रिटायर्ड ढ्ढ्रस् ने इंदिरा भवन में चलाई गोली, लोगों ने जमकर पीटा, पहले गधे को भी मार चुके हैं गोली

इंदिरा भवन में गोली चलने से हडक़ंपभारी पुलिस बल मौके पर तैनात

4पीएम न्यूn1ज़ नेटवर्क
लखनऊ। इंदिरा भवन के दूसरे फ्लोर पर आज उस समय हडक़ंप मच गया जब वहां अचानक गोली चल गई। तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी गई। कुछ मिनटों में भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पता चला कि यह गोली स्टेट पब्लिक सर्विस ट्रिबयूनल के सदस्य रिटायर्ड आईएएस टीपी पाठक ने अपने निजी सचिव राजीव गोयल पर चलाई जिसमें वह बाल-बाल बच गए। खबर लिखे जाने तक थाना हजरतगंज में टीपी पाठक से पूछताछ चल रही है।
बताया जाता है कि श्री पाठक की आज सुबह अपने निजी सचिव राजीव गोयल से कुछ गर्मागर्मी हुई जिसके बाद श्री पाठक ने अपने लाइसेंसी बंदूक से गोयल पर गोली चला दी। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने पाठक की रिवाल्वर छीन ली और उनकी जमकर पिटाई की। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह उनको लोगों के गुस्से से बचाया।
टीपी पाठक गोरखपुर और वाराणसी के विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वह आजमगढ़, श्रावस्ती, महोबा, उन्नाव तथा रायबरेली के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं। वह आईसीडीएस के निदेशक रहे हैं और बस्ती तथा झांसी के कमिश्नर के अलावा पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव भी रह चुके हैं। श्री पाठक पहले भी खासे विवादों में रहे हैं। अपनी भतीजी से कैलाश छात्रावास में मिलने जा रहे थे। रोके
जाने पर उन्होंने वहां जमकर बवाल किया। इससे पहले वह सुर्खियों में तब आए थे, जब उनके घर में एक गधा घुस आया था और श्री पाठक ने उसको गोली मार दी थी। यह खबर पूरी नौकरशाही में चर्चा का विषय बन गई
थी। श्री पाठक इसके अलावा कई अन्य विवादों में भी रहे हैं।

टूट गया जनता परिवार

बिहार चुनाव अपने दम पर लड़ेगी समाजवादी पार्टी

भाजपा को मिली बड़ी राहत

हर बार बनकर टूट जाता है तीसरा और चौथा मोर्चा

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए यह बहुत बड़ी राहत की खबर है। बिहार चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपना रास्ता अलग कर लिया है। समाजवादी पार्टी बिहार में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। बिहार में सीटों के बंटवारे से समाजवादी पार्टी खुद को अपमानित महसूस कर रही थी। आज लखनऊ में सपा ने एलान कर दिया कि बिहार में पूरी ताकत से सपा चुनाव लड़ेगी। 

सपा के संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यालय पर पत्रकारों से बात करते हुए सपा महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि बिहार में जितनी सीटें सपा को दी जा रही थीं। सपा उससे कहीं ज्यादा सीटें जीतकर दिखाएगी। उन्होंने कहा कि सीटों के बंटवारे से पहले समाजवादी पार्टी से बात की जानी चाहिए थी।
प्रो. यादव ने कहा कि जनता परिवार आज तक कहां एक हो पाया है। उन्होंने कहा कि जिस समय इस गठबंधन की बात हो रही थी, मैंने उसी समय कह दिया था कि मैं पार्टी के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि बिहार के प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र यादव मेरे साथ आए हैं और यह जल्दी ही बिहार के सभी प्रत्याशियों की सूची जारी कर देंगे।
प्रो. यादव ने कहा कि दु:ख की बात यह है कि गठबंधन की बात करने वाले लोग सपा को भूल गए। हमको टिकट बंटवारे की सूचना टीवी चैनलों से मिली। उन्होंने कहा कि बिहार में समाजवादी पार्टी की स्थिति बहुत मजबूत है। समाजवादी पार्टी के इस रुख से बिहार में लालू यादव और नीतिश कुमार को कड़ा झटका लगा है। लालू यादव की पुत्री से मुलायम सिंह यादव के पौत्र तेज प्रताप सिंह से विवाह के बाद यह माना जा रहा था कि यह गठबंधन मजबूत स्थित में एक होकर बिहार का चुनाव लड़ेगा। इन सभी नेताओं ने एकजुट होकर बैठक की थी और एक साथ रहने की कसमें खाई थीं। मगर सीट बंटवारे को लेकर यह कसम हवा में उड़ गई। आज जिस तरह से समाजवादी पार्टी ने इस गठबंधन से अपना पल्ला झाड़ा उससे साफ हो गया कि बिहार चुनाव में लालू और नीतिश को खासा नुकसान हो सकता है।
हालांकि बिहार में पिछले विधान सभा चुनाव में समाजवार्दी पार्टी कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सकी है। समाजवादी पार्टी पिछले चुनाव में 146 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और सभी सीटें हार गई थी। उसको 160848 वोट मिले थे जो .55 प्रतिशत थे।
कहीं यादव सिंह का दबाव तो नही

यह सिर्फ संयोग है या फिर राजनैतिक दबाव। यादव सिंह के घर पड़े छापे और फिर सीबीआई जांच के बाद समाजवादी पार्टी के सुर बदल गए हैं। आज रामगोपाल यादव से भी जब पूछा गया कि क्या यादव सिंह की जांच को लेकर उन पर कोई दबाव था, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई दबाव उनके ऊपर नहीं है। यादव सिंह किनका आदमी था यह सब जानते हैं। रामगोपाल यादव भले ही सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार न करें कि उनके ऊपर किसी प्रकार का कोई दबाव है। लेकिन हकीकत यह है कि यादव सिंह और प्रो. रामगोपाल यादव के रिश्तों को लेकर राजनैतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सभी जानते हैं कि मुख्यमंत्री यादव सिंह को पसंद नहीं करते थे। यहीं नहीं वह नोएडा के सीईओ रमारमण को हटाना भी चाहते थे। मगर यह दोनों लोग रामगोपाल यादव की पसंद के लोग थे। सीबीआई जांच के बाद अब सपा के कुछ नेताओं की धडक़ने तेज हो गई हैं।

‘गठबंधन टूटना दुर्भाग्यपूर्ण’

राष्टï्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा है कि समाजवादी पार्टी का जनता दल से अलग होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि जनता दल का गठन सांप्रादायिक ताकतों से मुकाबला करने के लिए हुआ था। उन्होंने कहा कि बेहतर हो सभी सेक्युलर दल एक साथ मिलकर इन ताकतों का मुकाबला करें क्योंकि यह ताकते समाज को तोडऩे की साजिश रn1च रही हैं। श्री सिंह ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि समाजवादी पार्टी अपने फैसले पर पुनर्विचार जरूर करेगी, क्योंकि बिहार के चुनाव पर पूरे देश की निगाह लगी हुई है। अगर बिहार में सेक्युलर ताकतों के वोटो का बंटवारा होगा तो इसका सीधा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो इस देश को तोडऩे की कोशिश में जुटे हुए हैं।

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