राशन की कालाबाजारी करने वाले को नहीं मिली जमानत

  • कोर्ट ने खारिज की आरोपित की अर्जी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मोहनलालगंज ब्लाक में कोटेदार दिलीप कुमार के लिए राशन की कालाबाजारी करना महंगा साबित हुआ। जस्टिस नीलकंठ सहाय की कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बीपीएल कार्ड धारकों के हिस्से का राशन गलत ढंग से बेचने के मामले को गंभीरता से लेकर उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। इस फैसले से राशन की कालाबाजारी करने वालों में भय का माहौल पैदा हो गया है।
सरकारी वकील अरुण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की तरफ से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सस्ते दर पर राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। जबकि कोटेदार दिलीप कुमार ने कमजोर तबके के राशन को बेच दिया। 18 अगस्त 2006 को मोहनलालगंज के वरिष्ठ पूर्ति निरीक्षक ने कोटेदार दिलीप की दुकान का निरीक्षण किया था। इस दौरान 14 क्विंटल गेहूं और 18 क्विंटल चावल बाजार में बेचने के लिए ले जाते पकड़ा गया था। दुकान का रजिस्टर चेक करने पर अनाज एवं तेल आदि भी स्टॉक से ज्यादा मिला था। इसलिए 19 अगस्त 2006 को वरिष्ठ पूर्ति अधिकारी ने नगराम थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। विवेचना के दौरान अनाज की कालाबाजारी में कोटेदार दिलीप के साथ ही उसके भाई संदीप के भी शामिल होने की बात सामने आई। 23 मार्च 2007 को पुलिस ने दोनों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। जिसकी सुनवाई के दौरान जज ने राशन चोरी को गंभीर आरोप मानते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया।
राजधानी में राशन की कालाबाजारी का धंधा बहुत ही व्यापक रूप से चुका है। इसी वजह से प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद कोटेदार तय समय पर राशन वितरण करने में हीलाहवाली कर रहे हैं। इस कारण हर महीने हजारों गरीबों को राशन नहीं मिल पाता। ऐसे में राशन गोदामों के कर्मचारियों की मिली भगत से बाजार में अच्छी कीमत लेकर राशन बेच दिया जाता है। जो कोटेदारों की काली कमाई का माध्यम बना हुआ है।

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