रोजगार का संकट

बेरोजगारी का आलम यह है कि इंजीनियरिंग से लेकर मेडिकल के छात्र तक बेरोजगार हैं। प्रति वर्ष लाखों की संख्या में छात्र सिविल सर्विसेज की तैयारी करते हैं और चयनित होते हैं कुछ हजार छात्र। उच्च शिक्षित युवा छोटी-छोटी नौकरी करने को मजबूर हैं।

sanjay sharma editor5वर्तमान में देश के समक्ष सबसे बड़ी कोई समस्या है तो वह है रोजगार की। इस समस्या से सिर्फ उत्तर प्रदेश सरकार ही नहीं बल्कि अन्य राज्य भी जूझ रहे हैं। पढ़े-लिखे युवाओं की लंबी फौज है और उस हिसाब से रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। हालांकि प्रदेश सरकार से लेकर केन्द्र सरकार तक यह दावा करती आ रही है कि रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं लेकिन बेरोजगारों की संख्या इतनी ज्यादा है कि उस हिसाब से यह अवसर नगण्य मालूम होता है। कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी की रिक्तियां निकली थीं, तो लगभग 23 लाख युवाओं ने आवेदन किया था। और सबसे दुखद पहलू यह था कि आवेदन करने वालों में पीएचडी धारक और इंजीनियरिंग के छात्र भी शामिल थे। इतनी भारी संख्या में आवेदन को देखते हुए सरकार ने इसे रद्द कर दिया था। ऐसी ही स्थिति एक बार फिर देखने को मिली है। उत्तर प्रदेश में जिलेवार संविदा पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस कतार में पीएचडी और प्रोफेशनल डिग्रीधारियों ने आवेदन किया है। जबकि इस पद के लिए अधिकतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास ही है। जिस तरह से उच्च शिक्षित लोगों ने सफाईकर्मी पद के लिए आवेदन किया है उससे साफ दिखता है कि प्रदेश में किस कदर बेरोजगारी है।
वैसे भी हमारे समाज में सुरक्षा की दृष्टिï से युवा वर्ग सरकारी नौकरी को ज्यादा महत्व देते हैं। इसीलिए जब भी सरकारी रिक्तियां निकलती हैं, तो युवा वर्ग टूट पड़ता है। प्रदेश में सरकारी नौकरी का आलम यह है कि वैकेंसी तो निकल जाती है, लेकिन अधिकांश वैकेंसी कोर्ट या पेपर आउट होने की वजह से लटक जाती हैं। पिछले पांच वर्षों में सरकारी वैकेंसी पर नजर डालें तो अधिकांश कोर्ट केस और पेपर आउट होने की वजह से बीच में ही अटक गईं। नियुक्ति होना तो दूर, दोबारा वैकेंसी भी नहीं निकली। बेरोजगारी का आलम यह है कि इंजीनियरिंग से लेकर मेडिकल के छात्र तक बेरोजगार हैं। प्रति वर्ष लाखों की संख्या में छात्र सिविल सर्विसेज की तैयारी करते हैं और चयनित होते हैं कुछ हजार छात्र। उच्च शिक्षित युवा छोटी-छोटी नौकरी करने को मजबूर हैं। यह अजीब विडंबना है कि प्रदेश में दिन-प्रतिदिन इंजीनियरिंग कॉलेजों से लेकर बीएड तक के कॉलेज खुल रहे हैं और हर साल लाखों की संख्या में बेरोजगारों की फौज तैयार हो रही है। उस हिसाब से रोजगार के विकल्प नहीं तलाशे जा रहे हैं। सरकार को प्रोफेशनल कोर्स संचालित करने के साथ रोजगार के भी अवसर तलाशने की जरूरत है।

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