राष्ट्र प्रेम और विकास का एजंडा

देश में हर आधे घंटे में एक किसान आत्म हत्या करता है। रोजगार के मोर्चे पर हमारे पास बढ़ती बेरोजगारी है। महंगाई बढ़ती जा रही है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजिक क्षेत्र के कई बड़े मुद्दे हैं। लेकिन सरकार का सबसे ज्यादा ध्यान राष्ट्रवाद पर है। हैदराबाद विवि में रोहित की आत्महत्या तथा जेएनयू में कन्हैया की गिरफ्तारी में सरकारी लापरवाही ही देश के अहम मसलों में शुमार है।

sanjay sharma editor5अच्छे दिनों के वादे के बावजूद केंद्र की भाजपा सरकार अब राष्ट्रप्रेम का पाठ पढ़ा रही है। हाल यह है कि देश में औद्योगिक उत्पादन सिकुड़ता जा रहा है। निर्यात में लगातार 14 महीने से गिरावट जारी है। यह 13 फीसद से नीचे जा चुकी है। डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत 70 रुपये हो गई है। ऐसे में हमारे पास बस एक ही उपाय है हम राष्ट्र प्रेम का पाठ पढ़ें। भाजपा सरकार जिस विकास रथ पर सवार होकर आई थी, उसे भूलकर तमाम गैरजरूरी मुद्दे गढ़ती दिख रही है।
देश में हर आधे घंटे में एक किसान आत्म हत्या करता है। रोजगार के मोर्चे पर हमारे पास बढ़ती बेरोजगारी है। महंगाई बढ़ती जा रही है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजिक क्षेत्र के कई बड़े मुद्दे हैं। लेकिन सरकार का सबसे ज्यादा ध्यान राष्ट्रवाद पर है। हैदराबाद विवि में रोहित की आत्महत्या तथा जेएनयू में कन्हैया की गिरफ्तारी में सरकारी लापरवाही ही देश के अहम मसलों में शुमार है। जेएनयू घटना में जहां राष्ट्रविरोधी नारे लगानेवालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जरूरत थी। पूरे विश्वविद्यालय तथा छात्र समुदाय को केवल इस वजह से कलंकित करने की जरूरत नहीं थी। फिर भी सरकार इसमें राष्ट्रवाद का मुद्दा डाल राजनीति में जुटी रही। राष्ट्रवाद की अति से निरंकुश तत्वों को मनमानी की छूट मिलेगी। कोर्ट परिसर में कन्हैया, पत्रकारों तथा शिक्षकों की पुलिस की मौजूदगी में पिटाई राजनीतिक-रंजिश राष्ट्रवाद का ही फल है, जो अभिव्यक्ति और मतभेद की आजादी में यकीन करनेवालों को सचेत करने के लिए काफी है।
भारत में राष्ट्रवाद की एक सकारात्मक सोच है। इसे नये सिरे से गढऩे की भाजपा सरकार की कोशिश को सही नहीं ठहराया जा सकता। सरकार की यह प्रवृत्ति किसी भी तरह सार्थक नहीं दिखाई देती। भारतीयों का अपार बहुमत राष्ट्रवादी है। यहां सभी धर्मों, संप्रदायों के लिए पूरी छूट है। भारतीय दर्शन और परंपरा वसुधैव कटुम्बकम की रही है। ऐसे में आए दिन इस तरह की घटनाएं समाजिक परिवेश को जहरीला बनाती दिखती हैं।
हमारे संविधान में सभी को अभिव्यक्ति की पूरी आजादी है। देश के सामने तमाम चुनौतियां हैं। मोदी सरकार विकास के नाम पर आई थी। बेहतर होगा कि मोदी एक विकास का नया एजंडा बनाएं जो दूसरी पार्टियों के लिए नजीर साबित हो। छोटे मामलों में सरकार खुद को उलझाकर अपने विकास के एजंडे से भटक जाएगी।

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