राजधानी में बढ़ रहा स्ट्रीट फूड का चलन

  • शहर के पॉपुलर स्ट्रीट फूड स्पॉट बन रहे पिकनिक स्पॉट
  • खाने में लजीज होने और कम कीमत की वजह से लोग कर रहे पसंद

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Capture 6लखनऊ। राजधानी का विकास जिस रफ्तार से हो रहा है, उसी रफ्तार से यहां ‘स्ट्रीट फूड’ की खपत भी बढ़ती जा रही है। यहां की सडक़ों पर लगे मोमोस , छोले-कुल्चे और अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानों पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ होती है। स्ट्रीट फूड यानी सडक़ किनारे लगी छोटी-छोटी दुकानों पर सजे एक से बढ़ कर एक स्वादिष्ट-चटपटे व्यंजन मिलते हैं। जो हमारा ध्यान बड़ी आसानी से अपनी ओर खींचते हैं। लखनऊ के स्ट्रीट कल्चर में तो इन व्यंजनों की खास पहचान बन गयी है। चाहे गर्मियों की तपती धूप हो या कड़ाके की ठंड, लखनऊवालों के लिए स्ट्रीट फूड की बहार सी रहती है।
सडक़ के किनारे लगने वाली दुकानों पर सूप के साथ मोमोस , चाट-पापड़ी, गोलगप्पे, आलू टिक्की, समोसा, कबाब पराठे, कुल्फी फालूदा कुछ ऐसे स्ट्रीट फूड हैं, जो हर गली-नुक्कड़ पर हमारा ध्यान खींचते। इन्हें खाने वालों की भीड़ उमड़ पड़ती है। लखनऊ की स्ट्रीट कल्चर में दूसरे राज्यों और देशों के व्यंजन भी मिलते हैं, जिनमें चाउमीन, हॉट-स्वीट कॉर्न इन बटर, मोमोस, बर्गर, इडली, डोसा जैसे कई व्यंजन शामिल हैं। शहर में पहले खोमचे और रेहड़ी वाले हुआ करते थे। लेकिन आजकल सडक़ों के किनारे मिलने वाले खाने के स्टॉल्स पर हर किसी की पसंद से हिसाब के खाने का सामान मिलने लगा है। ऑफिस के लोगों और छात्रों के अलावा खरीदारी के लिए निकले लोगों के बीच स्ट्रीट फूड खूब लोकप्रिय है, जो कि किफायती दाम में भी मिलता है।

अवध की चटोरी गलियां

लखनऊ के स्ट्रीट फूड कार्नर में पत्रकार पुरम के कुल्चे-छोले, 1090 चौराहे पर लगी दुकानों पर मिलने वाले मसालेदार लाल गर्म चटनी में डूबा हुआ वेज मोमोस। इसके अलावा गोलगप्पे खाने के शौकीनों के लिए हजरतगंज का इलाका काफी मशहूर है। छोले-भटूरे खाने के शौकीनों के लिए लखनऊ में ठिकानों की कमी नहीं है। चौक इलाके के लस्सी कार्नर पर लस्सी का टेस्ट लेने वालों के अलावा छोले-भटूरे खाने वालों की भीड़ लगती है। शहर में वेज कबाब पराठा, पनीर कबाब पराठा और अन्य कई तरह के कबाब जगह-जगह बिकते मिल जायेंगे। इडली और डोसा, सिंपल हेल्दी और टेस्टी दक्षिण का खाना भी बहुत मशहूर है, जिसे लोग बड़े ही चाव के साथ खाते हैं। शहर के कई जगहों पर मैगी लवर्स का भी ध्यान रखा जाता है। गोमतीनगर स्थित एसआरएस माल के नजदीक कई मैगी की कई दुकानें लगी मिल जाएंगी। जहां कई वैराइटी की मैगी मिलती है। इसके अलावा नॉन वेज खाने वालों के लिए भी जगह-जगह चिकन टिक्का, मटन कोरमा, फिश फ्राइ और अनेकों लजीज डिश मिलती हैं।

स्ट्रीट फूड के खतरे

रोड के किनारे लगी इन दुकानों पर खाना बनाते समय साफ-सफाई का बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाता है। जिसपानी का इस्तेमाल खाना बनाते समय करते हैं, वो साफ नहीं होता है। इसकी वजह से इन खाद्य पदार्थों में ‘इकोलाई’ और ‘साल्मोनेला’ जैसे जीवाणु होते हैं, जो पेट और आंत संबंधी बीमारियों को जन्म देते है। यहां खाना खाने वालों को कभी-कभी ‘फूड प्वाइजनिंग’ भी हो जाती है। इन दुकानों पर हाथ साफ करने के लिए साबुन वगैरह भी नहीं होता, जिससे लोग खाने से पहले हाथ धो सकें। बर्तनों की सफाई पर खास ध्यान नहीं दिया जाता है। खाने में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं में भी मिलावट होती है। इनके वेस्ट डिस्पोजल, पर्यावरण को भी नुकसान तो पहुंचाते हैं।
बढ़ता बिजनेस
स्ट्रीट फूट का चलन बढऩे की मेन वजह खाने के लजीज व्यंजन कम कीमत में मिलना है, जिसको एक साधारण आदमी भी खरीद और खा सकता है। यह गरीबों की भूख मिटाने का सही स्थान है। जबकि अमीरों के लिए स्ट्रीट फूड वाले स्पॉट पिकनिक, रोमांच और टाइम पास की जगह बन गये हैं।

लखनऊ की शाम स्ट्रीट फूड के नाम

आज शहरों में बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल और रेस्टोरेंट खुल चुके हैं। जहां लोग घूमने, मूवी देखने और शॉपिंग करने जाते हैं। लेकिन बहुत से लोग ऐसी जगहों पर खाना पसंद नहीं करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह खाने के सामान का महंगा होना है। इसलिए लोग शापिंग मॉल्स के पास लगे स्ट्रीट फूड के लजीज खानों को अधिक पसंद करते हैं।
एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करने वाले गौरव त्रिपाठी ने बताया कि मैं अक्सर ऑफिस के बाद दोस्तों के साथ स्ट्रीट फूड का मजा लेने आता हूं। इससे दोस्तों के साथ हैंगआउट भी हो जाता है। हमें कई वैराइटी की डिशेज भी खाने को मिल जाती हैं। गोमतीनगर स्थित रिवर फ्रंट का हुलिया बदलने के बाद ज्यादातार लोग अपनी शाम वहीं बिताने पहुंचने लगे हैं। यहां से लेकर 1090 चौराहे तक लगने वाले स्ट्रीट फूड का जायका लोगों को बहुत पसंद है।

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