राफेल सौदा यानी एक तीर, कई निशाने

सवाल यह है कि लड़ाकू विमान राफेल को खरीदने के पीछे आखिर भारत की मंशा क्या है? क्या भारत ने इस विमान को चीनी चुनौती से निपटने के लिए खरीदा है या यह भारतीय सेना की जरूरत भी है?

sanjay sharma editor5लंबे इंतजार के बाद भारत और फ्रांस के बीच लड़ाकू विमान राफेल की डील पक्की हो गई। फ्रांस के रक्षामंत्री ज्यां यीव ली ड्रियान और भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। 36 विमानों का यह सौदा 7.8 बिलियन यूरो का है। सभी विमान 66 महीनों में मिल जाएंगे। डेढ़ वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस यात्रा के दौरान इन विमानों को खरीदने की घोषणा की थी। सवाल यह है कि लड़ाकू विमान राफेल को खरीदने के पीछे आखिर भारत की मंशा क्या है? क्या भारत ने इस विमान को चीनी चुनौती से निपटने के लिए खरीदा है या यह भारतीय सेना की जरूरत भी है? दरअसल, अंतरराष्टï्रीय सीमा पर चीन व पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत चिंतित है। अरुणाचल व उत्तराखंड की सीमा में चीनी सेना की घुसपैठ की घटनाएं बढ़ गई हैं तो पाकिस्तान एलओसी का लगातार उल्लंघन कर रहा है। सीमा पार से आतंकी घुसपैठ भी बड़ी समस्या है। इसे लेकर भारत का इन देशों से तनाव बना रहता है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सेना विशेषकर वायुसेना को और मजबूत करने की जरूरत शिद्दत से महसूस की जा रही थी। भारत नहीं चाहता कि उसकी सीमाएं असुरक्षित हो और इसका फायदा दूसरे देश उठाएं। राफेल से लैस हो जाने के बाद भारतीय वायुसेना निश्चित रूप से मजबूत होगी। राफेल की ऐसी खासियतें हैं जिसके कारण भारत ने इस विमान को अमेरिकी कंपनी लॉकहीड व रूसी मिग विमान पर तरजीह दी। यही नहीं राफेल सीरिया और इराक में अपनी उपयोगिता भी साबित कर चुका है। यह विमान करीब चार हजार किमी तक उड़ान भर सकता है। राफेल हवा से जमीन पर मार करने वाली खतरनाक स्कैल्प मिसाइलों से लैस है। इसके जरिए भारत से चीन और पाकिस्तान तक मार की जा सकती है। यह भी सच है कि भारतीय वायुसेना को अपडेट किए जाने की आवश्यकता थी। वायुसेना के पास अभी 70 व 80 के दशक के पुराने पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं। एयरफोर्स के पास 44 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, लेकिन पुराने विमानों के फेज आउट होने से 34 स्क्वाड्रन ही हैं। भारत ने इसके पूर्व 1996 में रूस से सुखोई 30 एमकेआई खरीदा था। इसके अलावा इंडियन एयरफोर्स बियोन्ड विजुअल रेंज मिसाइल पर काम कर रही है। यदि इसे राफेल से दागा जाएगा तो यह पाकिस्तान के अंदर तक तबाही मचा सकती है। लिहाजा चीन भी इस सौदे से परेशान है। कुल मिलाकर भारत ने लड़ाकू विमान राफेल सौदे से कई निशाने साधे हैं।

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