रेफर-रेफर के खेल में तड़पता रहा मरीज

  • डायलिसिस के लिए एक से दूसरे अस्पताल भेजते रहे डॉक्टर
  • चिकित्सकों की कारगुजारी से परिजन हताश होकर लौटे

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश सरकार की लाख कोशिश के बावजूद राजधानी के सरकारी चिकित्सकों की मनमानी जारी है। मरीज की जिंदगी से इनका कोई लेना-देना नहीं हैं। यहां के अस्पतालों में मरीज के साथ रेफर-रेफर का खेल खेला जा रहा है। ऐसा ही एक मामला लोहिया अस्पताल में शुक्रवार को दिखा।
ताजा मामला लोहिया अस्पताल से रेफर एक मरीज का है, जिसको लोहिया के चिकित्सक ने अर्जेंट डायलिसिस की बात पर्चे पर लिखकर केजीएमयू रेफर कर दिया गया। वहीं, केजीएमयू के चिकित्सकों ने मरीज को पीजीआई रेफर कर दिया। इस तरह रेफर-रेफर का खेल होता रहा और मरीज तड़पता रहा। गोमती नगर स्थित विनय खंड निवासी लक्ष्मी नारायण पाण्डेय 67 की तबीयत बिगडऩे पर परिजन उसे लेकर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। वहां मौजूद चिकित्सक ने मरीज को देखने के बाद अर्जेंट डायलिसिस की बात कहकर केजीएमयू रेफर कर दिया। इमरजेंसी के चिकित्सक का कहना था कि यहां अर्जेंट डायलिसिस नहीं होती है। परिजन मरीज को लेकर केजीएमयू पहुंचे। वहां मौजूद चिकित्सकों ने कहा कि मरीज को अर्जेंट डायलिसिस की जरूरत है। यहां दो बजे के बाद डायलिसिस नहीं की जाती है। इन्हें पीजीआई ले जाओ। यहां से भी मरीज को रेफर कर दिया गया। परिजन थक हार कर मरीज को लेकर निजी संस्थान चले गये। जब इस बाबत ट्रामा सेन्टर इंचार्ज डॉ. हैदर अब्बास से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि लोहिया अस्पताल के बगल में स्थित लोहिया संस्थान भेजना चाहिए, केजीएमयू क्यों भेज दिया। अर्जेंट डायलिसिस का कोई मतलब नहीं है। डायलिसिस कोई सिटी स्कैन थोड़ी है,जब चाहे तब करा लो। गौरतलब है कि अर्जेंट डायलिसिस के मरीज की राजधानी में पीजीआई को छोडक़र कहीं डायलिसिस नहीं हो रही है। इसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है। चिकित्सकों के मुताबिक यदि अर्जेंट डायलिसिस की नौबत है तो तत्काल ऐसा करना चाहिए वरना मरीज की जान को खतरा हो सकता है।

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