राशन कार्ड में संशोधन करवाने के लिए भरने होंगे दो तरह के फार्म

एक फार्म में नाम संबंधी त्रुटियों और दूसरे में यूनिट का विवरण देकर करवा सकते हैं संशोधन
जिले में 1 मार्च से खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्ड धारकों को बांटा जाना है खाद्यान्न

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिले में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लोगों को राशन बांटने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। शासन की मंशा के अनुसार चयनित लाभार्थियों के नये राशन कार्ड बनाये जा रहे हैं लेकिन जिन लोगों के पास नया और पुराना कोई भी राशन कार्ड नहीं हैं, वे असमंजस की स्थिति में हैं। इसकी वजह आपूर्ति विभाग की तरफ से राशन कार्ड बनवाने और उसमें मौजूद त्रुटियों का संशोधन करवाने को लेकर बार-बार फार्म भरवाना है। इसलिए लोग फार्म भरने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जो आपूर्ति विभाग के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है।
राजधानी में कार्डधारकों की कुल संख्या 8 लाख 63 हजार 393 है। इसमें बीपीएल कार्ड धारकों की संख्या 75 हजार 753, एपीएल कार्ड धारकों की संख्या 7 लाख 37 हजार 685 और अंत्योदय कार्ड धारकों की संख्या 49 हजार 955 है। इसके अलावा जिला आपूर्ति कार्यालय में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आनलाइन आवेदन पत्र भरने वालों का डाटा अपडेट करने और नया राशन कार्ड बनाने का काम चल रहा है। जबकि कार्डधारकों और कोटेदारों के मुताबिक जिले में 20 प्रतिशत लोगों के पास अपडेटेड राशन कार्ड नहीं है। जिन लोगों के पास राशन कार्ड हैं, उनकी तरफ से राशन कार्ड में अनेकों त्रुटियां होने की शिकायतें की जा रही हैं। इनका निस्तारण आपूर्ति विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इस कारण 28 फरवरी तक सभी लाभार्थियों को राशन कार्ड उपलब्ध करवा पाना मुश्किल लग रहा है।

बोझिल साबित हो रही राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया
जिले में कार्ड धारकों को डिजिटल राशन कार्ड बनाकर देने की कवायद करीब ढ़ाई साल पहले शुरू की गई थी। इसमें अनेकों पेंच होने की वजह से चार बार आवेदन पत्र भरने और उसको आपूर्ति विभाग कार्यालय में जमा करवाने और डाटा आनलाइन फीड करवाने के बाद भी डिजिटल राशन कार्ड नहीं मिले। इसी बीच खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करने की घोषणा कर दी गई और सूबे में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई। शासन स्तर से अंत्योदय और बीपीएल कार्ड धारकों को नया राशन कार्ड जारी करने का निर्देश दिया गया। प्रशासनिक अधिकारी नया राशन कार्ड बनवाने और उसका डाटा आनलाइन करवाने में जुट गये। इसके साथ ही परिवार के मुखिया का आधार कार्ड अनिवार्य होने संबंधी डाटा भी आवेदन पत्र के साथ मांगा जाने लगा। जिले में व्यापक स्तर पर आधार कार्ड बनवाने के कैम्प लगवाये गये। तब जाकर आवेदकों के परिवार के मुखिया का आधार कार्ड बन पाया। जब आवेदकों को नये राशन कार्ड मिले, तो उसमें नाम, पता और लिंग संबंधी अनेकों त्रुटियां थीं। जिनको सही करवाना आवेदकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इसी वजह से सभी आवेदकों को राशन कार्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। जो खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करने में सबसे बड़ा पेंच साबित हो रहा है।

कोटेदारों की शिकायतों पर नहीं हो रही कार्रवाई
आंकड़ों पर गौर करें तो लखनऊ में कोटेदारों की कुल संख्या 1285 है। हर कोटेदार के क्षेत्र में औसतन 800 राशन कार्ड धारक हैं। आपूर्ति विभाग की तरफ से भरवाये गये फार्मों और आनलाइन फीडिंग प्रक्रिया में 50 प्रतिशत कार्ड धारकों का नाम, पता, लिंग, मतदाता पहचान पत्र संख्या और आधार नंबर गलत दर्ज है। इसको दुरुस्त करवाने और डाटा फीडिंग का काम करवाना मुश्किल हो गया है। कोटेदारों का आरोप है कि डाटा फीडिंग करने वाली एजेंसी आवेदकों से संशोधन के नाम पर प्रति फार्म 10-15 रुपये वसूल रही है। यह शुल्क कार्डधारकों का डाटा आनलाइन फीड करवाने एजेंसी पहुंचने वाले कोटेदारों से वसूला जा रहा है। जबकि डाटा फीडिंग करने वाली एजेंसी को टेंडर के तहत मिलने वाली धनराशि का निर्धारण पहले ही हो चुका है। इसके बावजूद आवेदनकर्ताओं से वसूली करना गलत है। इसकी शिकायत क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों से भी की जा चुकी है लेकिन एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं।

तय समय पर शुरू हो जायेगा खाद्यान्न का वितरण

जिला आपूर्ति अधिकारी सीके ओझा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चयनित लाभार्थियों की संख्या पांच लाख 14 हजार के करीब है। इनमें से अधिकांश लोगों के पास राशन कार्ड हैं। जिन लोगों ने ऑनलाइन फार्म भरे हैं। उनको नये राशन कार्ड बनाकर दिये जायेंगे। हाल ही में 14 जनवरी को शासन स्तर पर आयोजित बैठक में राशन कार्ड बनाने संबंधी नये निर्देश जारी किए गए हैं। जिसमें पात्र लाभार्थियों को नया कार्ड जारी किया जायेगा। इसके लिये दो तरह के फार्म भरने होंगे। एक में राशन कार्ड में मौजूद त्रुटियों का विवरण दिया जायेगा। इसके अलावा दूसरे फार्म में यूनिट संबंधी विवरण मांगा जायेगा। इन सभी को संशोधित करके नया कार्ड दिया जायेगा। हम आश्वस्त हैं कि निर्धारित समय पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिले में चयनित लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरित करने की प्रक्रिया शुरूकर दी जायेगी।

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