राजनीतिक हित हावी दिखे नीति आयोग की बैठक पर

यह काफी सकारात्मक रहा कि बैठक में भाजपा के धुर विरोधी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए और अपनी बात मजबूती के साथ रखी। केजरीवाल ने तो दिल्ली की स्थानीय राजनीति में केंद्र के कथित गैरजरूरी हस्तक्षेप का मुद्ïदा भी उठाया।

 नीरज कुमार दुबे
नीति आयोग की बैठक में ‘टीम इंडिया’ का बैनर भले लगा था लेकिन ‘टीम भावना’ का पूरी तरह अभाव था क्योंकि देशहित पर राजनीतिक हित ज्यादा हावी लग रहे थे। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित कुछ अन्य मुख्यमंत्रियों ने इस बैठक का बहिष्कार कर आने वाले दिनों की राजनीतिक तसवीर तो साफ कर दी है लेकिन उन्हें इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि बैठक में हिस्सा नहीं लेना क्या सहयोगात्मक संघवाद की भावना के खिलाफ नहीं है। एक ओर तो राज्य केंद्र पर अपने हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हैं लेकिन दूसरी तरफ जब उन्हें केंद्र के समक्ष अपनी बात खुलकर रखने का मौका मिलता है तो बैठक का बहिष्कार कर अपना ही नुकसान करते हैं।
नीति आयोग की बैठक का कांग्रेस ने जो बहिष्कार किया उसके बारे में रिपोर्टें हैं कि खुद कांग्रेसी मुख्यमंत्री इसके पक्ष में नहीं थे क्योंकि उन्होंने काफी दिनों से केंद्र के समक्ष अपनी बात रखने की तैयारी कर रखी थी लेकिन बैठक के दिन ही उनके पास पार्टी के एक बड़े नेता का फोन आया कि इस बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय हुआ है। कुछ मुख्यमंत्रियों ने इस निर्णय पर असहमति भी जताई लेकिन आलाकमान का निर्देश मानना ही था इसलिए बैठक में नहीं आये। बताया जाता है कि आलाकमान ने बैठक के बहिष्कार का निर्णय इसलिए किया क्योंकि इसमें भूमि अधिग्रहण विधेयक पर चर्चा होनी थी जिसका कांग्रेस पुरजोर विरोध कर रही है। लेकिन बैठक के बाद यह साफ हो गया कि कांग्रेस ने एक बड़ी गलती कर दी है क्योंकि बैठक में किसी पर भी भूमि विधेयक को लेकर दबाव नहीं बनाया गया खुद केंद्र सरकार राज्यों की इस मांग से कुछ हद तक सहमत नजर आई कि विकास प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए और इंतजार करना सही नहीं है इसलिए राज्य अपना भूमि कानून बना लें जिसे केंद्र मंजूरी प्रदान करे।
यह काफी सकारात्मक रहा कि बैठक में भाजपा के धुर विरोधी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए और अपनी बात मजबूती के साथ रखी। केजरीवाल ने तो दिल्ली की स्थानीय राजनीति में केंद्र के कथित गैरजरूरी हस्तक्षेप का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने एक सुनहरे मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। इसी तरह नीतीश कुमार जोकि इन दिनों अपने राज्य में विधानसभा चुनावों की तैयारियों में लगे हुए हैं और भाजपा के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, ने बैठक में शामिल होकर अपने राज्य के हितों पर राजनीति हावी नहीं होने का संदेश दिया। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता भी बैठक में नहीं आए लेकिन उन्होंने इस बारे में अपनी मजबूरियों को केंद्र सरकार को बताया। ममता बनर्जी ने भूमि अधिग्रहण विधेयक के चलते नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने हालांकि इसके लिए कोई विशेष कारण नहीं बताया। उनके कार्यालय के मुताबिक मुख्यमंत्री उस दिन कई कार्यक्रमों में व्यस्त रहे। 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों का बैठक में शामिल नहीं होना वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। कहा जा सकता है कि विपक्ष ने इस कदम के साथ अपने गैरजिम्मेदारी भरे रवैये का परिचय दिया है।
पहले जब योजना आयोग हुआ करता था तब उसके पास राज्य अपनी वार्षिक वित्तीय मांगें लेकर आया करते थे। कभी कभी उनकी सारी मांगें पूरी भी हो जाया करती थीं। अपने बारे में निर्णय लेने की प्रक्रिया में राज्य कहीं से शामिल नहीं थे। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने तब महसूस किया था कि योजना आयोग में राज्यों की पर्याप्त भागीदारी होनी चाहिए ताकि विकास को और गति मिल सके। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद योजना आयोग का पुराना स्वरूप खत्म कर इसे नीति आयोग में तब्दील किया जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के राज्यपालों को सदस्य बनाया गया। नीति आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं। आयोग में एक उपाध्यक्ष, दो पूर्णकालिक सदस्य, अल्पकालिक सदस्य और पदेन सदस्य हैं। इसके अलावा एक सचिव स्तर के अधिकारी को आयोग का सीईओ बनाया गया है। नीति आयोग केंद्रीय मंत्रियों और राज्य सरकारों के साथ गहरे सहयोग, परामर्श एवं समन्वय के साथ काम करे इसके लिए पूरी व्यवस्था की गयी है। नीति आयोग में कई खास विंग्स भी हैं जिनमें रिसर्च, कंसल्टेंसी और टीम इंडिया शामिल है। राज्यों को इस महत्वपूर्ण समूह का हिस्सा बनाकर प्रधानमंत्री ने बड़ा मौका प्रदान किया है जिसका अधिक से अधिक लाभ मुख्यमंत्रियों को अपने राज्य को दिलाना चाहिए।

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