राजनीतिक हथकंडा

देश में कुछ विशेष मुद्दे हमेशा कारगर रहे हैं। मसलन आरक्षण, साम्प्रदायिकता, राम मंदिर। बिहार चुनाव में भी आरक्षण मुद्दा काफी कारगर हुआ था। इसलिए मायावती का बयान काफी अहम है, खासकर आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए।

sanjay sharma editor5बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने राज्यसभा में कल सवर्णों को आरक्षण देने की वकालत की। उन्होंने सवर्णों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने का समर्थन किया है। मायावती के इस बयान से राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ गई है। राजनीतिक पार्टियां इसे चुनावी हथकंडा करार दे रही हैं। दरअसल 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है। इस लिहाज से मायावती का बयान बहुत मायने रखता है। 2007 में यूपी की सत्ता में मायावती दलित और ब्राह्मïण समीकरण के दम पर ही काबिज हुई थीं। इसके पहले अभी तक कभी भी सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण की मांग नहीं की गई थी। अचानक से इस बयान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। कल मायावती ने राज्ससभा में इस मुद्दे पर बढ़-चढक़र अपनी राय रखी। इस मौके पर उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कभी भी कांग्रेस और भाजपा ने आरक्षण का कोटा पूरा नहीं किया। कांग्रेस की सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण को खत्म नहीं किया, लेकिन कुछ ऐसे फैसले हुए कि उस पर अंकुश लग गया। केंद्र की वर्तमान सरकार ने निजी सेक्टर में आरक्षण की सुविधा दिए बिना बड़े फैसले लिए। आरक्षण की आड़ में बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
देश में कुछ विशेष मुद्दे हमेशा कारगर रहे हैं। मसलन आरक्षण, साम्प्रदायिकता, राम मंदिर। बिहार चुनाव में भी आरक्षण मुद्दा काफी कारगर हुआ था। इसलिए मायावती का बयान काफी अहम है, खासकर आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए। उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव की तैयारी में सभी पार्टियां लगी हुई हैं। चुनावी सरगर्मी प्रदेश में पिछले छह महीने से है। जब से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू हुई तभी से प्रदेश में चुनावी माहौल बन गया है। जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनाव को सभी पार्टियों ने विधानसभा का सेमीफाइनल के तर्ज पर लड़ा था। इस चुनाव में बसपा के पक्ष में परिणाम आए। भारी संख्या में बसपा समर्थित प्रत्याशियों को विजय मिली थी। मायावती भी इस परिणाम से काफी खुश थी। अब आरक्षण के बहाने से मायावती एक बार फिर हिंदू-ब्राह्मïण वोट को अपनी तरफ खींचने की कोशिश में लग गई है। अब तो सभी नेताओं के बयान राजनीति से प्रेरित और वोटरों को ध्यान में रखकर आ रहे हैं। कुछ दिनों पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्व. अशोक सिंघल की शोकसभा में यह कहकर चुनावी सरगर्मी बढ़ा दी थी कि राम मंदिर का निर्माण ही स्व. सिंघल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। देश के नेताओं को हमारी उतनी फिकर नहीं होती जितनी चुनाव के दौरान अपने वोटरों की होती है। अब देखना होगा इस आरक्षण की मांग के बहाने क्या-क्या हित साधे जाते हैंं।

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