राजनीतिक चोला पहनने में कामयाब हो गया गैंगस्टर अनिल दुजाना

  • 20 से ज्यादा हत्या और रंगदारी का केस
  • जेल में बंद होने के बावजूद जीता चुनाव

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। देश में राजनीतिक चोला पहनकर अपराधी खुद को सफेदपोश बनाने में कामयाब होते जा रहे हैं। डीपी यादव, बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बाद गौतमबुद्ध नगर जिले का गैंगस्टर अनिल दुजाना भी राजनीतिक चोला पहनने में कामयाब हो गया है। उसने जेल में रहते हुए जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत लिया है।
अनिल दुजाना मूल रूप से गौतमबुद्धनगर जिले का रहने वाला है। उस पर 20 से ज्यादा हत्या, लूट और जानलेवा हमलों के केस दर्ज हैं। वर्ष 2011 में अनिल दुजाना गैंग ने साहिबाबाद में एक शादी समारोह में शूट आउट किया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा वर्ष 2014 में एक नामी स्टील कंपनी के एजीएम पीके त्यागी से गैंगस्टर अनिल दुजाना के नाम से फोन पर रंगदारी मांगी गई थी, जिसमें ज्ञान खंड निवासी एजीएम के मुताबिक रंगदारी मांगने वाले ने खुद को जेल में बंद अनिल दुजाना बताया था। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा में विजय पंडित की हत्या करवाने की जिम्मेदारी भी खुद लेने की बात कही थी। ऐसा कहने का मकसद रंगदारी देने के लिए हां करवाना और बात नहीं मानने पर जान से जाने की धमकी देना था। इस मामले में एजीएम ने इंदिरापुरम थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई थी। इस तरह क्षेत्र में रंगदारी और हत्या के मामलों में कुख्यात अपराधी के रूप में मशहूर अनिल दुजाना के जिला पंचायत सदस्य बनने पर राजनीतिक गलियारे में अपराधियों की जान बचाने के मकसद में राजनीति में आने की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। दरअसर सूत्रों की मानें तो अनिल दुजाना का मकसद आने वाले विधानसभा चुनाव में किसी न किसी पार्टी से टिकट हासिल करना और विधानसभा पहुंचने का है।

कौन है अनिल दुजाना

सुंदर भाटी और अमित कसाना गैंग के बीच गैंगवार चली आ रही है। 18 नवंबर 2011 को साहिबाबाद स्थित न्यू इंडिया फार्म हाउस में दोनों गैंग के बीच शूट आउट हुआ था। गैंगवार के बाद तत्कालीन एसएसपी रघुबीर लाल ने बताया था कि अनिल दुजाना अमित कसाना गैंग में शामिल है। सरिया माफिया अनिल दुजाना की सुंदर भाटी से सरियों की कालाबाजारी की दुश्मनी है। सुंदर भाटी को सबक सिखाने के लिए वह कसाना के साथ मिला है। गैंगवार मामले में अनिल दुजाना पर गाजियाबाद से 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उसे 2012 में बुलंद शहर जेल में कड़ी सिक्योरिटी के बीच रखा गया है। एक बार बांदा जेल से न्यायालय ले जाते समय कुछ लोगों ने दुजाना को छुड़ाने की कोशिश की थी। लेकिन बदमाश कामयाब नहीं हुए। उसको गौतमबुद्ध जेल में सुरक्षित पहुंचा दिया गया था।

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