में सैकड़ों फ्लैट खाली पड़े हैं। इनका कोर्ई खरीदार नहीं मिल रहा है। इससे आवास-विकास का कई सौ करोड़ रुपए इन योजनाओं में फसा है। कुछ यही हाल एलडीए का है। एलडीए अभियंताओं की माने तो करोड़ों रुपये गोमतीनगर विस्तार, जानकीपुरम विस्तार, सीतापुर रोड स्थित प्रियदर्शनी, देवपुर पारा की समाजवादी लोहिया इन्क्लेव, रजनीखण्ड, शारदानगर में बनवाए गए अपार्टमेण्ट में फंसा हुआ है। इतनी धनराशि मिलने से एलडीए की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी, लेकिन यह डगर इतनी आसान नहीं लग रही है। एलडीए ने खाली पड़े फ्लैटों की पंजीकरण की सुविधा 31 जुलाई तक खोली गई वहीं आवास-विकास ने ऑनलाइन पंजीकरण असीमित समय के लिए खोला है। इसके बाद भी स्थिति बेहतर नहीं हो पाई है। आवास-विकास और एलडीए की योजनाओं में चार लाख से लेकर सत्तर से अस्सी लाख रुपये तक के फ्लैट मौजूद हैं।

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