राजमार्गों की देखभाल जरूरी

अक्सर देखा जाता है कि ठीक तरह से देखभाल नहीं हो पाने सडक़ें खराब हो जाती हैं। बाद में इनकी मरम्मत पर अधिक धन व्यय करना पड़ता है। खराब सडक़ों की वजह से ईंधन और समय दोनों की बर्बादी होती है। सडक़ों के रखर-रखाव पर ठीक से ध्यान देकर समय और धन को बचाया जा सकता है।

sanjay sharma editor5अक्सर सरकारें राजमार्गों के निर्माण और विस्तार के लिए बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की घोषणा करती रहती हैं। लेकिन यह बहुत चिंता की बात है कि इन मार्गों के रख-रखाव के लिए उचित धन नहीं मुहैया कराया जाता है। बीते हफ्ते एक संसदीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राजमार्गों की देखभाल के लिए जरूरी राशि का मात्र 40 फीसदी हिस्सा ही आवंटित होता है। पैनल ने यह भी कहा कि चूंकि रख-रखाव गैर-योजनागत मद के तहत आता है, इस वजह से सरकारें संसाधनों की कमी के बहाने कटौती करती रहती हैं।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में सिर्फ 2,834 करोड़ रुपये रख-रखाव के लिए तय किए गये हैं, जबकि इसके लिए करीब 7,070 करोड़ रुपये की जरूरत है। साल 2015-16 के बजट में राष्ट्रीय राजमार्गों की देखभाल के लिए 2,701.40 करोड़ रुपये का गैर-योजनागत आवंटन हुआ था, पर संशोधित आकलन में इसे घटा कर 2,698.40 करोड़ कर दिया गया था। सडक़ें राष्ट्रीय विकास की आधारभूत जरूरत हैं। इनके विकास में भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। गांवों, कस्बों और महानगरों के बीच यह आवागमन और समान के ढुलाई में राजमार्ग खास माध्यम हैं। इसीलिए इनके रख-रखाव को प्राथमिकता देने की जरूरत है। इसी के मद्देनजर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अनेक राज्यस्तरीय मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की घोषणा की है। उनकी योजना राजमार्गों की मौजूदा लंबाई को 1.3 लाख किलोमीटर से बढ़ा कर दो लाख किलोमीटर करने की है।
राजमार्गों के मद्देनजर संसदीय पैनल की रिपोर्ट खास हो जाती है। सरकार को इसकी सिफारिशों पर गंभीरता दिखानी चाहिए। पैनल का एक सुझाव भी बहुत खास है जिसमें कहा गया है कि रख-रखाव के मद में रकम उन मदों से राशि डाली जा सकती हैं जिनमें बचत की गुंजाइश है। अक्सर देखा जाता है कि ठीक तरह से देखभाल नहीं हो पाने से सडक़ें खराब हो जाती हैं। बाद में इनकी मरम्मत पर अधिक धन व्यय करना पड़ता है। खराब सडक़ों की वजह से ईंधन और समय दोनों की बर्बादी होती है। सडक़ों के रखर-रखाव पर ठीक से ध्यान देकर समय और धन को बचाया जा सकता है। मौजूदा राजमार्गों में करीब 75 हजार किलोमीटर सडक़ें सिर्फ दो लेन में हैं। इनके विस्तार की योजना है। ऐसे में सडक़ों की मरम्मत एक बड़ा मुद्दा है जिस पर काम करके सरकारें जनता को एक बेहतर तोहफा दे सकती है। उम्मीद है सरकारें अपनी जिम्मेदारी समझेंगी।

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