राशन देने में कोटेदार कर रहे मनमानी

  • पुराने राशन कार्ड पर राशन देने से कर रहे हैं इनकार
  • 31 मार्च तक है पुराने राशन कार्ड की समय सीमा
  • बाजार में राशन की हो रही है कालाबाजारी
  • राशन नहीं मिलने से परेशान हैं उपभोक्ता
  • इंट्री के नाम पर विभाग में हो रही लापरवाही

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने और पात्र लोगों के नए राशन कार्ड बनाने की आड़ में कोटेदार अपनी मनमानी पर आमादा है। राशन की दुकानों पर पुराना राशन कार्ड लेकर पहुंचने वालों को वापस लौटाया जा रहा है। राशन और चीनी के लिए नया राशन कार्ड होने को जरूरी बताया जा रहा है। इसकी आड़ में बड़े स्तर पर राशन की कालाबाजारी भी हो रही है। प्रदेश सरकार की तरफ से जारी शासनादेश में पुराने राशन कार्डों की वैधता 31 मार्च तक है। इसके बावजूद कोटेदार लोगों को राशन देने से मना कर रहे हैं।
जिले में कुल आठ लाख 63 हजार 597 कार्ड धारक हैं। इसमें एपीएल कार्ड की संख्या सात लाख 37 हजार 768, बीपीएल कार्ड धारक की संख्या 75 हजार 730 और अंत्योदय कार्ड धारकों की संख्या 50 हजार 99 है। आपूर्ति विभाग की तरफ से अब तक सिर्फ सात लाख कार्ड धारकों को डिजिटल राशन कार्ड बनाकर दिया गया है। इसके अलावा करीब एक लाख 63 हजार कार्डधारकों को डिजिटल राशन कार्ड मिलने का इंतजार है। शासन से मिले निर्देशों के मुताबिक जिन कार्ड धारकों ने डिजिटल राशन कार्ड के लिए आवेदन भरकर जमा किया है, उनके कार्ड में मौजूद विवरणों का सत्यापन और उसको ऑन लाइन फीड करवाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन कार्ड धारकों को सरकार की तरफ से निर्धारित कार्ड की कैटेगरी के अनुसार मिलने वाली सभी सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा जिन्होंने फार्म भरकर जमा नहीं किया है, लेकिन उनके पास पुराना राशन कार्ड है, वह राशन, चीनी और मिट्टी का तेल ले सकते हैं। इसके बावजूद जिले के नगरीय क्षेत्रों के कई वार्डों में कोटेदार पुराने राशन कार्ड को अवैध बता रहे हैं। कोटेदार पुराने राशन कार्ड वाले लोगों को वापस लौटा रहे हैं। इस तरह की अनेकों शिकायतें आपूर्ति विभाग के पास भी पहुंची हैं। इन मामलों में जिला पूर्ति अधिकारी ने सभी कोटेदारों को शासनादेश के अनुसार 31 मार्च तक पुराने राशन कार्ड को वैध मानते हुए राशन, चीनी और मिट्टी का तेल देने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद कोटेदार सरकारी फरमान को ताक पर रख दिए हैं।
जिले में ऐसे हजारों कार्ड धारक है, जिनको हर महीने कोटेदार पुराने राशन कार्ड अवैध होने की बात कहकर वापस लौटा देता है। इन लोगों को यह भी मालूम नहीं होता कि अपनी शिकायत लेकर किसके पास जायें। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि ऐसे कार्ड धारकों का कार्ड बनवाने से लेकर राशन बांटने तक में कोटेदार की अहम भूमिका होती है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने और पात्र व्यक्तियों को नये राशन कार्ड मिलने का झांसा देकर लोगों को लौटा दिया जाता है। इस मामले को गंभीरता से लेकर आपूर्ति विभाग ने पुराने राशन कार्डों को 31 मार्च तक वैध माने जाने का कड़ा निर्देश जारी किया है लेकिन कोटेदारों की मनमानी के आगे सब बेकार है।

जिले में पुराने राशन कार्डों की वैधता 31 मार्च तक है। इसमें शासन की तरफ से नया निर्देश मिलने के बाद ही कोई परिवर्तन किया जायेगा। यदि किसी भी कार्ड धारक को कोटेदार पुराने राशन कार्ड अवैध होने की बात कहकर लौटा रहा है, तो वह कोटेदार के खिलाफ आपूर्ति विभाग कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर तत्काल कार्रवाई की जायेगी।
-चन्द्र शेखर ओझा
जिला पूर्ति अधिकारी

जियामऊ मोहल्ले की एपीएल कार्ड धारक उर्मिला देवी पत्नी संतलाल की तरफ से भी आपूर्ति विभाग में शिकायत की गई है। उर्मिला के मुताबिक वार्ड नंबर 57 में कोटेदार कमलेश कुमारी यादव और दुकान पर काम करने वाले लोगों ने पुराने राशन कार्ड पर राशन देना बंद कर दिया है। करीब तीन महीने से उनको राशन और चीनी नहीं मिल रहा है। उन्होंने अपना नया राशन कार्ड बनवाने के लिए फार्म भरकर कोटेदार के पास जमा किया था, लेकिन उसने फार्म फीड करवाने की बजाए गुम कर दिया। ऐसे में वह दोबारा आवेदन पत्र भरकर आपूर्ति कार्यालय में ऑनलाइन फीड करवाने ले गईं। लेकिन क्षेत्राधिकारी कार्यालय हजरतगंज में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के काम में व्यस्तता के कारण फार्मों की ऑफ लाइन फीडिंग करने से मना कर दिया गया। इसके साथ ही ऑनलाइन फार्म भरने की सलाह देकर उनको वापस भेज दिया। ऐसे में उनका राशन कार्ड नमूना बनकर रह गया है। जबकि कोटेदारों को हर महीने कार्डधारकों की संख्या के अनुसार ही राशन, चीनी और मिट्टी के तेल मिलता रहता है। जिन कार्ड धारकों को राशन दिये बिना वापस लौटा दिया जाता है, उनके हिस्से का राशन, चीनी और मिट्टी का तेल बाजार में बेच दिया जाता है।

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