लंदन से केजीएमयू रेफर किया गया मरीज

केजीएमयू ने बनाया अनूठा रिकार्ड, 105 साल के केजीएमयू में यह पहला केस

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू के 105 साल के इतिहास में शायद ये पहली बार हुआ है कि लंदन के हॉस्पिटल से एक मरीज को इलाज के लिए केजीएमयू रेफर किया गया। केजीएमयू के सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने बच्चे का आपेरशन करके उसे डिस्चार्ज कर दिया। बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। बच्चे को एस्ट्रोफी ब्लैडर नामक जन्मजात विकृति थी। केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉक्टर एसएन कुरील ने बच्चे का सफल आपरेशन किया और बाद में बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया।
मध्य प्रदेश के रहने वाले एक व्यवसायी के पुत्र अब्दुल (3 माह)को जन्म से ही एस्ट्रोफी ब्लैडर नामक जन्मजात विकृति थी। जिसमें उसक ी पेशाब की थैली बाहर थी और जननांग विकृत व पेशाब हरदम टपकता रहता था। इस समस्या के निजात दिलाने के लिए बच्चे के पिता ने अपने चाचा मंसूरी जोकि लंदन के विश्व प्रसिद्व अस्पताल ग्रेट आरमंड स्ट्रीट अस्पताल फार चिल्ड्रेन में शिशु रोग विशेषज्ञ हैं, से सम्पर्क किया। इसके साथ ही बच्चे के परिजनों ने मेदांता अस्पताल, नई दिल्ली, गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली, अपोलो अस्पताल नई दिल्ली तथा एम्स नई दिल्ली में विशेषज्ञों ने संपर्क किया तथा बच्चे को दिखाया लेकिन कहीं भी विश्ेाषज्ञों उपचार करने में असमर्थता जताई। उसके बाद जब बच्चे के चाचा ने रिकार्ड के साथ लंदन स्थित हॉस्पिटल के विश्व प्रसिद्व पीडियाट्रिक यूरोलॉजिस्ट डॉ. चेरियन व डॉ. मुश्ताक से संपर्क किया तो दोनों ने इस भयंकर विकृति का आपरेशन भारत में डॉ. कुरील से ही कराने की सलाह दी। इसी के साथ ओमान के एक डॉक्टर डॉ. अकबर जो बच्चे के चाचा हैं, उन्होंने विशेषज्ञों से सलाह कर केजीएमये के डॉ. कुरील से आपरेशन कराने की सलाह दी।
आखिर में परिजनों ने उसे 14 अगस्त को केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. एसएन कुरील की देखरेख में भर्ती हुआ। अंतर्राष्टï्रीय जर्नल में प्रकाशित डॉ. कुरील और उनकी टीम ने अपनी मौलिक तकनीकी का प्रयोग करते हुए 17 अगस्त को बच्चे का सात घंटे में सफल आपेरशन कर दिया। आज 7 सितंबर को बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया। बच्चे के आपरेशन में सुपरडीलक्स प्राइवेट वार्ड डेढ़ लाख रूपये से भी कम खर्चा आया है।

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