राजधानी में बी निगेटिव ब्लड का संकट

मरीजों को बना रहता है जान का खतरा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

केस-1Capture
आलमबाग निवासी विजय कुमार एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। उनकी आंत का ऑपरेशन होना है। ऑपरेशन के लिए बी निगेटिव ब्लड ग्रुप की आवश्यकता है। मरीज के परिजन शहर के सभी बड़े सरकारी अस्पतालों के साथ सभी जगह ब्लड देख चुके हैं लेकिन उनहें मायूसी ही हाथ लगी। मरीज का आूपरेशन अधर में लटका हुआ है।

केस-2
आलमनगर निवासी विकास का एक्सीडेंट हो गया था,वह एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। उन्हें बी निगेटिव ग्रुप की जरूरत है लेकिन अभी तक खून नहीं मिल पाया है।
लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में खून के लिए जद्दोजहद जारी है। तीमारदारों को अपने मरीजों को खून देने के लिए भारी कसरत करनी पड़ रही है। खासकर बी निगेटिव ब्लड ग्रुप मिलना मुश्किल हो रहा है, जिससे मरीजों की जान पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। केजीएमयू से लेकर लोहिया, बलरामपुर अस्पताल में बी निगेटिव ब्लड ग्रुप का संकट बना हुआ है।
नहीं है ऑनलाइन की सुविधा
सरकारी अस्पतालों में स्थित ब्लड बैंक ऑनलाइन नहीं है, जिससे कई बार खराब हुए ब्लड को फेंकना पड़ता है। अगर ऑनलाइन की सुविधा हो जाये तो ब्लड बैंकों को एक-दूसरे के ब्लड स्टॉक और जरूरत की जानकारी मिल जाये जिससे बहुत हद तक खराब हो रहे ब्लड का उपयोग किया जा सकता है। एड्स नियंत्रण सोसाइटी के प्रोग्राम कंट्रोलर अभिषेक ने बताया कि ब्लड बैंकों के ऑनलाइन का काम चल रहा है। जल्दी ही इस समसया से निजात मिलेगी।
बी नेगेटिव ब्लड के लिए माथापच्ची
सरकारी अस्पतालों में खासकर बी नेगेटिव ब्लड के लिए तीमारदारों और मरीजों की माथापच्ची जारी है। अमूमन ऐसे मामलों में तीमारदारों को परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों से खून लेने के लिए दबाव बनाया जाता है। सडक़ हादसों या अन्य घटनाओं के दौरान अस्पताल पहुंचने वाले नेगेटिव ब्लड ग्रुप को खून मिलना काफी मुश्किल रहता है। शहर के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान केजीएमयू में भी निगेटिव ब्लड ग्रुप का संकट है।

रक्तदान के लिये किया जा रहा प्रेरित

केजीएमयू की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि निगेटिव ब्लड ग्रुप की भारी कमी है। इसके लिए जगह-जगह रक्तदान शिविर लगाये जा रहे हैं और निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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