रेल यात्रियों की सुरक्षा और उपकर की तैयारी

सवाल यह है कि अचानक रेल मंत्रालय को नया उपकर वसूलने की क्यों सूझी? क्या यात्रियों से टिकट के अलावा सुरक्षा के लिए अलग से उपकर लेना उचित है? क्या किसी यात्री की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी रेलवे और सरकार की नहीं है? प्रतिदिन करोड़ों की कमाई करने वाले रेल मंत्रालय की हालत क्या वाकई खस्ता हो चुकी है?

sajnaysharmaनोटबंदी से परेशान जनता को मोदी सरकार एक और झटका देने जा रही है। रेल मंत्रालय जल्द यात्रियों से सुरक्षा उपकर वसूलेगी। नए कर की वसूली के पीछे मंत्रालय रेल यात्रियों के सुरक्षा की दलील दे रहा है। मंत्रालय का कहना है कि ट्रेनों के ट्रैकों को बेहतर करने और सिग्नल सिस्टम को मजबूत करने के लिए आवश्यक फंड नहीं है। वित्त मंत्रालय ने भी रेलवे को वित्तीय सहायता देने से साफ इंकार कर दिया है। लिहाजा रेल मंत्रालय के पास यात्रियों से कर वसूलने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। सवाल यह है कि अचानक रेल मंत्रालय को नया उपकर वसूलने की क्यों सूझी? क्या यात्रियों से टिकट के अलावा सुरक्षा के लिए अलग से उपकर लेना उचित है? क्या किसी यात्री की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी रेलवे और सरकार की नहीं है? प्रतिदिन करोड़ों की कमाई करने वाले रेल मंत्रालय की हालत क्या वाकई खस्ता हो चुकी है? दरअसल, लगातार बड़ी रेल दुर्घटनाओं ने मंत्रालय को परेशान कर दिया है। इन दुर्घटनाओं में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं। तमाम कवायदों के बाद भी रेल दुर्घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले दिनों ही कानपुर के पुखरायां में टै्रक में आई खराबी के कारण इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें आधिकारिक रूप से करीब 150 से अधिक लोग मारे गए थे। इस दुर्घटना के बाद ट्रेनों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठने लगे थे। लिहाजा रेल मंत्रालय ने इसकी सुरक्षा मजबूत करने पर विचार किया है। इसके लिए जरूरी कदम उठाने के लिए संसाधन जुटाने की मुहिम शुरू की गई। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वित्त मंत्रालय से रेलवे के विशेष सुरक्षा कोष का प्रस्ताव दिया। इस कोष के गठन के लिए रेल मंत्रालय ने करीब 1,19,183 करोड़ आवंटित करने की मांग की। लेकिन वित्त मंत्रालय इस धनराशि का केवल 25 फीसदी फंड देने पर राजी है। वित्त मंत्रालय ने रेल मंत्रालय से साफ तौर पर कह दिया है कि वह किराया बढ़ाकर संसाधन जुटाए। जाहिर है रेलवे के पास सुरक्षा उपकर वसूलने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। योजना के अनुसार स्लीपर, सेकेंड क्लास और एसी3 के लिए सेस अधिक होगा, वहीं एसी-2 और एसी-1 के लिए यह मामूली होगा। हालांकि रेल किराये में बढ़ोतरी पर अभी अंतिम फैसला किया जाना है। ऐसा नहीं है कि रेलवे के पास केवल किराया बढ़ाना ही अंतिम विकल्प है। रेलवे की तमाम परिसंपत्तियां हंै, जो बिना इस्तेमाल के बेकार पड़ी हैं। यदि मंत्रालय इनका इस्तेमाल करे तो उसे करोड़ों रुपए का लाभ हो सकता है। लेकिन मंत्रालय को हमेशा किराया बढ़ाने का सबसे सरल रास्ता ही सूझता है। यह स्थिति ठीक नहीं कहीं जा सकती। टिकट के साथ ही यात्री के सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की हो जाती है लिहाजा इसके लिए अलग से कर वसूलने को उचित नहीं कहा जा सकता है।

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