रेलवे पर ’प्रभु’ का असर

सुरेश प्रभु रेलवे की यात्रा और सुविधाओं को हाईटेक बनाने की कोशिश में भी जुटे हैं। रेलवे स्टेशनों पर प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी से वाई-फाई की सुविधा हो या ट्विटर और सोशल साइट्स के माध्यम से लोगों की समस्याओं की जानकारी और उनका समाधान, सबका प्रयास कर रहे हैं।

sanjay sharma editor5रेलमंत्री सुरेश प्रभु लगातार स्टेशनों के विकास, ट्रेनों में सुविधाएं बढ़ाने, यात्रियों की सुरक्षा और साफ-सफाई के क्षेत्र में सुधार के प्रयास कर रहे हैं। इनका असर रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में नजर आने लगा है लेकिन ट्रेन के जनरल डिब्बों में यात्रियों को बैठने की पर्याप्त जगह दिलवा पाना और यात्रियों की सुरक्षा गंभीर मामला है, जिसकी व्यवस्था करना बड़ी चुनौती है।
रेलमंत्री स्टेशनों के विकास में राज्य सरकारों से सहयोग की अपील कर चुके हैं। उन्होंने हावड़ा स्टेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि हम राज्यों के साथ एक संयुक्त उद्यम चाहते हैं। मैं राज्य सरकारों से अनुरोध कर रहा हूं कि वे स्टेशनों को अत्याधुनिक बनाने और जर्जर स्टेशनों को विकसित करने के लिए रेलवे के साथ हाथ मिलायें। उनकी बातों में रेलवे में सुधार को लेकर छटपटाहट साफ नजर आ रही है। वह रेलवे में सुधार को लेकर सक्रिय भी हैं। इसी वजह से जनरल कोच में यात्रा करने वालों की समस्याओं को बारीकी से समझने के लिए जनरल बोगी से यात्रा भी कर चुके हैं। जिस वक्त उन्होंने जनरल कोच में यात्रा की अपने बगल में खड़े व्यक्ति से पूछा था कि आपका रेल मंत्री कैसा काम कर रहा है, तो उस व्यक्ति ने संतोषनजक उत्तर दिया था। लेकिन ट्रेनों में जनरल कोच बढ़ाने पर व्यापक स्तर पर काम करने की सलाह दी थी। सुरेश प्रभु रेलवे की यात्रा और सुविधाओं को हाईटेक बनाने की कोशिश में भी जुटे हैं। रेलवे स्टेशनों पर प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी से वाई-फाई की सुविधा हो या ट्विटर और सोशल साइट्स के माध्यम से लोगों की समस्याओं की जानकारी और उनका समाधान, सबका प्रयास कर रहे हैं। टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग और मोबाइल के माध्यम से टिकटों की बुकिंग और एसएमएस सेवा का लाभ शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी उठा रहे हैं। रेलवे स्टेशनों और ट्रनों की सफाई व्यवस्था को लेकर निजी कंपनियों की सहभागिता का असर साफ दिखने लगा है। हाल ही में मेरे एक साथी ने ट्रेन से यात्रा के अनुभवों को शेयर किया, जिसमें ट्रेनों में ठेके पर सफाई कर्मियों की तैनाती के फार्मूले को कारगर बताया। दरअसल निजी कंपनी के कर्मचारी स्लीपर और एसी कोच में अवैध रूप से चढऩे वाले लोगों को टोकने और ट्रेनों में कचरा फैलाने वालों को भी टोकते हैं। इतना ही नहीं समय-समय पर बाथरूम की सफाई व्यवस्था भी देखते रहते हैं।
फिलहाल सुरेश प्रभु को ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा, रेल दुर्घटनाओं पर नियंत्रण, खान-पान की व्यवस्था में सुधार और साफ-सफाई की दिशा में अभी और काम करना होगा। ट्रेनों से यात्रा करने वाले अमीरों के साथ ही गरीब यात्रियों के बारे में भी सोचना होगा। रेलवे को टिकट का पूरा-पूरा भुगतान करने वाले और सामान्य श्रेणी से यात्रा करने वाले लोगों को जनरल बोगी में कम से कम बैठने की पर्याप्त जगह दिलवाने का प्रबंध तो करना ही होगा।

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